नेपाल: प्रधानमंत्री देउबा की नई चाल से खतरे में पड़ सकता है सत्ताधारी गठबंधन
नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) की मांग है कि देउबा सरकार इस अमेरिकी पेशकश को ठुकरा दे। दोनों पार्टियों का कहना है कि ये मदद चीन के साथ अमेरिका की चल रही होड़ का हिस्सा है...
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नेपाल की राजनीति में एक बार फिर उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से तार जुड़ने के संकेत मिल रहे हैं। मुद्दा अमेरिकी मदद का है। देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां ये मदद लेने का जोरदार विरोध कर रही हैं। तो अब नेपाली मीडिया में ऐसी खबरें छपी हैं कि देउबा ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता ओली से संपर्क साधा है।
अमेरिकी पेशकश को ठुकराए देउबा सरकार
अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) ने नेपाल को 50 करोड़ डॉलर की मदद देने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) की मांग है कि देउबा सरकार इस अमेरिकी पेशकश को ठुकरा दे। दोनों पार्टियों का कहना है कि ये मदद चीन के साथ अमेरिका की चल रही होड़ का हिस्सा है। नेपाल को इस होड़ में नहीं फंसना चाहिए।
एमसीसी ने यह मदद देने का प्रस्ताव सितंबर 2017 में रखा था। लेकिन देश में जारी विरोध के कारण आज तक मदद लेने के लिए जरूरी अनुमोदन का प्रस्ताव संसद में पारित नहीं हो सका है। प्रधानमंत्री देउबा हमेशा से एमसीसी की मदद लेने के समर्थक रहे हैं। उधर जब केपी शर्मा ओली जब प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने ये मदद स्वीकार कर लेने का मन बनाया था। लेकिन सत्ता से हटने के बाद उन्होंने अपनी राय बदल ली। तब से यूएमएल पार्टी इस मदद का विरोध कर रही है।
नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मदद के अनुमोदन में संसद में प्रस्ताव पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री देउबा कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इसी सिलसिले में यूएमएल से संपर्क साधा गया है। देउबा के करीबी माने जाने वाले नेता मिन विश्वकर्मा ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘देउबा और ओली औपचारिक और अनौपचारिक माध्यमों से बातचीत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री एमसीसी की मदद के अनुमोदन और स्थानीय चुनावों के समय के मुद्दों पर राष्ट्रीय आम सहमति बनाने की कोशिश में हैं।’
विशेषज्ञ बोले- जोखिम भरी है कोशिश
लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि एमसीसी की सहायता के सवाल पर यूएमएल का समर्थन लेने की देउबा की कोशिश जोखिम भरी है। इसका परिणाम सत्ताधारी गठबंधन के टूटने के रूप में सामने आ सकता है। मौजूदा संसदीय समीकरण के बीच अगर माओइस्ट सेंटर और यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टियों ने अपना समर्थन वापस ले लिया, तो देउबा सरकार गिर जाएगी।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि ओली सत्ताधारी गठबंधन के प्रति अपमान का भाव रखते हैं। उनकी राय है कि इस गठबंधन के पास सरकार चलाने का जनादेश नहीं है। वह अदालत के आदेश से सत्ता में आया है। इसके बावजूद खबरों के मुताबिक देउबा ने अपने कई दूत हाल में ओली के पास भेजे हैं। सोमवार को संचार और सूचना मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कारकी ओली से मिले। नेपाली कांग्रेस के एक नेता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘यह साफ है। कारकी देउबा का संदेश लेकर गए। वरना, वे ओली से क्यों मिलते?’