Nepal Politics: नेपाल में अस्थिरता बढ़ी, फिर से गृह मंत्रालय पाने को आतुर लमिछाने ने दिया झटका
Nepal Politics: राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक नागरिकता वापस मिलने के तुरंत बाद लमिछाने ने गृह मंत्रालय वापस पाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी। इसके लिए उन्होंने यूएमएल प्रमुख केपी शर्मा ओली से भी संपर्क किया...
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राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के पुष्प कमल दहल सरकार से हट जाने से सत्ताधारी गठबंधन की स्थिरता पर सवाल और गहरा गया है। आरएसपी के सभी मंत्रियों ने रविवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री दहल को सौंप दिया। पिछले आम चुनाव में प्रतिनिधि सभा की 20 सीटें जीत कर आरएसपी चौथे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी।
पार्टी प्रमुख रबि लमिछाने को गृह मंत्रालय के साथ फिर से सरकार में शामिल करने पर प्रधानमंत्री के तैयार न होने के कारण आरएसपी ने सरकार से हटने का निर्णय लिया है, हालांकि उसने प्रतिनिधि सभा में सत्ताधारी गठबंधन को अपना समर्थन जारी रखने का फैसला किया है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर आरएसपी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है।
नेपाल का वैध नागरिक न होने के कारण लमिछाने की संसद सदस्यता सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी थी। इस कारण उन्हें उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस घटना के बाद उन्होंने नेपाल की नागरिकता लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। लमिछाने ने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें मंत्री पद हाथ जाने के लिए उन्होंने खुद को दोषी मानने से इनकार किया।
जबकि कानून विशेषज्ञों के मुताबिक पासपोर्ट से संबंधित गड़बड़ी के आरोप में अभी भी उन पर मुकदमा दायर होने का खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री दहल ने इसी संभावना की वजह से उन्हें दोबारा गृह मंत्रालय देने से इनकार किया है। लमिछाने ने इसको लेकर सत्ताधारी गठबंधन के नेताओँ की कड़ी आलोचना की। इसके पहले लमिछाने ने आरएसपी की सेंट्रल कमेटी और संसदीय दल की बैठक बुलाई, जिसमें दहल सरकार से बाहर निकलने का फैसला किया गया। इसके बाद पार्टी से जुड़े मंत्रियों ने अपने इस्तीफे प्रधानमंत्री को सौंप दिए।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक नागरिकता वापस मिलने के तुरंत बाद लमिछाने ने गृह मंत्रालय वापस पाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी। इसके लिए उन्होंने यूएमएल प्रमुख केपी शर्मा ओली से भी संपर्क किया। लेकिन गठबंधन के बाकी दलों में इस बात पर सहमति है कि फिलहाल लमिछाने को गृह मंत्रालय नहीं दिया जाना चाहिए। इसके अलावा वे जो चाहें, वह विभाग उन्हें दिया जा सकता है। लेकिन लमिछाने ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
इस घटनाक्रम की चर्चा करते हुए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में राजनीतिक शास्त्र के प्रोफेसर राजेश गौतम ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘रविवार की घटनाओं ने दो बातों की पुष्टि कर दी- पहली यह कि लमिछाने एक आत्म-केंद्रित व्यक्ति हैं, दूसरी यह कि वे अपनी पार्टी पर से अपनी पकड़ी ढीली नहीं होने देना चाहते। वरना, वे चाहते तो अपनी पार्टी के किसी अन्य नेता को गृह मंत्री बनवा सकते थे।’
प्रधानमंत्री दहल की राय है कि लमिछाने की नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़े कई मुद्दों का हल होना अभी बाकी है। ये मसले गृह मंत्रालय के तहत आते हैं। इसलिए अभी लमिछाने को यह मंत्रालय देना उचित नहीं होगा। समझा जाता है कि इस मुद्दे पर दहल और ओली के बीच बातचीत हुई, जिसमें ओली को अपनी बात समझाने में प्रधानमंत्री सफल रहे।