Nepal Politics: अब राजनीति में अपनी बेटी गंगा को आगे बढ़ा रहे हैं पुष्प कमल दहल
Nepal Politics: दहल के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीते 29 दिसंबर को काठमांडू स्थित अमेरिकी राजदूत डीन आर थॉम्पसन दहल से मिले। उसके अगले दिन भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और काठमांडू में चीन के दूतावास के प्रभारी वांग शिन ने भी प्रधानमंत्री से भेंट की। इन तमाम मौकों पर गंगा दहल मौजूद रहीं...
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Nepal Politics: नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की राजनीति में अपनी बेटी को आगे बढ़ाने की कोशिश की चर्चा यहां के सियासी हलकों में गर्म है। उनके दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेताओं ने दहल की इस मंशा की पुष्टि की है। दहल बीते 25 दिसंबर को अपनी छोटी गंगा दहल को राजनीतिक मंच पर ले आए। उसी रोज दहल ने पाला बदल कर नए गठबंधन से जुड़ गए थे। उस रोज गंगा दहल को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से हाथ मिलाते देखा गया।
दहल अभी जिस गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, उसमें यूएमएल सबसे बड़ी पार्टी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पिछले नवंबर में हुए आम चुनाव के समय से गंगा दहल की सक्रियता चर्चित रही है। बताया जाता है कि दहल और ओली के बीच मेलमिलाप कराने में गंगा ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन दोनों कम्युनिस्ट नेताओं में पहले छत्तीस का आंकड़ा था।
ओली से हाथ मिलाते हुए गंगा दहल की बहुचर्चित तस्वीर ओली के बालकोट स्थित निवास पर खींची गई थी। माओइस्ट सेंटर के नेता युवराज चौलागइन ने अखबार काठमांडू पोस्ट को बताया- ‘ये फोटो उस समय की है, जब पुष्प कमल दहल ओली से यह कह रहे थे कि गंगा आपकी प्रशंसक है और हमेशा वामपंथी एकता की समर्थक रही है। हालांकि पार्टी का कोई औपचारिक पद गंगा के पास नहीं है, लेकिन वह दहल की निजी सचिव के रूप में काम करती रही हैं। ऐसा लगता है कि अब दहल अपनी बेटी को राजनीति में आगे बढ़ा रहे हैं।’
दरअसल, सिर्फ बालकोट में दहल और ओली के बीच हुई मुलाकात ही अकेला ऐसा मौका नहीं था, जब गंगा राजनीतिक बैठकों के दौरान अपने पिता के साथ देखी गई हो। मीडिया कर्मियों के मुताबिक अब दहल जहां कहीं किसी महत्त्वपूर्ण मौके पर जाते हैं, गंगा उनके साथ देखी जाती है। प्रधानमंत्री बनने के पहले के तीन हफ्तों में जब दहल सियासी समीकरण बैठाने में जुटे हुए थे, तो पार्टी के अंदर की हर बैठक में गंगा मौजूद रही। इसके अलावा वह सार्वजनिक सभाओं और यहां तक विदेशी राजनयिकों से दहल की मुलाकात के मौकों पर भी मौजूद रही है।
दहल के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीते 29 दिसंबर को काठमांडू स्थित अमेरिकी राजदूत डीन आर थॉम्पसन दहल से मिले। उसके अगले दिन भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और काठमांडू में चीन के दूतावास के प्रभारी वांग शिन ने भी प्रधानमंत्री से भेंट की। इन तमाम मौकों पर गंगा दहल मौजूद रहीं।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पहले दहल ने अपने बेटे प्रकाश को राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन नवंबर 2017 में प्रकाश की आकस्मिक मृत्यु हो गई। बताया जाता है कि प्रकाश की मौत से दहल को गहरा सदमा लगा, जिससे वे अभी तक नहीं उबर पाए हैं। इसके पहले उनकी बड़ी बेटी रेणु की मार्च 2014 में कैंसर से मृत्यु हो गई थी। गुजरे वर्षों में दहल की पत्नी की सेहत भी खराब रही है।
दहल रेणु को भी राजनीति में ले आए थे। रेणु दो बार भरतपुर मेट्रोपॉलिटन सिटी की मेयर चुनी गई थीं। अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दहल गंगा को राजनीति में अपना उत्तराधिकारी बनाने का प्रयास करते दिए रहे हैं।