Nepal Politics: नेपाल में सत्ता का रिमोट कंट्रोल रहेगा केपी शर्मा ओली के हाथ में!
Nepal Politics: सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं की गुरुवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें ओली को समिति का अध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ। समिति का पहला काम नई सरकार के लिए एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना होगा...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल में प्रधानमंत्री भले पुष्प कमल दहल बने हों, लेकिन सत्ता संचालन की कमान पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के हाथ रहेगी। सरकार चलाने में प्रधानमंत्री और सरकार की मदद के लिए एक खास समिति के गठन के बाद ऐसी अटकलों को बल मिला है। इस समिति के अध्यक्ष ओली बनाए गए हैं। संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) नए बने सत्ताधारी गठबंधन के भीतर सबसे बड़ी पार्टी है। सदन में उसके 78 सदस्य हैं, जबकि दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के सिर्फ 32 सांसद ही हैं।
सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं की गुरुवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस में ओली को समिति का अध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ। समिति का पहला काम नई सरकार के लिए एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना होगा। समिति ने पांच दिन के अंदर यह कर लेने का संकल्प जताया है। समिति में ओली के अलावा राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के धवल शमशेर राना, माओइस्ट सेंटर के बरशामन पुन, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के मुकुल धकाल को भी शामिल किया गया है। उनके अलावा यूएमएल के एक अन्य नेता और गठबंधन में शामिल बाकी दलों के एक-एक प्रतिनिधि को इसमें रखा जाएगा।
यूएमएल के नेताओं ने बताया है कि यह समिति शासन संचालन में दहल सरकार की मदद करेगी। यूएमएल के उप महासचिव पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने कहा- ‘ओली के नेतृत्व वाली समिति वर्तमान सरकार के पूरे कार्यकाल तक अस्तित्व में रहेगी। इसका पहला काम साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना और उस पर अमल को सुनिश्चित करवाना है।’ गुरुंग ने बताया कि समिति नई नीतियां और कार्यक्रम तैयार करने में अपनी भूमिका निभाएगी। चर्चा है कि गुरुंग को प्रतिनिधि सभा का स्पीकर बनाया जाएगा।
समझा जाता है कि दहल और ओली के बीच मौजूदा संसद के पांच साल के कार्यकाल में आधे-आधे समय तक सरकार का नेतृत्व करने पर सहमति बनी है। इस बीच राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी सरकार में शामिल ना होने के अपने रुख पर कायम है। उसने दहल सरकार को बाहर से समर्थन देने का अपना वादा दोहराया है।
राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी के निर्देश के मुताबिक नव निर्वाचित प्रतिनिधि सभा का पहला सत्र अगले नौ जनवरी से होगा। उसके दो या तीन दिन बाद प्रधानमंत्री दहल सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे। नेपाल के संविधान के मुताबिक किसी प्रधानमंत्री के लिए अपनी नियुक्ति के 30 दिन के अंदर प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत साबित करना अनिवार्य होता है।