चुनावों की टेंशन: नेपाल के माओवादी मुसीबत में, गठबंधन करने के लिए मार रहे हैं हाथ-पैर
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विस्तार
नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) का चुनावी भविष्य लगातार अनिश्चित होता जा रहा है। स्थानीय चुनाव में अब दो महीने से भी कम वक्त बचा है। माओइस्ट सेंटर इस नतीजे पर है कि बिना किसी मजबूत से गठबंधन बनाए उसकी चुनावी संभावनाएं बेहद कमजोर हैं। लेकिन गठबंधन किससे बनेगा, यह अभी तक तय नहीं हो सका है।
नेपाली कांग्रेस पर दबाव
माओइस्ट सेंटर ने अब सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस पर दबाव बनाना शुरू किया है कि वह गठबंधन के बारे में जल्द अपना रुख बताए। माओइस्ट सेंटर संसद में नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। लेकिन नेपाली कांग्रेस ने उसके साथ चुनावी गठजोड़ बनाने के बारे में अभी तक कोई वादा नहीं किया है। दरअसल, नेपाली कांग्रेस में माओइस्ट सेंटर या नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) और जनता समाजवादी पार्टी में से किसी के साथ चुनावी गठबंधन करने के खिलाफ राय मजबूत होने के संकेत हैं। यूनिफाइड सोशलिस्ट और जनता समाजवादी पार्टी भी सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा हैं।
नेपाली कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा है कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ कर ज्यादा सीटें जीत सकती है। इसकी वजह यह है कि कम्युनिस्ट तीन पार्टियों में बंटे हुए हैं। तीसरी कम्युनिस्ट पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की यूएमएल है, जो अभी प्रमुख विपक्षी दल है। 2017 में हुए स्थानीय चुनाव में माओइस्ट सेंटर पार्टी ने 116 स्थानीय शासन की सीटें जीती थीं। लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर पार्टी अकेले मैदान में उतरी, तो इनमें से ज्यादा सीटें उसके हाथ से निकल जाएंगी।
इस सूरत को देखते हुए माओइस्ट सेंटर के कुछ नेताओं ने ओली की पार्टी से चुनावी गठबंधन करने का विचार भी उछाला है। पार्टी के नेता बरशमन पुन ने कहा है कि माओइस्ट सेंटर और यूएमएल के बीच गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन पार्टी का ज्यादातर हिस्सा इसकी गुंजाइश नहीं देखता। दहल के करीबी माने जाने वाले माओवादी नेता हरिबोल गुजारेल अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘मुझे नहीं लगता कि नेपाली कांग्रेस हमसे चुनावी गठबंधन नहीं करेगी। उन्हें मालूम है कि जब हमने यूएमएल के साथ हाथ मिलाकर चुनाव लड़ा था, तब क्या हुआ था।’
यूएमएल नेताओं से अनौपचारिक बातचीत
वैसे गुजारेल ने भी यह स्वीकार किया कि यूएमएल के नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत चल रही है। यहां तक कि दहल ने भी यूएमएल नेताओं से संपर्क बना रखा है। इसी हफ्ते माओइस्ट सेंटर पार्टी के कार्यकर्ताओं का एक प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। उसे संबोधित करते हुए दहल ने कहा- ‘सभी क्रांतिकारी और जन पक्षीय पार्टियों का सफाया करने की साजिश रची जा रही है। इसका मकसद यह है कि दो पूंजीवादी पार्टियां बारी-बारी से देश पर राज कर सकें।’
दहल के इस बयान को ‘कम्युनिस्ट एकता’ के लिए दरवाजा खुले रखने की उनकी सोच का संकेत समझा गया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक दहल नेपाली कांग्रेस की सेंट्रल वर्किंग कमेटी की अगले हफ्ते होने वाली बैठक तक इंतजार करेंगे। उस बैठक में चुनावी गठबंधन के बारे में नेपाली कांग्रेस का रुख स्पष्ट होने की आशा है। दहल की प्राथमिकता अभी भी नेपाली कांग्रेस से गठबंधन करना ही है।