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नेपाल : केपी शर्मा ओली ने कहा- अदालतें नहीं नियुक्त कर सकतीं प्रधानमंत्री 

Fri, 18 Jun 2021 05:13 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 18 Jun 2021 05:13 AM IST
सार

  • केपी शर्मा ओली प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हारने के बाद अल्पमत सरकार का कर रहे नेतृत्व 
  • नेपाली पीएम ने सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधि सभा भंग करने के अपनी सरकार के फैसले का किया बचाव

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Nepal: KP Sharma Oli said, courts cannot appoint Prime Minister
केपी शर्मा ओली - फोटो : PTI

विस्तार

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधि सभा को भंग करने के अपनी सरकार के विवादास्पद फैसले का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नियुक्त करने का अधिकार न्यायपालिका के पास नहीं है क्योंकि वह देश के विधायी और कार्यकारी निकायों का दायित्व नहीं निभा सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीएम ने यह बात सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने लिखित जवाब में कही है। 

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केपी शर्मा ओली प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हारने के बाद अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने उनकी सिफारिश पर पांच महीने में दूसरी बार 22 मई को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था और देश में 12 तथा 19 नवंबर को चुनाव कराने का एलान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति कार्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा था।
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नेपाली पीएम ने सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधि सभा भंग करने के अपनी सरकार के फैसले का किया बचाव
हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट को बृहस्पतिवार को अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के जरिए ओली का जवाब मिला। इसमें उन्होंने कहा कि अदालत का काम संविधान और मौजूदा कानूनों को परिभाषित करना है क्योंकि वह विधायी या कार्यकारी निकायों की भूमिका नहीं निभा सकती है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति पूरी तरह राजनीतिक और कार्यपालिका की प्रक्रिया है।
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उन्होंने पूरे मामले में राष्ट्रपति की भूमिका का भी बचाव किया और कहा कि संविधान का अनुच्छेद 76 केवल राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 76 (5) के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सदन में विश्वास मत जीतने या हारने की प्रक्रिया की विधायिका या न्यायपालिका द्वारा समीक्षा की जाएगी। प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ 30 से ज्यादा रिट याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से कुछ याचिकाएं विपक्षी गठबंधन ने भी दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की है और 23 जून से मामले पर नियमित सुनवाई होगी।

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