नेपाल: चीन ने इस तरह किया है मेडिकल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
जानकारों का कहना है कि नेपाल में 2007 तक विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को इंटर्नशिप करने की इजाजत दी जाती थी। लेकिन उसी वर्ष नेपाल मेडिकल काउंसिल ने इस चलन पर रोक लगा दी। तब काउंसिल ने कहा था कि विदेश में पढ़ने वाले छात्र अगर वहीं से इंटर्नशिप करके नहीं लौटते हैं, तो उन्हें नेपाल में डॉक्टरी की प्रैक्टिस नहीं करने दी जाएगी...
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चीन ने नेपाल के 150 से ज्यादा एमबीबीएस छात्रों के भविष्य को अधर में डाल दिया है। चीन की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले इन छात्रों को अपने यहां आने की इजाजत देने से चीन लगातार इनकार कर रहा है। ये छात्र लगातार यहां विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन चीन ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
नहीं दे रहे एमबीबीएस की डिग्री
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कोविड-19 महामारी के कारण चीन ने विदेशी छात्रों का प्रवेश रोक रखा है। नेपाल के 153 मेडिकल छात्र इस कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं। ये छात्र कोरोना महामारी फैलने के बाद 2020 के आरंभ में चीन से नेपाल लौट आए थे। नेपाल में रहते हुए ऑनलाइन माध्यम से उन्होंने अपनी थ्योरी की क्लास पूरी कर ली हैं। लेकिन उनके प्रैक्टिकल लटके हुए हैं। इस बीच चीनी यूनिवर्सिटीज ने थ्योरी क्लास पूरे होने सर्टिफिकेट जारी कर दिए हैं। लेकिन इंटर्नशिप न होने के कारण उन्हें एमबीबीएस की डिग्री नहीं दी गई है।
नेपाली मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक जिन छात्रों ने 2015 और 2016 में चीन के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया था, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। उन छात्रों ने नेपाल सरकार से मांग की है कि वह इन्हें यहीं इंटर्नशिप करने दे। लेकिन नेपाल सरकार ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया है। प्रभावित छात्रों ने दो रोज पहले नेपाल के शिक्षा मंत्री देवेंद्र पौडेल से मुलाकात की थी। तब शिक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि ये छात्र चीन में इंटर्नशिप पूरी कर सकें, इसके लिए नेपाल सरकार अपनी कूटनीतिक कोशिश तेज करेगी।
लेकिन पीड़ित छात्रों का कहना है कि सरकार के इस आश्वासन का कोई महत्त्व नहीं है। उन्हें इस बात की बिल्कुल उम्मीद नहीं है कि चीन सरकार निकट भविष्य में उन्हें अपने देश में आने की इजाजत देगी। एक छात्र ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘हम अपनी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। वे हर बार यही कहते हैं कि हमारी इंट्री अनिश्चित है। नेपाल सरकार यह बात जानती है। फिर भी उसने ऐसा फैसला लिया है।’
नेपाल में प्रैक्टिस के लिए विदेश में इंटर्नशिप करना जरूरी
जानकारों का कहना है कि नेपाल में 2007 तक विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को इंटर्नशिप करने की इजाजत दी जाती थी। लेकिन उसी वर्ष नेपाल मेडिकल काउंसिल ने इस चलन पर रोक लगा दी। तब काउंसिल ने कहा था कि विदेश में पढ़ने वाले छात्र अगर वहीं से इंटर्नशिप करके नहीं लौटते हैं, तो उन्हें नेपाल में डॉक्टरी की प्रैक्टिस नहीं करने दी जाएगी।
नेपाल में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए काउंसिल से लाइसेंस लेना जरूरी है। कोरोना महामारी के बीच नेपाल के मेडिकल एजुकेशन कमीशन ने इस साल अक्तूबर में छात्रों से इंटर्नशिप के लिए अर्जी देने को कहा। लेकिन इंटर्नशिप की इजाजत सिर्फ उन्हीं छात्रों को दी गई, जिन्होंने चीन में एक साल का चीनी भाषा का कोर्स और वहीं रहते हुए पांच साल की पढ़ाई पूरी कर ली थी। इस नियम के कारण 153 छात्रों को इंटर्नशिप का मौका नहीं मिला, जिनका भविष्य अब अधर में लटक गया है।