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नेपाल अंतरिम सरकार पर विवाद: जेन-जी और सेना की वार्ता फंसी, दुर्गा प्रसाई और राजशाही समर्थक पार्टी बनी रुकावट

Fri, 12 Sep 2025 04:53 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू
अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 12 Sep 2025 04:53 AM IST
सार

भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों और तख्तापलट के बाद भी नेेपाल का संकट हल होता नहीं दिख रहा। अंतरिम सरकार के मुखिया का नाम अभी तक तय नहीं हो सका है।

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Nepal interim govt: Talks between Zen-G and army stuck, Durga Prasai and pro-monarchy party become hurdle
नेपाल में हिंसक प्रदर्शन का भयावह रूप - फोटो : PTI/ANI

विस्तार

नेपाल में राजशाही समर्थक राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और कारोबारी दुर्गा प्रसाई को आगे किया जाना अंतरिम सरकार के लिए जारी बातचीत में गतिरोध का प्रमुख कारण रहा। दरअसल, सेना ने प्रदर्शन के दौरान जेल से छुड़ाए गए रवि लमिछाने की पार्टी और चिकित्सा उद्यमी प्रसाई को बातचीत की प्रक्रिया में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। इस पर जेन-जी ने आपत्ति जताई। यही नहीं, अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए सुशीला कार्की के नाम को लेकर भी जेन-जी के प्रतिनिधि दो-फाड़ हो गए हैं।

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भद्रकाली स्थित मुख्यालय में अंतरिम नेतृत्व को लेकर जब नेपाल में प्रदर्शन करने वाले जेन-जी के प्रतिनिधियों और सेना के बीच बातचीत चल रही थी, तभी सेना की ओर से इसमें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और प्रसाई को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। इससे नाराज जेन-जी के 15 प्रतिनिधियों में शामिल रक्ष्य बाम सहित कई युवा भड़क गए और बातचीत से किनारा कर लिया। बाम ने कहा, सेना प्रमुख ने हमें राष्ट्रपति से मिलने के लिए बुलाया था। इस दौरान हमसे दुर्गा प्रसाई और आरएसपी के साथ बातचीत करने के लिए कहा गया। इस बीच, नेपाल के सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल की दुर्गा प्रसाई के साथ बैठक को लेकर आंदोलनकारियों में गुस्सा भड़क उठा। प्रसाई को विघटनकारी करार देते हुए उनकी भूमिका पर संदेह जताया जा रहा है।
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दरअसल, प्रसाई कई विवादों में घिरे रहे हैं और उन्हें भी राजशाही समर्थक माना जाता है। हालांकि, दुर्गा प्रसाई की तरफ से सफाई दी गई है कि उनका सरकार में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। बहरहाल, सेना मुख्यालय के बाहर बृहस्पतिवार को जेन-जी के दो गुटों में झड़प से मामला और उलझ गया। बताया जा रहा है कि एक पक्ष सुशीला कार्की के नाम का विरोध कर रहा था, जबकि काठमांडो के मेयर बालेंद्र शाह के समर्थक कुछ आंदोलनकारी उनके नाम को ही आगे रखने के पक्ष में थे। जेन-जी प्रतिनिधियों के दो-फाड़ होने से बातचीत की प्रक्रिया बाधित हो गई है।  
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राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर लगाया हिंसा का आरोप  
जेन-जी नेता अनिल बनिया ने कहा, हमने यह आंदोलन बुजुर्ग नेताओं से तंग आकर किया था। हमने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया लेकिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने आगजनी की और फिर बुनियादी ढांचे में तोड़फोड़ की। हम संविधान बदलने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि उसमें जरूरी बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। छह महीने के भीतर, हम चुनाव लड़ेंगे। अभी हमें एक अंतरिम सरकार की जरूरत है। वहीं, जेन-जी के एक अन्य नेता ओजस्वी का कहना है, हम अंतरिम सरकार का नेतृत्व सुशीला कार्की को सौंपना चाहते हैं, क्योंकि वह राष्ट्र निर्माण में हमारी मदद करेंगी। हमारा दूसरा लक्ष्य मौजूदा संसद को भंग करना व तीसरा देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।


अभी हम नौसिखिये हैं, संविधान भंग करना हमारा लक्ष्य नहीं
ओजस्वी ने कहा, जेन-जी में हमारे पास नेता नहीं हैं, यह रातोंरात शुरू हुआ...हमारा कोई नेता नहीं है, लेकिन हम सब नेता हैं। अभी, हम संसद को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं...हम अपने संविधान को भंग करने या किसी भी तरह से अपने संविधान को रद्द करने की कोशिश नहीं कर रहे। हो सकता है कि अभी संविधान में कुछ बदलाव करने की जरूरत हो। लेकिन संविधान बरकरार रहेगा क्योंकि संविधान का होना ज़रूरी है। आगे बढ़ने के साथ हमें सुनिश्चित करना होगा कि हम कोई भी गैरकानूनी या अवैध कदम न उठाएं।

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