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Nepal Inflation: नेपाल में ठंड की शुरुआत ने महंगाई से परेशान लोगों की मुसीबत बढ़ाई

Thu, 10 Nov 2022 05:11 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 10 Nov 2022 05:11 PM IST
सार

Nepal Inflation: नेपाली व्यापारियों ने कहा है कि उन्होंन अपने जीवनकाल में महंगाई में इतनी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी थी। आम तौर पर गर्म कपड़ों की कीमत में 500 से 100 नेपाली रुपयों तक की वृद्धि दर्ज हुई है...

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Nepal Inflation: cold in Nepal increased the problems of nepalese troubled by inflation
nepal cloth market - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ठंड का मौसम आते ही महंगाई के कारण नेपाल में आम जन की मुश्किलें बढ़ रही हैं। डॉलर के महंगा होने के कारण गर्म कपड़ों का आयात महंगा हो गया है। उधर चीन से सप्लाई की मात्रा कम है। इसलिए गर्म कपड़े काफी महंगे मिल रहे हैं, जिन्हें खरीदना आम लोगों के मुश्किल हो गया है।

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नेपाली व्यापारियों ने कहा है कि उन्होंन अपने जीवनकाल में महंगाई में इतनी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी थी। आम तौर पर गर्म कपड़ों की कीमत में 500 से 100 नेपाली रुपयों तक की वृद्धि दर्ज हुई है। डाउन जैकेट और लॉन्ग कोट के दाम तो और भी ज्यादा बढ़े हैं। काठमांडू के एक दुकानदार ने अखबार काठमांडू पोस्ट से बातचीत में कहा- साधारण थर्मोकोट भी पिछले साल की तुलना में औसतन छह सौ रुपये तक महंगे हो गए हैं।

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नेपाल में बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी हैं, जो गर्म कपड़ों का आयात चीन से करते हैं। ये कपड़े विमानों से लाए जाते हैं। हाल में विमान भाड़ा तेजी से बढ़ा है। इसका असर गर्म कपड़ों की कीमत पर पड़ा है। नेपाल के सेंट्रल बैंक- नेपाल राष्ट्र बैंक ने कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट में बताया था कि मौजूदा वित्त वर्ष के 15 सितंबर को खत्म हुए पहले दो महीनों में कपड़ों और जूता-चप्पलों की कीमत में 7.68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

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नेपाल में आम महंगाई दर भी काफी ऊंची चल रही है। पिछले महीने ये दर 8.64 फीसदी थी। खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई तो और भी ज्यादा- 9.2 फीसदी दर्ज की गई है। परिवहन मुद्रास्फीति की दर वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में 23.41 फीसदी रही। बाजार में आम उपयोग की चीजें लगातार महंगी चल रही हैं, जिससे आम लोग जिंदगी पहले से परेशान हैं। अब ठंड बढ़ने के साथ उनकी मुसीबत और बढ़ गई है।

नेपाल विदेश व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष सुनील कुमार धानुका के मुताबिक देश में आयात 35 से 40 फीसदी गिर गया है। इसकी मुख्य वजह डॉलर का महंगा होना है। नेपाल जैसे आयात निर्भर देश के लिए यह बहुत बड़ी समस्या है। नेपाल को रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी विदेश से मंगवानी पड़ती हैं।

नेपाल नेशनल ट्रेडर्स एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष नरेश कतुवाल के मुताबिक आयातित चीजों की कीमत में औसतन 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। परिवहन का खर्च दोगुना हो गया है। इस बीच बैंकों के ब्याज दर बढ़ाने के कारण व्यापारियों को लिए कर्ज पर अधिक ब्याज चुकानी पड़ रही है।

व्यापारी आम तौर पर कर्ज लेकर कारोबार करते हैं। कतुवाल ने बताया है कि व्यापारियों की शिकायत है कि बैंकों ने कर्ज देने की नीति भी पहले की तुलना में ज्यादा सख्त कर दी है, जबकि सहकारी बैंकों के पास नकदी की कमी हो गई है।

इन्हीं समस्याओं से परेशान हो कर बीते शुक्रवार को व्यापारियों ने यहां विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन इस समय जबकि देश में चुनाव का माहौल है और राजनेता अपनी सीटें बचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ऐसी समस्याओं पर उनका ध्यान नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि अगर चीन से सप्लाई सुचारू हो जाए, तो राहत मिल सकती है। लेकिन वहां से सामान आने में तीन महीनों तक का वक्त लग रहा है। इससे आयात खर्च भी बढ़ता है। इससे व्यापारी मायूस हैं। उन्हें अंदेशा इस बात का भी है कि अगर आम चुनाव में ठोस जनादेश नहीं आया, तो राजनीतिक अस्थिरता के बीच हालात और बिगड़ सकते हैं। 

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