Nepal Election: नेपाल के चुनाव में इस बार होगा कड़ा मुकाबला, मैदान में उतरेंगी ज्यादा पार्टियां
Nepal Election: नेपाल के चुनाव कानून के मुताबिक निर्वाचन आयोग में पंजीकृत पार्टियों को भी चुनाव से ठीक पहले उसमें शामिल होने के लिए अर्जी देनी पड़ती है। पिछले मई में नेपाल में हुए स्थानीय चुनावों में हिस्सा लेने के लिए 79 दलों ने अर्जी दी थी...
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नेपाल के आम चुनाव में इस बार पहले से ज्यादा संख्या में राजनीतिक पार्टियां हिस्सा लेंगी। संघीय संसद और सात प्रांतों की विधायिकाओं के चुनाव के लिए देश में अगले 20 नवंबर को मतदान होगा। इन चुनावों में भाग लेने के लिए 84 दलों ने निर्वाचन आयोग के पास अपनी अर्जी दी है। वैसे नेपाल के निर्वाचन आयोग में रिजस्टर्ड पार्टियों की संख्या 116 है।
नेपाल के चुनाव कानून के मुताबिक निर्वाचन आयोग में पंजीकृत पार्टियों को भी चुनाव से ठीक पहले उसमें शामिल होने के लिए अर्जी देनी पड़ती है। पिछले मई में नेपाल में हुए स्थानीय चुनावों में हिस्सा लेने के लिए 79 दलों ने अर्जी दी थी। लेकिन असल में 65 पार्टियों ने ही उन चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारे थे। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि संसदीय और प्रांतीय चुनावों में भाग लेने के लिए दलों की तरफ से आए आवेदनों की जांच करने के बाद वह उन पार्टियों की सूची जारी करेगा, जो अपने उम्मीदवार उतार सकेंगी।
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने नेपाली मीडिया को बताया कि 12 पार्टियों ने इस बार समूह बना कर चुनाव लड़ने के लिए अर्जी दी है। इस तरह कुल चार गठबंधन मैदान में उतरेंगे। किसी समूह में शामिल सभी दलों के उम्मीदवार समान चुनाव निशान पर चुनाव लड़ेंगे। नेपाल के चुनाव कानून के मुताबिक अगर पार्टियां चाहें, तो गुट बना कर समान चुनाव चिन्ह पर अपने उम्मीदवार खड़े कर सकती हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और पूर्व प्रधानमंत्री बाबू राम भट्टराई के नेतृत्व वाली जनता समाजवादी पार्टी ने समान चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने के लिए अर्जी दी है। ये दोनों पार्टियां नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा हैं। इन दोनों पार्टियों के उम्मीदवार चक्र के अंदर हसुआ-हथौड़े के निशान के साथ मैदान में उतरेंगे।
मुख्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के पूर्व नेता बामदेव गौतम ने भी माइओस्ट सेंटर पार्टी के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। गौतम ने पिछले 28 जुलाई को यूएमएल पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। विधि विशेषज्ञों के मुताबिक भट्टराई और गौतम के इस फैसले का मतलब यह होगा कि उनके गुटों के जीतने वाले उम्मीदवारों को संसद में माओइस्ट सेंटर के ह्विप का पालन करना होगा।
निर्वाचन आयोग अगले 31 अगस्त तक सभी पार्टियों को चुनाव निशान आवंटित करने का काम पूरा कर लेगा। उसके बाद 18 और 19 सितंबर को प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों के लिए पार्टियों को अपने उम्मीदवारों की सूची उसे सौंपनी होगी। संसद में ऐसी 165 सीटें हैं। निर्वाचन आयोग आठ अक्तूबर को उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर देगा।
साल 2017 के आम चुनाव में पांच पार्टियों को राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया गया था। नेपाल के कानून के मुताबिक प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों में से कम से एक सीट जीतने और कम से कम तीन फीसदी वोट पाने वाली पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया जाता है। फिलहाल संसद में छह राष्ट्रीय दलों का प्रतिनिधित्व है। उनमें यूएमएल के 98, नेपाली कांग्रेस के 61, माओइस्ट सेंटर के 49, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के 23, जनता समाजवादी पार्टी के 19 और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के 13 सदस्य हैं।