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नेपाल आपदा: अब तक 166 भारतीय बचाए गए, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 410 भारतीय चीन से लौटे
Wed, 02 Sep 2026 10:12 PM IST
राहुल कुमार
आईएएनएस, काठमांडो
आईएएनएस, काठमांडो
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 02 Sep 2026 10:12 PM IST
सार
नेपाल में बुधवार को अचानक आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1200 पार हो गई और लगभग 4,900 लोग अब भी लापता हैं। बचावकर्मी बारिश और मलबे के बीच काम कर रहे हैं। इसी बीच 150 से अधिक भारतीयों को रेस्क्यू किया जा चुकी है।
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नेपाल में जलप्रलय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत का राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें बुधवार को बचाए गए तीन लोग भी शामिल हैं। वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हो गए। भारत ने बुधवार को राहत सामग्री की पांचवीं खेप नेपाल भेजी।
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भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, जिससे चिलीमे सुरंग तक पहुंचने में कम समय लगेगा। नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान के दौरान दल ने कीचड़ और मलबे से भरी सुरंग में लगभग 100 मीटर आगे तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
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डीएनए नमूनों से शवों की पहचान
एमईए ने बताया कि भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए सुरंग तक अस्थायी सड़क बनाने की संभावना भी तलाश की जा रही है। बुधवार को भारत से पहुंचे 11 विशेषज्ञ त्रिशूली बाजार के पास पहुंच चुके हैं और गुरुवार से नेपाली सेना के साथ अभियान में शामिल होंगे। भारतीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच और पहचान का काम कर रही है।
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नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बुधवार सुबह तक बाढ़ में बहकर गए 1200 से अधिक लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि यह आपदा नेपाल के भविष्य और जलवायु संकट को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास लेंगदे खोला पर हिमस्खलन से प्राकृतिक बांध बन गया था। बाद में यह बांध टूटने से भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने त्रिशूली नदी तक के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।
भारत की राहत जारी, पांचवां विमान दवाइयों और रेस्क्यू टीम के साथ काठमांडू पहुंचा
नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत लगातार मानवीय सहायता पहुंचा रहा है। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) का पांचवां राहत विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। विमान में 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल, अत्याधुनिक रेस्क्यू उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाइयां भेजी गई हैं।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, काठमांडू पहुंचने पर भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने राहत सामग्री नेपाल सरकार को सौंपी। यह सहायता 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर ध्वस्त होने के बाद आई भीषण बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के लिए भेजी गई है।
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत का पांचवां राहत विमान नेपाल के लिए रवाना हो गया है, जिसमें 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजी गई हैं।
भारत अब तक नेपाल को 68 टन से अधिक राहत सामग्री और विशेष बचाव दल भेज चुका है। राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, भारी क्षमता वाली तिरपाल, प्लास्टिक शीट, स्वच्छता किट, आवश्यक दवाइयां, खाद्य पैकेट, सोलर लैंप, पानी शुद्ध करने की गोलियां और पोर्टेबल जनरेटर शामिल हैं।