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नेपाल: अयोध्या की तरह भक्तों ने जनकपुर में भी मनाया उत्सव, 2.5 लाख तेल के दीपक जलाकर किया राम लला का स्वागत
Tue, 23 Jan 2024 03:12 AM IST
यशोधन शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जनकपुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जनकपुर
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Tue, 23 Jan 2024 03:12 AM IST
सार
मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं और देवियों के चित्रण प्रदर्शित हैं। भूतल पर मुख्य गर्भगृह में भगवान श्री राम के बचपन के स्वरूप (श्री रामलला की मूर्ति) को रखा गया है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्वी दिशा में स्थित है, जहां सिंह द्वार के माध्यम से 32 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जा सकता है।
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जनकपुर में 2.5 लाख दीप प्रज्वलित
- फोटो : ANI
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विस्तार
अयोध्या में सोमवार को राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का जश्न मनाने के लिए देवी सीता के गृह नगर जनकपुर में भक्तों ने 2.5 लाख तेल के दीपक जलाए। वह प्राचीन शहर जहां देवी सीता के पिता राजा जनक शासन करते थे। उन्होंने कई सप्ताह पहले से ही उत्सव की तैयारी शुरू कर दी थी।
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दामाद की घर वापसी का जश्न मनाते हुए शहर दीपों और रंग-बिरंगी सजावट से जगमगा रहा है। स्थानीय समूहों ने दीया, पाला, तेल और कपास के लैंप जैसी सभी आवश्यक और संभावित वस्तुओं को इकट्ठा करने के लिए एक अभियान शुरू किया था।
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इसके अलावा फूलों और सिन्दूर पाउडर का उपयोग करके जय सियाराम लिखी रंगोली भी बनाई गई थी। ड्रोन द्वारा कैप्चर किए गए दृश्यों में, पृष्ठभूमि में जानकी मंदिर और भक्तों से घिरे 2.5 लाख तेल-आधारित दीपक की रोशनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली लग रही थी। सभी दीपकों को जलाने और विहंगम दृष्टि से दिखाई देने वाली चमक तक पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लगा। इससे पहले दिन में, अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की स्क्रीनिंग के साथ-साथ प्राचीन शहर में रैलियां और जश्न कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। समारोह में जनकपुर के मुख्य महंथ छोटे महंथ के साथ शामिल हुए थे।
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गौरतलब है, कि अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में श्री राम लला की मूर्ति का अनावरण किया गया, जिन्होंने बाद में भव्य मंदिर के गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अनुष्ठान का नेतृत्व किया। भव्य राम मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया गया है। इसकी लंबाई (पूर्व-पश्चिम) 380 फीट है; चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है और यह कुल 392 स्तंभों और 44 दरवाजों द्वारा समर्थित है।
स्तंभों और दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्रण प्रदर्शित
मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं और देवियों के चित्रण प्रदर्शित हैं। भूतल पर मुख्य गर्भगृह में भगवान श्री राम के बचपन के स्वरूप (श्री रामलला की मूर्ति) को रखा गया है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्वी दिशा में स्थित है, जहां सिंह द्वार के माध्यम से 32 सीढ़ियाँ चढ़कर पहुंचा जा सकता है।
मंदिर में कुल पांच मंडप (हॉल) हैं - नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप। मंदिर के पास एक ऐतिहासिक कुआं (सीता कूप) है, जो प्राचीन काल का है। मंदिर परिसर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में, कुबेर टीला में, भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है, साथ ही जटायु की एक मूर्ति भी स्थापित की गई है।
अयोध्या में मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति रखी गई है। राम लला की मूर्ति मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई है। मूर्ति 51 इंच लंबी है और इसका वजन 1.5 टन है। मूर्ति में भगवान राम को पांच साल के बच्चे के रूप में चित्रित किया गया है जो उसी पत्थर से बने कमल पर खड़ा है।