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Nepal: नेपाल में नागरिकता संशोधन कानून दोबारा पारित, अब बन सकता है चुनावी मुद्दा

Sat, 20 Aug 2022 01:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 20 Aug 2022 01:34 PM IST
सार

Nepal: नेपाली कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि उन्होंने नेपाली पुरुषों से विवाह करने वाली विदेशी महिलाओं की संतानों के हित में यह कदम उठाया है। अब तक चार लाख 40 हजार विदेशी महिलाओं ने नेपाली पुरुषों से शादी करने के बाद नेपाल की नागरिकता ग्रहण की है...

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Nepal: Citizenship Amendment Act passed again, now it can become an election issue
Nepal: शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में नागरिकता संशोधन कानून अब चुनावी मुद्दा बन सकता है। शेर बहादुर देउबा सरकार ने इस बिल पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की तरफ से उठाई गई आपत्तियों को सिरे से ठुकरा दिया है। उसने संशोधन बिल को उसके मूल रूप में प्रतिनिधि सभा से दोबारा पारित कराने में गजब की फुर्ती दिखाई। गुरुवार को प्रतिनिधि सभा ने बिल को दोबारा मंजूरी दी। अगर संसद के ऊपरी सदन ने भी उसे मूल रूप में पारित कर दिया, तो राष्ट्रपति के पास इस पर दस्तखत करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाएगा। इसके पहले राष्ट्रपति भंडारी ने पारित बिल को पुनर्विचार के लिए संसद को लौटा दिया था। नेपाल के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति सिर्फ एक बार बिल को पुनर्विचार के लिए लौटा सकती हैं।

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प्रतिनिधि सभा में एक बार फिर बहुमत से पारित हुआ। यानी बिल पर दलगत आधार पर मतभेद बना रहा। पहली बार भी मुख्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने इस बिल का विरोध किया था। दूसरी बार प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान के दौरान 195 सदस्य उपस्थित थे। उनमें से 135 ने बिल को दोबारा राष्ट्रपति के पास भेजने के पक्ष में मतदान किया। 60 सदस्यों ने विरोध में वोट डाले। यूएमएल के सदस्यों ने फिर इस बात की वकालत की कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय आम सहमति बनने के बाद ही बिल को दोबारा पारित किया जाना चाहिए।

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पर्यवेक्षकों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन ने अगले आम चुनाव की गणित को देखते हुए राष्ट्रपति के सुझावों को सिरे से ठुकरा दिया है। जबकि संविधान विशेषज्ञों की राय है कि जब एक बार राष्ट्रपति ने अपनी सात आपत्तियों के साथ विधेयक लौटा दिया था, तब उचित रास्ता यह होता कि उन बिंदुओं पर विचार के लिए एक संसदीय समिति बनाई जाती। वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रकांत गयावली ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘बेहतर होता कि प्रतिनिधि सभा एक समिति बनाती, जिसके अंदर सभी बिंदुओं पर बारीकी से सोच-विचार होता। लेकिन प्रतिनिधि सभा ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया और दोबारा विधेयक को पास कर दिया।’

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राजनीतिक टीकाकारों के मुताबिक इस कदम से मधेस इलाके में सत्ता पक्ष को लाभ होगा, लेकिन देश के बाकी हिस्सों में सत्ता पक्ष की तरफ से दिखाई गई जल्दबाजी को यूएमएल मुद्दा बना सकती है। यूएमएल के सदस्यों ने सदन में हुई चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन ने संसद को एक रबर स्टांप बना दिया है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद विशाल भट्टराई ने कहा- हमें उम्मीद थी कि सांसदों को बिल में संशोधन पेश करने का मौका दिया जाएगा। लेकिन सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पांच दलों के कुछ नेताओं ने अपनी मनमानी चलाई है।

नेपाली कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि उन्होंने नेपाली पुरुषों से विवाह करने वाली विदेशी महिलाओं की संतानों के हित में यह कदम उठाया है। पार्टी नेता गगन थापा ने कहा कि अब तक चार लाख 40 हजार विदेशी महिलाओं ने नेपाली पुरुषों से शादी करने के बाद नेपाल की नागरिकता ग्रहण की है। लेकिन प्रावधान न होने के कारण उनकी संतानों को देश की नागरिकता नहीं मिल सकी है। नागरिकता कानून संशोधन से उन लाखों संतानों को नागरिकता देने का रास्ता खुलेगा।

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