एवरेस्ट फतह: अमेरिका के सबसे उम्रदराज और हांगकांग की सबसे तेज पर्वतारोही लौटे सुरक्षित
- शिकागो के आर्थर मुइरने इस महीने की शुरुआत में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी और उन्होंने एक अन्य अमेरिकी बिल बुर्के (67) का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
- हांगकांग की 45 वर्षीय त्सांग यिन-हुंग 25 घंटे और 50 मिनट में आधार शिविर से माउंट एवरेस्ट पहुंची और वह इस पर्वत शृंखला की सबसे तेजी से चढ़ाई करने वाली महिला पर्वतारोही बन गई।
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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाले अमेरिका के सबसे उम्रदराज शख्स और एवरेस्ट की सबसे तेज चढ़ाई करने वाली हांगकांग की एक महिला रविवार को सुरक्षित वापस लौट आए। आर्थर मुइर (75) शिकागो के एक सेवानिवृत्त वकील हैं और 45 वर्षीय त्सांग यिन हुंग हांगकांग में पेशे से एक शिक्षिका हैं।
दोनों माउंट एवरेस्ट से ऐसे वक्त लौटे हैं, जब पर्वतारोहियों का दल खराब मौसम और कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से जूझ रहे हैं। आर्थर ने इस महीने की शुरुआत में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी और उन्होंने एक अन्य अमेरिकी बिल बुर्के (67) का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
त्सांग यिन हुंग ने की सबसे तेज चढ़ाई
हांगकांग की 45 वर्षीय त्सांग यिन-हुंग 25 घंटे और 50 मिनट में आधार शिविर से माउंट एवरेस्ट पहुंची थीं और वह इस पर्वत शृंखला की सबसे तेजी से चढ़ाई करने वाली महिला पर्वतारोही बन गई। 10 घंटे और 56 मिनट में चढ़ाई करने का रिकॉर्ड शेरपा गाइड लक्पा गेलू के नाम पर है।
मुइर को 2019 में पर्वतारोहण के दौरान एक दुर्घटना में टखने में चोट लग गई थी, लेकिन यह भी उनके माउंट एवरेस्ट फतह करने के जज्बे को कम न कर सका। सेवानिवृत्त वकील ने कहा कि इस बार पर्वतारोहण के दौरान वह डरे हुए और चिंतित थे।
68 की उम्र में शुरू किया पर्वतारोहण
मुइर ने पत्रकारों से कहा, आप समझ सकते हैं कि कोई पर्वत कितना विशाल होता है, कितना खतरनाक होता, कितनी चीजें गलत हो सकती है। इससे आप बेचैन होते हैं और शायद थोड़ा डर भी जाते हैं।
मुइर ने दक्षिण अमेरिका और अलास्का की यात्राएं करने के साथ 68 वर्ष की उम्र में पर्वतारोहण शुरू किया। विवाहित और तीन बच्चों के पिता मुइर के छह नाती-पोते हैं। उनके परिवार में एक बच्चे ने तब जन्म लिया जब वह पर्वत पर चढ़ रहे थे।
वहीं, त्सांग ने आधार शिविर के बीच केवल दो ठहराव लिए और 25 घंटे 50 मिनट में सफर पूरा कर लिया। उनकी किस्मत अच्छी रही कि उन्हें चढ़ते वक्त कोई पर्वतरोही नहीं मिला और उन्हें ऐसे ही पर्वतारोही मिले जो वापस उतर रहे थे जिससे उनकी गति कम नहीं हुई। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के अनुकूल मौसम में कुछ दिन शेष रह गए हैं।
चीन के दृष्टिबाधित पर्वतारोही झांग होंग ने की एवरेस्ट फतह
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई आमतौर पर मजबूत कद काठी वालों के लिए भी बहुत मुश्किल अभियान है, लेकिन चीन के 46 वर्षीय एक दृष्टिबाधित शख्स झांग होंग ने अपने जज्बे के बल पर माउंट एवरेस्ट फतह कर नया कीर्तिमान रच दिया है।
यह उपलब्धि हासिल करने वाले एशिया के पहले और दुनिया के तीसरे व्यक्ति
वह ऐसा करने वाला एशिया का पहला और दुनिया का तीसरा दिव्यांग व्यक्ति है। उसने 24 मई को 8,849 मीटर ऊंची चोटी को फतह किया। झांग ने अपने इस रिकॉर्ड से यह बात साबित कर दी है कि अगर कोई व्यक्ति दिल से कुछ कर गुजरने की ठान ले तो वह असंभव लगने वाले लक्ष्य को भी हासिल कर सकता है।
झांग ने कहा, कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप दिव्यांग हैं या सामान्य हैं। चाहे आपकी आंखों की रोशनी चली गई हो या आपके पैर या हाथ नहीं हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आपको बस एक मजबूत दिमाग की जरूरत है। आप भी अन्य लोगों की तरह हर काम कर सकते हैं।
चीन के दक्षिण पश्चिम में स्थित चॉन्किंग में जन्मे झांग की 21 साल की उम्र में ग्लूकोमा की वजह से आंखों की रोशनी चली गई थी। अमेरिका के दिव्यांग पर्वतारोही एरिक वेहनमेयर को वो अपना आदर्श मानते हैं, जिन्होंने 2001 में एवरेस्ट को फतह किया था।