फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Neither land government allow doctor to kill diseased children if they are not able to survivie

नीदरलैंड : डॉक्टरों को लाइलाज बीमारी से ग्रसित बच्चों की जीवन लीला समाप्त करने की अनुमति मिली

Sun, 18 Oct 2020 03:01 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ऐम्स्टर्डेम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ऐम्स्टर्डेम Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 18 Oct 2020 03:01 PM IST
विज्ञापन
Neither land government allow doctor to kill diseased children if they are not able to survivie
प्रतीकात्मक तस्वीर

नीदरलैंड की डच सरकार ने डॉक्टरों को लाइलाज बीमारी से ग्रसित बच्चों को तकलीफ से निजात देने के लिए उनकी जीवन लीला समाप्त करने की अनुमति दे दी है। डच सरकार से इस फैसले से चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह बच्चों को मृत्यु दिए जाने पर बहस छिड़ गई है। 

विज्ञापन


नीदरलैंड सरकार पहले से इस बात के पक्ष में रही है कि अगर किसी व्यक्ति को लाइलाज बीमारी है, जिसके ठीक होने की दूर-दूर तक संभावना नहीं है, तो चिकित्सा सहायता से उनको मृत्यु दी जा सकती है ताकि लाइलाज बीमारी से ग्रसित मरीजों और उनके परिवार को तकलीफों से निजात मिल सके। चिकित्सा सहायता से ऐसे लोगों की मौत दे दी जाती है, जिनकी उम्र 12 साल या उससे कम होती है। इस तरह की मौत माता-पिता की मंजूरी से दी जाती है।
विज्ञापन


डच स्वास्थ्य मंत्री ह्यूगो डी जॉन्ग ने मंगलवार को संसद एक पत्र लिखा। इसमें लाइलाज बीमारी से ग्रसित एक से 12 साल के बच्चों को चिकित्सा सहायता से मृत्यु देने के लिए कानून में संसोधन का प्रस्ताव रखा है। मंत्री ने कहा कि लाइलाज बीमारी से ग्रसित बच्चों और उनके परिवारों को उनके चलते मानसिक और आर्थिक रूप से परेशानी उठानी पड़ती है, ऐसे में चिकित्सा मृत्यु देने के प्रस्ताव में एक से 12 साल के बच्चों को भी शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, चिकित्सा मृत्यु देने के लिए उनके माता-पिता की सहमति अनिवार्य रहेगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ये हैं कुछ लाइलाज बीमारियां : 
न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस, ट्री बार्क स्किन डिसऑर्डर (इसमें शरीर की चमड़ी पेड़ की हटनी की तरह बढ़ने लगती है), पोरफाइरिया, वेयरवोल्फ सिंड्रोम, प्रोटियस सिंड्रोम, पॉलिडैकटाइलिजम, कशिंग सिंड्रोम, फाइब्रोडिसप्लासिया ऑसिफिकैंस प्रोग्रेसिवा, प्रोजेरिया और लायन फेस सिंड्रोम जैसी कई अन्य बीमारियां हैं, जिनके इलाज या तो हैं नहीं या फिर बहुत अधिक महंगे हैं। इन बीमारियों से ग्रसित मरीज जहां खुद में दर्द और हीन भावना का सामना करते हैं। वहीं उनका परिवार मानसिक दबाव में जीता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed