फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   NATO: China relieved after NATO postpones intention to open its office in Japan

NATO: नाटो के जापान में अपना दफ्तर खोलने का इरादा टाल देने से चीन को मिली राहत

Fri, 14 Jul 2023 05:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 Jul 2023 05:33 PM IST
सार

पश्चिमी मीडिया के मुताबिक दस्तावेज में टोक्यो में नाटो का संपर्क कार्यालय खोलने की बात शामिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि टोक्यो में कार्यालय खोलने के मुद्दे पर जापान सरकार के साथ बातचीत जारी रखी जाएगी...

विज्ञापन
NATO: China relieved after NATO postpones intention to open its office in Japan
नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के जापान में अपना दफ्तर खोलने का फैसला टाल देने से चीन में राहत महसूस की गई है। लिथुआनिया की राजधानी विलनुस में मंगलवार को शुरू हुए नाटो शिखर सम्मेलन में पारित साझा घोषणापत्र में टोक्यो में दफ्तर खोलने का जिक्र नहीं है। शिखर सम्मेलन के पहले दिन ही विलनुस घोषणापत्र पर सहमति बन गई और इसका दस्तावेज मीडिया के हाथ लग गया।  

विज्ञापन

पश्चिमी मीडिया के मुताबिक दस्तावेज में टोक्यो में नाटो का संपर्क कार्यालय खोलने की बात शामिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि टोक्यो में कार्यालय खोलने के मुद्दे पर जापान सरकार के साथ बातचीत जारी रखी जाएगी। लेकिन आखिरी मौके पर इस वाक्य को हटा दिया गया। जबकि इस बार के नाटो शिखर सम्मेलन में यह एक प्रमुख मुद्दा था। जापान में दफ्तर खुलने से नाटो का एशिया तक औपचारिक विस्तार हो जाता। चीन ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया था।

विज्ञापन

पिछली बार की तरह इस बार भी नाटो शिखर सम्मेलन में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के चार प्रमुख देशों- जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को आमंत्रित किया गया। इसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नाटो के विस्तार की मंशा के रूप में देखा गया है। इसी सिलसिले में टोक्यो में दफ्तर खोलने का प्रस्ताव भी रखा गया था। लेकिन समझा जाता है कि इस मुद्दे पर नाटो देशों के बीच मतभेद खड़ा हो गया। फ्रांस ने यूरोप के बाहर नाटो के विस्तार का सख्त विरोध किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

शिखर सम्मेलन से ठीक पहले फ्रांस ने अपना विरोध सार्वजनिक कर दिया था। फ्रांस की दलील है कि ऐसे कदम से चीन को गलत संदेश जाएगा। इससे अमेरिका और चीन के बीच पहले ही काफी बढ़ चुके तनाव को और हवा मिलेगी। बैंकॉक स्थित चुलालोंगकर्ण यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थितिनन पोंगसुधिरक ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘एशिया-प्रशांत में नाटो अपनी संस्थाएं बनाता है, तो पूरा दक्षिण-पूर्व एशिया उसे आसियान की केंद्रीयता के सिद्धांत के लिए चुनौती मानेगा।’ थितिनन के मुताबिक पहले से ही अनेक लोग ऐसी शिकायत जता रहे हैं कि क्वैड और ऑकुस जैसे समूह केंद्रीय स्थल पर आ गए हैं, जबकि 10 देशों का संघ आसियान अपना महत्त्व खोता जा रहा है।

लेकिन नाटो के प्रमुख जेंस स्टॉटेनबर्ग ने जोर दिया कि एशिया-प्रशांत में जो होता है, उसका यूरोप के लिए भी महत्त्व है। इसी तरह यूरोप में जो होता है, वह एशिया-प्रशांत के लिए भी अहम है। उधर विलनुस में आयोजित नाटो पब्लिक फोरम को संबोधित करते हुए चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेत्र पावेल ने भी एशिया-प्रशांत के सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया।

पावेल ने कहा कि पिछले शीत युद्ध के अलग इस बार दुनिया दो तरह की शासन प्रणालियों के बीच टकराव देख रही है। एक तरफ लोकतांत्रिक देश हैं, जबकि दूसरी तरफ चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और रूस जैसे तानाशाही व्यवस्था वाले देश हैं। उन्होंने कहा- ‘ये देश अलग तरह के मूल्यों पर चलते हैं। उनकी दलील है कि पश्चिमी देशों ने अपने स्वार्थ के मुताबिक वर्तमान व्यवस्था बना रखी है, जिसे बदल कर अब बहु-ध्रुवीय दुनिया बनाने का समय आ गया है।’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed