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नासा का ‘मार्स 2020’ लॉन्च, अब तक का सबसे बड़ा रोवर लाल ग्रह के लिए रवाना
Fri, 31 Jul 2020 03:40 AM IST
योगेश साहू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, केप केनवरल।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, केप केनवरल।
Published by: योगेश साहू
Updated Fri, 31 Jul 2020 03:40 AM IST
सार
- सात महीने बाद अगले साल फरवरी में लाल ग्रह की सतह पर उतरेगा नासा का रोवर
- लाल ग्रह से पत्थर और मिट्टी धरती पर लाएगा, पुराने जीवन की तलाश करेंगे वैज्ञानिक
- 2031 में भूवैज्ञानिक नमूनों को लेकर लौटेगा रोवर
- 8 अरब डॉलर का खर्च आया नासा के इस मंगल मिशन में
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नासा का ‘मार्स 2020’ लॉन्च
- फोटो : https://www.nasa.gov/
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विस्तार
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बृहस्पतिवार को मंगल मिशन ‘मार्स 2020’ लॉन्च किया। शक्तिशाली एटलस वी रॉकेट सुबह 7:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) केप कनेरवल अंतरिक्ष स्टेशन से अब तक के सबसे बड़े कार के आकार वाले रोवर को लेकर लाल ग्रह के लिए रवाना हुआ।
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इस रोवर में 25 कैमरे, माइक, ड्रिल और लेजर लाइटें लगी हैं। यह करीब 30 करोड़ मील की दूरी तय कर सात महीने बाद अगले साल फरवरी में मंगल पर पहुंचेगा और वहां से पत्थर और मिट्टी लेकर धरती पर आएगा, जिससे वैज्ञानिक मंगल पर प्राचीन जीवन के साक्ष्य तलाशेंगे।
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नासा का यह मिशन इस साल दुनिया का तीसरा मंगल मिशन है। चीन और यूएई ने इस हफ्ते की शुरुआत में अपने महत्वाकांक्षी मंगल मिशन को रवाना किया है। तीनों के अगले साल फरवरी में पहुंचने की उम्मीद है। नासा का रोवर लाल ग्रह की सतह में छेद कर अंदर से सूक्ष्म भूवैज्ञानिक नमूनों को इकट्ठा करेगा और 2031 तक इन्हें लेकर वापस लौटेगा।
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पहली बार छोटा हेलिकॉप्टर मंगल पर उतरेगा
नासा ने रोवर के साथ इनजिन्युटी नाम का एक छोटा हेलिकॉप्टर भी मंगल पर भेजा। रोवर इसे मंगल की सतह पर छोड़ेगा। यह हेलिकॉप्टर मंगल की सतह पर अकेले उड़ान भरने का प्रयास करेगा। मंगल के बेहद विरल वातावरण के बीच उड़ान भरने के दौरान यह हेलिकॉप्टर सतह से 10 फीट ऊंचा उठेगा और एक बार में 6 फीट आगे तक जाएगा। हर प्रयास के साथ यह और आगे बढ़ने की कोशिश करेगा।
आने वाले समय में इंसानों को भेजने की चुनौतियों का हल मिलना संभव
नासा के इस मिशन से आने वाले समय में मंगल पर इंसानों को भेजने की चुनौतियों को आसान करने में मदद मिलेगी। इसमें सबसे अहम होगा मंगल के वायुमंडल में ऑक्सीजन बनाने का तरीका खोजना। इनके अलावा सतह पर पानी खोजना, लैंड करने के बेहतर तरीके तलाशना और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के वहां रहने लायक मौसम, धूल और पर्यावरण की स्थिति खोजना इस मिशन के मुख्य बिंदु हैं।