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NASA: चांद पर स्थायी बेस बनाने की तैयारी, मंगल तक जाएगा परमाणु ऊर्जा से चलने वाला यान; समझें नासा की नई रणनीति

Tue, 24 Mar 2026 09:06 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Tue, 24 Mar 2026 09:06 PM IST
सार

नासा ने चांद पर स्थायी बेस बनाने और मंगल तक न्यूक्लियर ऊर्जा से चलने वाला यान भेजने की बड़ी योजना तैयार की है। आर्टेमिस मिशन के तहत चांद पर लगातार इंसानों की मौजूदगी का लक्ष्य रखा गया है। 2028 तक मंगल मिशन की तैयारी है। इस योजना पर 20 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह कदम अंतरिक्ष में नई तकनीक और मानव विस्तार की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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NASA Prepares Establish Permanent Base on Moon Nuclear-Powered Spacecraft Travel to Mars New Strategy
नासा की नई रणनीति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अंतरिक्ष की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। नासा ने अपनी नई रोडमैप में चांद पर बेस बनाने और मंगल ग्रह तक न्यूक्लियर ऊर्जा से चलने वाला यान भेजने की योजना को शामिल किया है। यह कदम अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। नासा का कहना है कि अब सिर्फ मिशन नहीं, बल्कि स्थायी मौजूदगी की दिशा में काम होगा।
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नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने बताया कि यह योजना एक “ट्रांसफॉर्मेटिव जर्नी” की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि एजेंसी अब तेज गति से काम करेगी और चांद मिशनों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चांद पर इंसानों की वापसी की तैयारी चल रही है और 2028 के बाद मिशनों की संख्या साल में दो बार तक पहुंच सकती है।
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क्या है चांद पर बेस बनाने की योजना?
नासा चांद पर बेस बनाने की योजना को तीन चरणों में पूरा करेगा। पहले चरण में छोटे रोबोटिक मिशन, वाहनों की तैनाती और जरूरी सिस्टम विकसित किए जाएंगे। दूसरे चरण में ऐसी संरचना बनाई जाएगी जहां अंतरिक्ष यात्री कुछ समय तक रह सकें। तीसरे चरण में स्थायी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे चांद पर लगातार इंसानों की मौजूदगी संभव हो सके।
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मंगल मिशन में क्या नया करने जा रहा है नासा?
नासा ने मंगल तक पहुंचने के लिए न्यूक्लियर ऊर्जा से चलने वाले यान की योजना भी बनाई है। “स्पेस रिएक्टर-1 फ्रीडम” नाम का यह यान 2028 तक लॉन्च किया जा सकता है। यह पारंपरिक रॉकेट से तेज होगा और मंगल पर रोबोटिक हेलीकॉप्टर जैसे उपकरण पहुंचाएगा, जिससे वहां रिसर्च को नई दिशा मिलेगी।

क्या बदलेगा मिशनों का तरीका और तकनीक?
नासा अब पारंपरिक बड़े रॉकेट सिस्टम की जगह निजी कंपनियों को शामिल करने की योजना बना रहा है। एजेंसी कम से कम दो कंपनियों को यह जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। साथ ही, पहले से तय गेटवे स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया है। इससे साफ है कि नासा अब ज्यादा व्यावहारिक और तेज तकनीक पर ध्यान दे रहा है।


कितना खर्च और कितना समय लगेगा?
नासा ने कहा है कि चांद पर बेस बनाने में अगले सात साल में करीब 20 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह काम कई मिशनों के जरिए धीरे-धीरे पूरा किया जाएगा। नासा का मानना है कि यह निवेश भविष्य में अंतरिक्ष में मानव बस्ती बसाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

क्यों अहम है यह पूरी योजना?
यह योजना सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ी है। चांद और मंगल पर पकड़ बनाने की होड़ में अमेरिका अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। इसके साथ ही यह परियोजना भविष्य में संसाधनों की खोज, अंतरिक्ष पर्यटन और नई तकनीकों के विकास के लिए भी अहम साबित हो सकती है।


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