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अर्धशताब्दी बाद इंसान चांद की ओर: नासा का रॉकेट उड़ान के लिए तैयार, सुदूर हिस्से तक पहुंचने का सपना होगा साकार

Mon, 30 Mar 2026 04:20 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 30 Mar 2026 04:20 AM IST
सार

अंतरिक्ष की असीम गहराइयों को चीरते हुए मानव एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। करीब 50 साल बाद चांद के सुदूर हिस्से तक पहुंचने का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। नासा का आर्टेमिस-II मिशन 5 लाख मील की ऐतिहासिक उड़ान के लिए तैयार है। यह मिशन सिर्फ चांद की परिक्रमा नहीं, बल्कि भविष्य में वहां मानव लैंडिंग और स्थायी बेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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NASA Moon Rocket Ready for Historic Fly Dream of Reaching the Far Side of the Moon Set to Become Reality
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब आधी सदी बाद मानवता एक बार फिर चांद की ओर लौटने के कगार पर है और अब यह ऐतिहासिक मिशन अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। नासा का आर्टेमिस-II मिशन जिसके तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को 5 लाख मील से अधिक की यात्रा पर भेजा जाएगा अब लॉन्च के बिल्कुल करीब है, क्योंकि स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और ओरायन अंतरिक्ष यान को दोबारा लॉन्च पैड 39बी पर स्थापित कर दिया गया है। शुरुआती अप्रैल में प्रक्षेपण की संभावना जताई जा रही है।

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नासा के अनुसार यह 10 दिन की यात्रा सिर्फ चांद की परिक्रमा नहीं, बल्कि भविष्य में वहां मानव लैंडिंग और स्थायी बेस बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। हालांकि, यह मिशन जितना महत्वाकांक्षी है, उतना ही जोखिमभरा भी क्योंकि अंतरिक्ष यात्री पहली बार ऐसे यान में उड़ान भरेंगे, जिसका मानव मिशन में पहले उपयोग नहीं हुआ। मार्च में तकनीकी खराबी के कारण टला यह मिशन अब अंतिम परीक्षणों के साथ लगभग तैयार है। नासा के इंजीनियरों ने हीलियम सिस्टम में आई समस्या को ठीक कर लिया है और लॉन्च से पहले उसकी गहन जांच पूरी हो चुकी है।
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चार अंतरिक्ष यात्री- अनुभव और पहली उड़ान का मिश्रण
इस मिशन में रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसन शामिल हैं। तीन अमेरिकी और एक कनाडाई इस दल ने दो साल से अधिक समय तक प्रशिक्षण लिया है। जहां तीन अंतरिक्ष यात्री पहले अंतरिक्ष में जा चुके हैं, वहीं हैनसन पहली बार उड़ान भरेंगे। चारों के बीच गहरा तालमेल इस मिशन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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30–50 मिनट का ब्लैकआउट, सबसे तनावपूर्ण पल
चांद के पीछे जाने पर अंतरिक्ष यान का पृथ्वी से संपर्क 30 से 50 मिनट के लिए टूट जाएगा। यह मिशन का सबसे संवेदनशील क्षण होगा, जब पूरी दुनिया की नजरें इस ऐतिहासिक उड़ान पर टिकी होंगी। पृथ्वी पर वापसी के दौरान कैप्सूल 25,000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से वायुमंडल में प्रवेश करेगा और लगभग 2,700 डिग्री सेल्सियस तापमान झेलेगा।


ओरायन कैप्सूल मिनीबस जितनी जगह में 10 दिन
पूरी यात्रा के दौरान ये चारों अंतरिक्ष यात्री ओरायन क्रू कैप्सूल में रहेंगे, जिसका आकार लगभग 5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊंचा है। इसी सीमित जगह में उन्हें काम, भोजन, नींद और व्यायाम करना होगा। इसमें आधुनिक जीवन-समर्थन सिस्टम, पानी और भोजन की व्यवस्था, व्यायाम उपकरण और विशेष रूप से डिजाइन किया गया टॉयलेट भी शामिल है। मिशन का पहला चरण पृथ्वी की ऊंची कक्षा में बीतेगा, जहां सिस्टम चेक और भारहीनता के अनुकूलन होंगे।

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