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US: चीनी सरकार के खिलाफ बैनर लहराने से तिब्बत जाकर ललकारने तक, चीन को हर मंच से चुनौती दे चुकीं नैंसी पेलोसी

Thu, 04 Aug 2022 11:23 PM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Thu, 04 Aug 2022 11:23 PM IST
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सार
चीन में 1989 में लोकतंत्र की मांग करने वाले विद्रोह को निर्ममता को कुचल दिया गया था। इस घटना के महज दो साल बाद नैंसी पेलोसी और दो अन्य अमेरिकी सांसदों ने तियानमेन चौक पर बैनर लहराया था।
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Nancy Pelosi's long history of confronting China's government
नैंसी पेलोसी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद चीन और ताइवान के बीच तनाव के हालात हैं। पेलोसी के दौरे से चीन बौखलाया हुआ है। दरअसल, पेलोसी इस बार चीन की चेतावनी को नजरअंदाज करके ताइवन तो पहुंची हीं। ताइवान की राष्ट्रपति और यहां की निर्वाचित सरकार के लोगों से और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से भी पेलोसी ने मुलाकात की। पेलोसी की इस यात्रा ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार से उनके पुराने टकराव की भी याद दिला दी।  


1. जब चीन में घुसकर कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ लहराया बैनर
ऐसा पहली बार नहीं है कि चीन पेलोसी पर भड़का है। एक बार तो चीन के घर में घुसकर पेलोसी ने ऐसा कुछ किया था जिससे चीन तिलमिला उठा था। बात 1991 की है। अमेरिकी प्रतिनिधि नैंसी पेलोसी चीन के दौरे पर थीं। इस दौरान पेलोसी और उनके दो साथी तियानमेन चौक पहुंचे। ये वही जगह है, जहां 1989 में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने बेरहमी से मार दिया था। इस घटना को दो साल बीत चुके थे। पेलोसी न सिर्फ अपने दौरे पर तियानमेन चौक पहुंचीं, बल्कि विरोध प्रदर्शन में मारे गए लोगों के सम्मान में एक बैनर तक फहरा दिया। पेलोसी के इस कदम से चीन आगबबूला हो गया।  


चीन में 1989 में लोकतंत्र की मांग करने वाले विद्रोह को निर्ममता को कुचल दिया गया था। इस घटना के महज दो साल बाद नैंसी पेलोसी और दो अन्य अमेरिकी सांसदों ने तियानमेन चौक पर बैनर लहराया था। इस बैनर में लिखा था, ‘चीन में लोकतंत्र के समर्थन में अपनी जान गंवाने वालों के लिए।’ उस वक्त चीन की पुलिस ने इन अमेरिकी सांसदों को तियानमेन चौक से जबरन हटाया था।  
 

नैंसी पेलोसी।
नैंसी पेलोसी। - फोटो : ANI
2. मानवाधिकार मामलों पर करती रही हैं चीन का विरोध
डेमोक्रेट पेलोसी दशकों से चीन की कम्युनिस्ट सरकार के आलोचकों में रही हैं। खासतौर पर मानवाधिकार के मामलों में। अमेरिका के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद स्पीकर पेलोसी सबसे सीनियर नेता हैं। 1997 ,के बाद ताइवान का दौरा करने वालीं पेलोसी अमेरिका की दूसरी स्पीकर हैं।   
3. 2002 में चीनी उपराष्ट्रपति को पत्र देने की कोशिश कर चुकी हैं पेलोसी
2002 में हू जिंताओ चीन के उपराष्ट्रपति थे। उस वक्त एक बैठक के दौरान पेलोसी ने उन्हें एक दो नहीं बल्कि चार पत्र देने की कोशिश की थी। इनमें उन एक्टिविस्टों को रिहा करने की मांग थी जो चीन और तिब्बत में नजरबंद थे या सजा काट रहे थे। हालांकि, जिंताओ ने इन पत्रों को लेने से मना कर दिया था। 
सात साल बाद पेलोसी ने जिंताओं को एक और पत्र दिया। उस वक्त जिंताओ चीन के राष्ट्रपति बन चुके थे। इस पत्र में पेलोसी ने चीन के राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग की थी। जिन राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग की गई थी, उनमें प्रमुख विद्रोही नेता लियू शियाओबो भी शामिल थे। 
शियाओबो वही नेता थे जिन्हें 2010 में नोबल सम्मान देने की घोषणा हुई थी। हालांकि, चीनी जेल में बंद शियाओबो को यह सम्मान लेने नॉर्वे जाने की इजाजत नहीं मिली। 2017 में उनका चीनी कैद में ही कैंसर के चलते निधन हो गया।  
 

नैंसी पेलोसी।
नैंसी पेलोसी। - फोटो : ANI
4. चीन की ओलंपिक मेजबानी का भी विरोध कर चुकी हैं पेलोसी
2008 में चीन ने बीजिंग ओलंपिक की मेजबानी की थी। उस वक्त पेलोसी ने चीन में होने वाले कथित मावाधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए ओलंपिक मेजबानी देने का विरोध किया था। 
पेलोसी उन सांसदों में शामिल थीं जिन्होंने उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से चीन में हो रहे ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की अपील की थी। हालांकि ऐसा हुआ नहीं था। इस साल भी पेलोसी ने उइगर मुसलमानों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ चीन में हुए विंटर ओलंपिक के राजनयिक बहिष्कार की अपील की थी। पेलोसी ने यहां तक कहा था कि चीन में नरसंहार चल रहा है।   
 

नैंसी पेलोसी पहुंची ताइवान
नैंसी पेलोसी पहुंची ताइवान - फोटो : ANI
5. तिब्बत भी जा चुकी हैं पेलोसी
2015 में नैंसी पेलोसी डेमोक्रेट सांसदों के एक समूह के साथ तिब्बत के दौरे पर भी गईं थीं। पेलोसी तिब्बत में भी मानवाधिकार के मुद्दे को लगातार उठाती रही हैं। इतना ही नहीं उन्होंने दलाई लामा से भी मुलाकात की है।, जिन्हें चीन एक हिंसक अलगाववादी मानता है।  
चीन अमेरिकी अधिकारियों द्वारा ताइवान की यात्रा को द्वीप के स्वतंत्रता-समर्थक शिविर के लिए एक उत्साहजनक संकेत के रूप में देखता है। वाशिंगटन के ताइवान के साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन कानूनी रूप से उसे अपनी रक्षा के लिए साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है।
 

ताइवान की राष्ट्रपति से मिलीं अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी
ताइवान की राष्ट्रपति से मिलीं अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी - फोटो : ANI
 इस दौरे पर चीन की बौखलाहट की क्या और भी वजहें हैं?
अमेरिकी अधिकारियों की यात्रा को चीन ताइवान में चल रहे आजादी के मुहिम को भड़ाकने के प्रयास के रूप में देखता है। अमेरिका के भले ही ताइवान के राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन वह कानूनी तौर पर ताइवान को सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कहता रहा है।  
सैनफोर्ड यूनिवार्सिटी के खारिस टेम्पलमैन ने न्यूज एजेंसी रॉयटर से कहा कि चीन के दबाव के बाद भी 82 साल की पेलोसी ताइवान को समर्थन देकर अपनी विरासत को मजबूत करना चाहती हैं। चीन को संकेत देने के लिए वैसे भी स्पीकर से बेहतर और कौन हो सकता था? इसलिए वह चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ स्टैंड लेने के लिए एक बहुत शक्तिशाली प्रतीकात्मक स्थिति में है।"
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। उसे वह एक स्वशासित प्रा्ंत के रूप में देखता है और अपने नियंत्रण में लेने के लिए बल प्रयोग भी कर सकता है। यही वजह थी कि पेलोसी के दौरे पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि इस यात्रा के बहुत गंभीर परिणाम होंगे। वहीं, ताइवान ने चीन के संप्रभुता के दावों को हमेशा खारिज किया है।
 

डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग
डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग
पेलोसी की यात्रा पर अमेरिका की विपक्षी पार्टी का क्या रुख है?
ताइवान को लेकर अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों का रुख एक सा है। विपक्षी रिपब्लिकन्स ने भी पेलोसी के दौरे का समर्थन किया है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के शीर्ष रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल मैककॉल के पेलोसी का यात्रा से पहले ही एक न्यूज चैनल से कहा था कि कांग्रेस का जो भी सदस्य पेलोसी के साथ जाना चाहे, उसे जाना चाहिए।
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