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Myanmar Election: म्यांमार में 28 दिसंबर से शुरू होगा मतदान, क्या देश में चार साल बाद खत्म होगा सेना का शासन?

Mon, 18 Aug 2025 02:53 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 18 Aug 2025 02:53 PM IST
सार

Myanmar Election: म्यांमार 28 दिसंबर से चुनाव कराने जा रहा है, लेकिन देश गृहयुद्ध में उलझा है, विपक्ष को दबा दिया गया है, और आम जनता भय व असुरक्षा के माहौल में जी रही है। ऐसे में यह चुनाव लोकतंत्र की दिशा में कदम नहीं बल्कि सेना की सत्ता को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।

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Myanmar's election commission sets Dec 28 to hold long-awaited new elections
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

म्यांमार की सेना-नियुक्त चुनाव आयोग ने सोमवार को घोषणा की कि देश में बहुप्रतीक्षित चुनाव 28 दिसंबर से शुरू होंगे। यह फैसला उस समय आया है जब देश में 2021 में सेना द्वारा सत्ता हथियाने के बाद से लगातार संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। आलोचक पहले ही कह चुके हैं कि यह चुनाव महज एक दिखावा होंगे, जिनका उद्देश्य सेना की सत्ता पर कब्जे को वैध ठहराना है।
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चुनाव आयोग का एलान
चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा कि चुनाव कई चरणों में कराए जाएंगे और विस्तृत कार्यक्रम जल्द जारी किया जाएगा। आयोग ने पहले ही घोषणा कर दी है कि देश के सभी 330 टाउनशिप को निर्वाचन क्षेत्र बनाया गया है। अब तक करीब 60 राजनीतिक दल पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें सेना-समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी भी शामिल है।
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चुनाव पर उठ रहे सवाल
बड़ा सवाल यह है कि मतदान कैसे होगा, क्योंकि देश के कई हिस्सों पर सेना का नियंत्रण नहीं है। वहां लोकतंत्र समर्थक प्रतिरोध बल और जातीय अल्पसंख्यक विद्रोही काबिज हैं। इन इलाकों में चुनाव कराना लगभग असंभव माना जा रहा है। कई विपक्षी संगठनों और सशस्त्र प्रतिरोध समूहों ने एलान किया है कि वे इस चुनाव को विफल करने की कोशिश करेंगे। पिछले महीने सैन्य सरकार ने नया कानून बनाया जिसके तहत चुनाव का विरोध करने या उसे बाधित करने वालों को मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती है। आलोचकों का कहना है कि जब न मीडिया स्वतंत्र है, न विपक्षी नेता आज़ाद हैं, तो यह चुनाव कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हो सकते।

आंग सान सू की और एनएलडी की स्थिति
2020 में हुए आम चुनाव में आंग सान सू की की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने भारी जीत दर्ज की थी। लेकिन सेना ने फरवरी 2021 में सत्ता पलट दी और सू की की सरकार को हटा दिया। 80 वर्षीय सू की को सेना ने कई मुकदमों में दोषी ठहराकर कुल 27 साल की कैद की सजा दी है। उनकी पार्टी को भी भंग कर दिया गया है। सेना ने सत्ता हथियाने का औचित्य 2020 के चुनावों में कथित धांधली बताकर पेश किया, जबकि स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को कोई बड़ा गड़बड़ नहीं मिला था।

युद्ध और असुरक्षा की चुनौती
वर्तमान में देश का आधे से भी कम हिस्सा सेना के नियंत्रण में है। कई जगहों पर गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। सेना चुनाव से पहले विद्रोहियों से कब्ज़ा छुड़ाने के लिए जमीन और हवाई हमले तेज कर रही है। पिछले कुछ हफ्तों में लगातार हवाई हमलों में आम नागरिक बड़ी संख्या में मारे गए हैं।
  • 17 अगस्त (रविवार)- कायाह (करैनी) राज्य के मावची कस्बे के एक अस्पताल पर बमबारी की गई, जिसमें कम से कम 24 लोग मारे गए और कई घायल हुए।
  • 15 अगस्त (गुरुवार): मोगोक शहर पर हवाई हमला हुआ, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई, इनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल थी। ये दोनों कस्बे खनिज संपदा के लिए जाने जाते हैं- मावची वोल्फ्राम और टंगस्टन की खदानों के लिए और मोगोक कीमती रत्नों के लिए मशहूर है।
  • सेना ने इन हमलों की पुष्टि नहीं की, बल्कि हमेशा की तरह कहा कि उसने केवल वैध सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है और विद्रोही ही आतंकी हैं।

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चुनाव को लेकर क्या है विशेषज्ञों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सेना की सत्ता को वैध बनाने का एक जरिया भर है। लोकतंत्र समर्थक दलों और नेताओं को या तो जेल में डाल दिया गया है या फिर राजनीतिक मैदान से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में 28 दिसंबर से शुरू होने वाला यह चुनाव, देश की जनता की असली इच्छा को दिखा पाएगा या नहीं, इस पर गहरे संदेह हैं।
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