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म्यांमार : वैश्विक दबाव में आई सैन्य सरकार, शासन के विरुद्ध आवाज उठाने वालों की रिहाई

Fri, 02 Jul 2021 01:28 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नेपीता
एजेंसी, नेपीता Published by: देव कश्यप Updated Fri, 02 Jul 2021 01:28 AM IST
सार

  • म्यांमार की सैन्य सरकार ने अपने ऊपर बढ़ रहे वैश्विक दबाव के बीच दो दिन में 2200 से ज्यादा राजनीतिक कैदियों को जेल से रिहा कर दिया है
  • बड़े पैमाने पर पत्रकारों और राजनीतिक कैदियों को किया गया रिहा

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Myanmar Military Junta releases prisoners who raised voice against military rule
म्यांमार में तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

म्यांमार की सैन्य सरकार ने बढ़ती वैश्विक आलोचना को ध्यान में रखते हुए पिछले दो दिनों (बुधवार और गुरुवार को) में 2,000 से अधिक कैदियों को रिहा किया है। रिहा होने वाले लोगों में फरवरी में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता और प्रदर्शनों पर खबर जारी करने वाले पत्रकार भी शामिल हैं।

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शासन के प्रवक्ता मेजर जनरल जॉ मिन टुन के अनुसार, रिहा किए गए अधिकांश लोगों पर शासन विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने गुरुवार को बर्मी मीडिया को बताया, कुल 2,296 लोगों को रिहा किया गया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया, लेकिन वे प्रमुख भूमिकाओं में नहीं थे। उन्होंने हिंसक कृत्यों में भाग नहीं लिया। लेकिन प्रमुख एक्टिविस्ट और नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के सांसद रिहा होने वालों में शामिल नहीं हैं।
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मानवाधिकार समूह असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स (एएपीपी) के अनुसार, शासन ने मंगलवार को 6,421 लोगों को हिरासत में लिया था। एएपीपी पदाधिकारियों ने कहा कि 4,000 से अधिक राजनीतिक कैदी अभी भी नजरबंद हैं।
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यांगून की कुख्यात इनसेन जेल से म्यांमार नाउ की रिपोर्टर मा के जोन नेवे सहित 721 बंदियों को रिहा कर दिया है, जो चार महीने से अधिक समय से हिरासत में थे। उन्हें फरवरी के अंत में यांगून में एक विरोध प्रदर्शन को कवर करते हुए गिरफ्तार किया गया था और उन पर उकसाने का आरोप लगाया गया था। इन कैदियों को यंगून की इनसेइन जेल से बसों द्वारा ले जाया गया, जहां उनके दोस्त और परिवार सुबह से रिहाई का इंतजार कर रहे थे। इस जेल में दशकों से राजनीतिक कैदियों को रखा जाता रहा है।

यह बात सामने आई है कि सभी कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को रिहा नहीं किया गया है। उप सूचना मंत्री मेजर जनरल जॉ मिन तुन ने पहले कहा था कि पूरे देश में करीब 2,300 कैदियों को रिहा किया गया है। बुधवार और गुरुवार को पाथेन, दावाई, श्वेबो, लैशियो और अन्य जगहों की जेलों से भी बंदियों को रिहा किया गया। सरकार विरोधी सक्रियता के लिए उकसाने के आरोप में 24 मशहूर हस्तियों के खिलाफ जुंटा ने आरोप हटा दिए थे, जिसके बाद अब कैदियों को रिहा करने का कदम उठाया गया है। मार्च के अंत में, शासन ने 628 कथित प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया था।

 

पांच महीने बाद रिहा हुए आंग सान सू की के मीडिया प्रमुख
एएपीपी के संयुक्त सचिव यू बो ची ने कहा कि किसी भी रिलीज का लक्ष्य वास्तविक सुधार होना चाहिए। हिंसा खत्म होनी चाहिए और यातना और हत्या करने वालों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे ढील के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहिए और सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई और लोकतंत्र की वापसी के लिए दबाव जारी रखना चाहिए। रिहाई का सिलसिला पिछले हफ्ते तब शुरू हुआ, जब आंग सान सू की के मीडिया प्रमुख यू जॉ हते को पांच महीने की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया।

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