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आईसीजे आदेश पर म्यांमार बोला- रोहिंग्या नरसंहार के आरोप गलत, बांग्लादेश ने फैसले पर खुशी जताई

Fri, 24 Jan 2020 07:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका/नेपितो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका/नेपितो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 24 Jan 2020 07:54 PM IST
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Myanmar denies ICJ allegations on Rohingya mass genocide, bangladesh happy with decision
कुलभूषण जाधव - फोटो : SELF

म्यांमार ने गांबिया के आरोप का एक बार फिर खंडन किया है कि उसके यहां रोहिंग्या समुदाय के लोगों के नरसंहार की घटनाएं हुई हैं। म्यांमार को दिए गए अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) के आदेश के बाद म्यांमार ने कहा है कि उसकी सरकार ने इन आरोपों की पहले ही जांच कराई है और मानवाधिकार संगठनों की ओर से लगाए जा रहे रोहिंग्या नरसंहार के आरोप को बेबुनियाद पाया है।

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लेकिन म्यांमार ने यह जरूर माना कि युद्ध के दौरान होने वाले अपराध, मानवाधिकारों की गंभीर अनदेखी और गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायतें जरूर सही पाई गई हैं।

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गौरतलब है कि आईसीजे ने गुरुवार को म्यांमार को आदेश दिया था कि वह रोहिंग्या समुदाय और खासकर रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी दे, उनके मानवाधिकारों की रक्षा करे और कथित नरसंहार रोके। म्यांमार के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आईसीजे के सामने अपना पक्ष रखते हुए म्यांमार की तरफ से वह सारे तथ्य रखे गए थे कि गांबिया की ओर से रखाइन प्रांत में 2016-17 में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के आरोप सही नहीं हैं।
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बयान में कहा गया है कि म्यामांर की शुरू से ही ये कोशिश रही थी कि आईसीजे को उन तमाम आरोपों के बारे में सही तथ्य बताकर गुमराह होने से बचाया जा सके। 

बांग्लादेश ने आदेश को मानवता की जीत बताया

बांग्लादेश ने आईसीजे के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदाय की जीत बताया है। बांग्लादेश के विदेश सचिव मसूद बिन मोमेन और पूर्व विदेश सचिव मोहम्मद शहीदुल हक ने आईसीजे के आदेश के बाद एक कार्यक्रम में इस फैसले की तारीफ की और कहा कि बांग्लादेश लगातार म्यांमार और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने यह मामला उठाता रहा है और ढाका के कॉक्स बाजार में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लेने के लिए म्यामार प दबाव डालता रहा है।

सेंटर फॉर जेनोसाइड स्टडी की ओर से आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लेते हुए बांग्लादेशी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि आईसीजे का फैसला तात्कालिक तौर पर रोहिंग्या समुदाय के कथित नरसंहार को रोकने में फायदेमंद होगा।

विदेश सचिव ने ये भी कहा कि इस फैसले से रोहिंग्या के अलावा अन्य किसी भी वर्ग पर हो रहे जुल्म और नरसंहार की कार्रवाइयों को रोकने में मदद करेगा। इससे उत्तरी रखाइन प्रांत में रह रहे रोहिंग्या समुदाय को राहत देगा और बेशक इससे उनकी सुरक्षा बढ़ेगी।



उन्होंने म्यांमार से आग्रह किया कि वह आईसीजे के आदेश का सम्मान करे और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपना सकारात्मक रवैया अपनाए ताकि बांग्लादेश में मुश्किल हालातों में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों की घर वापसी हो सके। एक बार म्यांमार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए तो रोहिंग्या मुसलमानों के लौटने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इतने शरणार्थियों की वापसी प्रक्रिया आसान नहीं है, इसके बावजूद बांग्लादेश और म्यांमार अगर मिलकर कोई कारगर रास्ता अपनाएं, तो ऐसा हो सकता है। ऐसे में हमें बिना किसी पूर्वाग्रह के मिलकर काम करने की जरूरत है।

पूर्व विदेश सचिव शहीदुल हक ने भी कहा कि आईसीजे का फैसला ऐसे वक्त में आया है जब यूएन भी रोहिंग्या को एक जातीय नजरिये से देखने से बचता रहा है।

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