म्यांमार में सुरक्षा बलों का नरसंहार, फायरिंग में 38 प्रदर्शनकारियों की मौत
- देश भर में विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस ने की हिंसात्मक कार्रवाई
- 300 लोग यंगून में गिरफ्तार, चार दिनों में 74 प्रदर्शनकारी मारे गए
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म्यांमार में पिछले माह के सैन्य तख्तापलट का विरोध कर रही आम जनता पर पुलिस व अन्य सुरक्षा बलों ने देश में कई जगह पर बुधवार को सीधे फायरिंग कर दी। संयुक्त राष्ट्र ने इस फायरिंग में 38 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया है। यह म्यांमार में चल रहे प्रदर्शन के दौरान किसी एक दिन में प्रदर्शनकारियों को निर्दयता से मारे जाने की सबसे बड़ी घटना है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने रविवार को 18 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का दावा किया था। इस तरह म्यांमार में सैन्य तख्तापलट का विरोध कर रहे अब तक 74 लोग मारे जा चुके हैं।
सुरक्षा बलों ने हिंसा के जरिये आंदोलन को दबाने की यह जघन्य कोशिश पड़ोसी देशों की तरफ से संयम बरतने और इस संकट का हल निकालने में मदद का प्रस्ताव रखने के अगले दिन की है। इस फायरिंग को नरसंहार बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने निंदा शुरू कर दी है और माना जा रहा है कि अब तक दूर से ही सैन्य तख्तापलट की आलोचना कर रहा अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब कुछ सख्त कदम उठा सकता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारी सुबह से ही अपने-अपने शहरों के मुख्य चौराहों और राजमार्गों पर एकत्रित होने लगे थे। शुरुआत में पुलिस ने कई जगह उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां चलाईं। लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। इसके चलते बाद में कई जगह पुलिस ने हिंसात्मक कार्रवाई के तहत गोलीबारी कर दी। इसमें दर्जनों लोगों की मौत के अलावा बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मांडले में करीब 1000 शिक्षकों और छात्रों की रैली पर दंगा पुलिस ने जबरदस्त लाठीचार्ज किया और इस दौरान गोलियां चलने की आवाज भी सुनी गईं। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां भी की गई हैं। अकेले यंगून में ही 300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। गिरफ्तार किए गए लोगों में कम से कम 8 अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों के पत्रकार भी शामिल हैं, जो प्रदर्शनों को कवर कर रहे थे।
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में सुरक्षा बलों के जवान प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए फायरिंग करते हुए दिखाई दिए। एक वीडियो में सुरक्षा बल एंबुलेंस के तीन कर्मचारियों को भी क्रूरतापूर्वक नीचे गिराकर जूतों और राइफल की बटों से पीटते हुए दिखाई दिए। म्यांमार में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजदूत ने मृतकों की संख्या 38 होने का दावा किया। साथ ही उन्होंने इस संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी होने की भी संभावना जताई है। एक स्वतंत्र टीवी चैनल डेमोक्रेटिक वॉयस ऑफ बर्मा ने भी 38 लोगों की मौत का दावा किया है। यंगून के एक डाटा एनालिस्ट ने ऑनलाइन प्लेटफार्मों से जानकारियां जुटाकर 34 मृतकों के नाम, पते और उम्र की सूची जारी की है। उसके अनुसार, सबसे ज्यादा 18 प्रदर्शनकारियों की मौत यंगून में हुई है, जबकि सबसे ज्यादा प्रदर्शनकारियों की भीड़ वाले मन्यवा शहर में 8 लोगों की मौत दर्ज की गई है। सालिन और मांडले में 2-2 प्रदर्शनकारी मारे गए। मावलामिन, मिंग्यान और कले में 1-1 प्रदर्शनकारी की मौत की खबर है।
आज यूएन सुरक्षा परिषद कर सकती है बैठक
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शुक्रवार को म्यांमार में हुई हिंसा को लेकर बंद कमरे में बैठक करने की संभावना है। परिषद से जुड़े एक राजनयिक ने नाम छिपाने की शर्त पर इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बैठक बुलाने का आग्रह ब्रिटेन की तरफ से किया गया है। हालांकि फिलहाल संयुक्त राष्ट्र की तरफ से तरफ से कोई संयुक्त कार्रवाई किया जाना मुश्किल है, क्योंकि सुरक्षा परिषद के दो सदस्य देश चीन और रूस का ऐसे किसी भी कदम को वीटो करना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में कुछ देशों की तरफ से अपने स्तर पर म्यांमार के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
वैश्विक कोशिशों के बावजूद बल प्रयोग
हिंसा बढ़ने के बाद, म्यांमार संकट का हल निकालने के लिए वैश्विक कूटनीतिक प्रयास बढ़ा दिए गए हैं। मंगलवार को आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की टेलिकॉन्फ्रेंस बैठक में आम सहमति बनाने का प्रयास किया था। लेकिन समूह की अपील को दरकिनार कर बुधवार को भी म्यांमार के सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग जारी रखा।
अपदस्थ राष्ट्रपति पर दो नए आरोप
म्यांमार के अपदस्थ राष्ट्रपति विन मिंट दो नए आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके वकील खिन मोंग जॉ ने बुधवार को बताया कि इसमें संविधान के उल्लंघन का आरोप भी शामिल है। इसके तहत उन्हें तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। बता दें कि हाल ही में देश की नेता आंग सान सूकी पर भी कई नए आरोप लगाए गए थे।