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म्यांमार: सरकार गिरा आंग सांग सू की को 27 साल के लिए किया कैद, अब पिता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सेना प्रमुख
Sat, 19 Jul 2025 02:06 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नेपीडॉ
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नेपीडॉ
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 19 Jul 2025 02:06 PM IST
सार
म्यांमार के सेना प्रमुख मिन ऑन्ग लैइंग ने पहली बार शहीद दिवस समारोह में भाग लिया, जो जनरल आंग सान को समर्पित था। आंग सान सू की की गैरमौजूदगी में यह कदम सियासी रूप से अहम माना जा रहा है। सेना जहां चुनाव की तैयारी कर रही है, वहीं देश में अस्थिरता और विरोध लगातार बढ़ रहे हैं।
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म्यांमार के सैन्य शासक मिन ऑन्ग लैइंग।
- फोटो : ANI
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विस्तार
म्यांमार की सियासत में एक बार फिर हलचल दिखी जब सेना प्रमुख मिन ऑन्ग लैइंग ने शनिवार को एक ऐसे समारोह में हिस्सा लिया, जिसे अब तक सेना टालती रही थी। यह कार्यक्रम देश के स्वतंत्रता सेनानी जनरल आंग सान को समर्पित था, जो कि म्यांमार की पूर्व नेता और वर्तमान में कैद में रखी गई आंग सान सू की के पिता थे। यह पहली बार है जब सेना प्रमुख ने 2021 की तख्तापलट के बाद इस कार्यक्रम में भाग लिया।
69 वर्षीय वरिष्ठ जनरल मिन ऑन्ग लैइंग ने यांगून में स्थित शहीद स्मारक पर आंग सान और उनके साथ मारे गए आठ अन्य नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में म्यांमार का झंडा झुका हुआ था और सेना परिषद के वरिष्ठ सदस्य व मंत्रीगण भी मौजूद थे। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब सेना के कब्जे वाले म्यांमार में जल्द चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है।
आंग सान सू की लगातार पांचवें साल रहीं नदारद
आंग सान सू की को सेना ने फरवरी 2021 में सत्ता से हटाकर गिरफ्तार कर लिया था और अब वह 27 साल की जेल सजा काट रही हैं। उनके खिलाफ जिन मामलों में सजा दी गई है, उन्हें व्यापक रूप से राजनीति से बाहर रखने की चाल माना जा रहा है। सू की की अनुपस्थिति ने एक बार फिर उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले लोकतंत्र समर्थकों को सक्रिय कर दिया।
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जनता ने भी दी श्रद्धांजलि, कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन
जहां एक तरफ सेना ने शहीद दिवस पर औपचारिक कार्यक्रम किया, वहीं आम जनता ने सुबह कार के हॉर्न और सायरन बजाकर 1947 में हुए हमले की याद ताजा की। देश के ऐसे इलाके जो सेना के नियंत्रण में नहीं हैं, वहां लोकतंत्र समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और आंग सान सू की की रिहाई की मांग उठाई।
ये भी पढ़ें- रक्षा विभाग के कंप्यूटरों का मेंटीनेंस कर रहे थे चीनी इंजीनियर, हेगसेथ ने दिए सिस्टम की समीक्षा के आदेश
चुनाव के जरिए सत्ता को वैधता देने की तैयारी
सेना ने वादा किया है कि वर्ष के अंत तक देश में चुनाव कराए जाएंगे। जानकारों का मानना है कि यह कदम सत्ता पर सेना की पकड़ को वैधता दिलाने की कोशिश है। चुनाव के ज़रिए सेना यह संदेश देना चाहती है कि अब शासन लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा, हालांकि वास्तविकता में जनरल सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
6,900 से ज्यादा मौतें, हजारों गिरफ्तारियां
2021 के तख्तापलट के बाद से अब तक म्यांमार में करीब 6,974 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता, कवि, नेता और पत्रकार शामिल हैं। वहीं, 29,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि सेना इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बता रही है। लेकिन देश में हिंसा और अस्थिरता की स्थिति लगातार बनी हुई है।
ये भी पढ़ें- 'गृहयुद्ध जैसी स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरा', बांग्लादेश में हिंसा पर बोले जातीय पार्टी के महासचिव
सेना की पकड़ कमजोर, चुनाव से पहले जारी हैं हमले
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना अब देश के आधे से कम हिस्से पर ही नियंत्रण रख पा रही है। चुनाव से पहले जिन इलाकों पर सेना का नियंत्रण नहीं है, उन्हें दोबारा कब्जे में लेने के लिए वह बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चला रही है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव से पहले राजनीतिक और भौगोलिक स्थिति को नियंत्रित करना है।
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69 वर्षीय वरिष्ठ जनरल मिन ऑन्ग लैइंग ने यांगून में स्थित शहीद स्मारक पर आंग सान और उनके साथ मारे गए आठ अन्य नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में म्यांमार का झंडा झुका हुआ था और सेना परिषद के वरिष्ठ सदस्य व मंत्रीगण भी मौजूद थे। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब सेना के कब्जे वाले म्यांमार में जल्द चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है।
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आंग सान सू की लगातार पांचवें साल रहीं नदारद
आंग सान सू की को सेना ने फरवरी 2021 में सत्ता से हटाकर गिरफ्तार कर लिया था और अब वह 27 साल की जेल सजा काट रही हैं। उनके खिलाफ जिन मामलों में सजा दी गई है, उन्हें व्यापक रूप से राजनीति से बाहर रखने की चाल माना जा रहा है। सू की की अनुपस्थिति ने एक बार फिर उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले लोकतंत्र समर्थकों को सक्रिय कर दिया।
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जनता ने भी दी श्रद्धांजलि, कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन
जहां एक तरफ सेना ने शहीद दिवस पर औपचारिक कार्यक्रम किया, वहीं आम जनता ने सुबह कार के हॉर्न और सायरन बजाकर 1947 में हुए हमले की याद ताजा की। देश के ऐसे इलाके जो सेना के नियंत्रण में नहीं हैं, वहां लोकतंत्र समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए और आंग सान सू की की रिहाई की मांग उठाई।
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सेना ने वादा किया है कि वर्ष के अंत तक देश में चुनाव कराए जाएंगे। जानकारों का मानना है कि यह कदम सत्ता पर सेना की पकड़ को वैधता दिलाने की कोशिश है। चुनाव के ज़रिए सेना यह संदेश देना चाहती है कि अब शासन लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा, हालांकि वास्तविकता में जनरल सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
6,900 से ज्यादा मौतें, हजारों गिरफ्तारियां
2021 के तख्तापलट के बाद से अब तक म्यांमार में करीब 6,974 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता, कवि, नेता और पत्रकार शामिल हैं। वहीं, 29,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि सेना इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बता रही है। लेकिन देश में हिंसा और अस्थिरता की स्थिति लगातार बनी हुई है।
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