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Pope Leo XIV: 'मेरा चुनाव एक क्रॉस और आशीर्वाद दोनों', सिस्टन चैपल में पहली बार बोले 'पोप लियो 14वें'

Fri, 09 May 2025 05:43 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन सिटी Published by: बशु जैन Updated Fri, 09 May 2025 05:43 PM IST
सार

कार्डिनल्स से बात करते हुए पोप लियो 14वें ने कहा कि ईसाई धर्म को एक ऐसी दुनिया में खुशी फैलाने की जरूरत है, जो अक्सर इसका मजाक उड़ाती है।  उन्होंने शिकायत की कि कई जगहों पर यीशु को गलत समझा जाता है। ऐसे स्थानों पर हमारे मिशनरी आउटरीच की सख्त जरूरत है। 

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'My election is both a cross and a blessing', Pope Leo 14th speaks for the first time in Siston Chapel
पोप लियो 14 - फोटो : ANI

विस्तार

नए पोप लियो 14वें ने सिस्टन चैपल में पहली बार मास कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कहा कि मेरा चुनाव एक क्रॉस और आशीर्वाद दोनों था। कार्डिनल्स से बात करते हुए पोप ने कहा कि ईसाई धर्म को एक ऐसी दुनिया में खुशी फैलाने की जरूरत है, जो अक्सर इसका मजाक उड़ाती है।
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उन्होंने कहा कि आपने मुझे इस क्रॉस को उठाने और मिशन का आशीर्वाद पाने के लिए बुलाया है। मैं जानता हूं कि मैं आप में से प्रत्येक पर भरोसा कर सकता हूं कि आप एक चर्च, एक समुदाय, यीशु के मित्रों और विश्वासियों के रूप में सुसमाचार की घोषणा करने के लिए मेरे साथ चलेंगे।
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लियो ने अफसोस जताया कि दुनिया के कई हिस्सों में ईसाई धर्म को बेतुका माना जाता है। पहले जब धन, सफलता और शक्ति जैसे प्रलोभन होते थे तो इसका मजाक उड़ाया जाता था या विरोध किया जाता था। उन्होंने शिकायत की कि कई जगहों पर यीशु को गलत समझा जाता है। उन्हें एक प्रकार का करिश्माई नेता या सुपरमैन बना दिया जाता है। लियो ने कहा कि यह न केवल गैर-विश्वासियों के बीच बल्कि कई बैपटाइस्ड ईसाइयों के बीच भी सच है। जो इस स्तर पर व्यावहारिक नास्तिकता की स्थिति में रहते हैं। ऐसे स्थानों पर हमारे मिशनरी आउटरीच की सख्त जरूरत है। 
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लियो ने कहा कि विश्वास की कमी अक्सर दुखद रूप से जीवन में अर्थ की हानि, दया की उपेक्षा, मानवीय गरिमा का भयानक उल्लंघन, परिवार का संकट और हमारे समाज को प्रभावित करने वाले कई अन्य घावों के साथ होती है। मास के समापन पर कार्डिनल्स ने तालियां बजाईं। इस दौरान लियो को साधारण काले जूते पहने देखा गया। वे अन्य पोप की तरह पसंद किए जाने वाले लाल लोफर्स में नजर नहीं आए। 

इससे पहले दो महिलाओं ने मास की शुरुआत में धर्मग्रंथों का पाठ किया। यह शायद लियो के इस इरादे का संकेत था कि वह चर्च में महिलाओं की भूमिका का विस्तार करने की पूर्व पोप फ्रांसिस की प्राथमिकता का पालन करना चाहते थे। कार्डिनल के रूप में लियो ने बिशप नामांकन की जांच करने वाले बोर्ड में तीन महिलाओं को शामिल करके फ्रांसिस के सबसे क्रांतिकारी सुधारों में से एक को लागू किया था।

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पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पोप लियो 14वें को शुभकामनाएं दी हैं। एक्स पर  पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि मैं भारत के लोगों की ओर से नए पोप लियो 14वें को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। कैथोलिक चर्च का उनका नेतृत्व शांति, सद्भाव, एकजुटता और सेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने के गहन महत्व के क्षण में आता है। भारत हमारे साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर संवाद और जुड़ाव के लिए प्रतिबद्ध है।

कौन हैं रॉबर्ट प्रीवोस्ट ? 
69 वर्षीय रॉबर्ट प्रीवोस्ट अमेरिकी कार्डिनल हैं।  शिकागो में जन्मे कार्डिनल प्रीवोस्ट में निश्चित रूप से इस भूमिका के लिए आवश्यक कई गुण हैं। दो साल पहले पोप फ्रांसिस ने प्रीवोस्ट को मार्क ओउलेट की जगह वेटिकन के बिशपों के लिए डिकास्टरी का प्रीफेक्ट चुनकर उन्हें अगली पीढ़ी के बिशपों को चुनने का काम सौंपा था। उन्होंने पेरू में आर्कबिशप बनने से पहले कई साल तक एक मिशनरी के तौर पर काम किया। प्रीवोस्ट को उन्हें एक सुधारक के रूप में देखा जाता है, लेकिन 69 की उम्र में उन्हें पोप के पद के लिए बहुत कम उम्र का माना जा सकता है। पेरू में आर्कबिशप के रूप में उनका कार्यकाल यौन शोषण के दावों को छिपाने के आरोपों से भी घिरा रहा।

21 अप्रैल को हुआ पोप फ्रांसिस का निधन
21 अप्रैल, 2025 को 88 वर्ष की आयु में पोप फ्रांसिस का निधन हो गया था, जिसके बाद चर्च के लिए नए पोप का चुनाव किया जाना था। पोप की मृत्यु के साथ ही सदियों पुरानी रस्म शुरू हुई, जिसमें कार्डिनल कॉलेज की तरफ से उत्तराधिकारी का चुनाव करने के लिए पवित्र शपथ लेना, मतपत्रों की गिनती के बाद उन्हें सुई और धागे से छेदना और फिर जलाकर सफेद या काला धुआं निकालना शामिल है। चिमनी से सफेद धुआं निकलने का अर्थ है कि नए पोप का चुनाव हो चुका है।

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