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देशद्रोह मामले में मुशर्रफ को 2 मई को पेश होने का निर्देश
Tue, 02 Apr 2019 12:18 AM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, इस्लामाबाद
एजेंसी, इस्लामाबाद
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 02 Apr 2019 12:18 AM IST
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परवेज मुशर्रफ
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पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति को 2 मई को विशेष अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने चेताते हुए कहा कि अदालत में हाजिर न होने पर 75 वर्षीय मुशर्रफ देशद्रोह के मामले में अपने बचाव का अधिकार खो देंगे।
पूर्व तानाशाह मुशर्रफ 2016 में अपने इलाज का हवाला देते हुए पाकिस्तान से बाहर से चले गए थे। तब से ही वह दुबई में रह रहे हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। पिछले महीने ही उन्हें दुबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। माना जा रहा है कि वह अब पाकिस्तान नहीं लौटेंगे। एक वकील की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को मुशर्रफ की पेशी को लेकर यह आदेश पारित किया।
मुशर्रफ के खिलाफ पाकिस्तान की विशेष अदालत में 2014 से देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। 2016 में उनके देश छोड़ने के बाद से ही मामले की सुनवाई रुकी हुई है। बचाव पक्ष के वकील से चीफ जस्टिस खोसा ने कहा, ‘आरोपी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हो रहा है। देशद्रोह साधारण अपराध का मामला नहीं है। कोर्ट इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ सकता।’
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बताते चलें कि मुशर्रफ ने राष्ट्रपति रहते 2007 में पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाई थी। नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली तत्कालीन पीएमएल (एन) सरकार ने देश में इमरजेंसी लगाए जाने के खिलाफ पूर्व तानाशाह के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था।
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पूर्व तानाशाह मुशर्रफ 2016 में अपने इलाज का हवाला देते हुए पाकिस्तान से बाहर से चले गए थे। तब से ही वह दुबई में रह रहे हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। पिछले महीने ही उन्हें दुबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। माना जा रहा है कि वह अब पाकिस्तान नहीं लौटेंगे। एक वकील की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को मुशर्रफ की पेशी को लेकर यह आदेश पारित किया।
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मुशर्रफ के खिलाफ पाकिस्तान की विशेष अदालत में 2014 से देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। 2016 में उनके देश छोड़ने के बाद से ही मामले की सुनवाई रुकी हुई है। बचाव पक्ष के वकील से चीफ जस्टिस खोसा ने कहा, ‘आरोपी जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हो रहा है। देशद्रोह साधारण अपराध का मामला नहीं है। कोर्ट इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ सकता।’
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बताते चलें कि मुशर्रफ ने राष्ट्रपति रहते 2007 में पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाई थी। नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली तत्कालीन पीएमएल (एन) सरकार ने देश में इमरजेंसी लगाए जाने के खिलाफ पूर्व तानाशाह के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था।