फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai

जानिए कौन था लीबियाई तानशाह गद्दाफी, जिसकी घड़ी 1.33 करोड़ रुपये में हुई नीलाम

Tue, 26 Mar 2019 04:09 PM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, दुबई Published by: Priyesh Mishra Updated Tue, 26 Mar 2019 04:09 PM IST
विज्ञापन
Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai
गद्दाफी
सोमवार को लीबिया के पूर्व तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी की एक घड़ी को दुबई में नीलाम किया गया। इस घड़ी को विशेष रूप से साल 1979 में ऑर्डर देकर बनवाया गया था। इसकी नीलामी 1.33 करोड़ रुपये में हुई।
विज्ञापन


यह घड़ी 18 कैरेट के सोने से बनी है जिसमें अरबी में लिखा है, 'जब आपको जरुरत होगी, तभी आजादी मिलेगी।' इस घड़ी पर अंग्रेजी में गद्दाफी के हस्ताक्षर भी हैं।
विज्ञापन


इस घड़ी के खरीदार का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार इसकी बोली पहले 25 हजार डॉलर (करीब 17 लाख रुपये) लगने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन, खरीदार ने इसे 675 फीसदी ज्यादा दाम देकर 1.33 करोड़ रुपए में खरीद लिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


नीलामीकर्ता ने बताया कि इस तरह की घड़ी के केवल दो मॉडल ही उपलब्ध हैं। साल 1978 में लीबिया के मजदूर दिवस पर कर्नल गद्दाफी ने यह घड़ी पहनी थी और बाद में इसे अपने सहयोगियों को उपहार में दे दिया था।
 

कौन था गद्दाफी

Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai
गद्दाफी
कर्नल गद्दाफी का पूरा नाम मुअम्मर अल गद्दाफी था। इनका जन्म 7 जून 1942 को लीबिया के सिर्ते शहर में हुआ था। इनके जन्म के समय लीबिया इटली का उपनिवेश हुआ करता था। साल 1951 में लीबिया को पश्चिमी देशों के मित्र किंग इदरीस के नेतृत्व में स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। 

युवा काल में गद्दाफी अरब राष्ट्रवाद से बहुत प्रभावित था। इसके अलावा यह मिस्र के नेता गमाल अब्देल नासिर का भी बड़ा प्रशंसक था । साल 1961 में गद्दाफी ने बेनगाजी के सैन्य कॉलेज में प्रवेश लिया। इसके अलावा उसने यूनाइटेड किंगडम में चार महीने सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

सैन्य कॉलेज से स्नातक होने के बाद लीबिया की फौज में गद्दाफी ने कई उच्च पदों पर काम किया। लेकिन, इस दौरान उनका प्रशासक इदरीस के साथ मतभेद बढ़ने लगा। बाद में गद्दाफी सेना छोड़ सरकार के विरुद्ध काम करने वाले एक गुट में शामिल हो गया। 
 

लीबिया का नया तानाशाह बना गद्दाफी

Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai
गद्दाफी
1 सितंबर 1969 को विद्रोहियों के नेतृत्व में लीबिया से राजा इदरीस की सत्ता को उखाड़ फेंका गया। उस समय इदरीस तुर्की में इलाज करवा रहे थे। इसके बाद गद्दाफी सशस्त्र बलों के प्रमुख और रिवोल्यूशनरी कमांड काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में शपथ ली।

वास्तव में वह 27 साल की उम्र में लीबिया का शासक बन गया था। उसने पूरे देश पर सेना के माध्यम से नियंत्रण बना लिया। सत्ता संभालते ही गद्दाफी ने लीबिया में अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य ठिकानों को बंद करा दिया। उसका यह आदेश राजा इदरीस को पश्चिमी फौज के द्वारा मिल रही मदद के खिलाफ था। 

उसने यह आदेश भी जारी किया कि लीबिया में काम करने वाली सभी विदेशी तेल कंपनियां देश के साथ राजस्व का एक बड़ा हिस्सा साझा करें। गद्दाफी ने ग्रेगोरियन कैलेंडर को इस्लामी कैलेंडर के साथ बदल दिया और पूरे देश में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी।

दिसंबर 1969 में सेना के कुछ अधिकारियों द्वारा असफल तख्तापलट के प्रयत्नों को देखते हुए उसने अपने राजनैतिक विरोधियों की हत्या करवानी शुरू कर दी। उसने देश में रह रहे सभी इटली के नागरिकों को देश से निष्कासित कर दिया। गद्दाफी के इस कदम को अरब राष्ट्रवाद और पश्चिमी साम्राज्यवाद के बीच लड़ाई के रूप में देखा गया था। उसने यहूदियों और इज़राइल का मुखर विरोध किया और लीबिया से यहूदी समुदाय को निष्कासित कर दिया।

इसके अलावा उसने देश में बढ़ते विरोधियों और अपनी हत्या की आशंका को देऱते हुए कुछ निजी और विश्वासपात्र लोगों की टीम खड़ी की। इसके अलावा उसके खुफिया एजेंटो ने विदेशों में रह रहे गद्दाफी विरोधियों को धमकाने और मारने का भी खूब काम किया।

गद्दाफी ने लीबिया को पश्चिमी देशों से दूर करके खुद को मध्य-पूर्व अफ्रीका की ओर आगे बढ़ाया। लीबिया की सेनाओं ने मिस्र, सूडान सहित कई विदेशी संघर्षों में हिस्सा लिया। इस दौरान लीबिया की सेना पर चाड के गृहयुद्ध में शामिल होने का भी आऱोप लगा। 
 

सत्ता में करीबी लोगों को दिया उच्च पद

Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai
गद्दाफी
गद्दाफी ने अपने करीबी लोगों को सत्ता में ऊंचे पदों पर नियुक्त किया। इसके अलावा उसने किसी भी तरह के नागरिक आयोजन को भ्रष्टाचार की श्रेणी में रख दिया। इससे पूरे देश में गद्दाफी के विरुद्ध कोई भी सार्वजनिक सभा होने पर रोक लग गई। हालांकि इस दौरान उनके सहयोगी और ऊंचे पदों पर बैठे रिश्तेदार तेल के व्यापार में खूब लाभ कमा रहे थे। इस दौरान विरोधियों की हत्या भी की गई।

अंतरराष्ट्रीय कुख्याति

गद्दाफी की शासन करने की शैली और नीति विरोधियों के दमन करने पर आधारित थी। कुछ लोग उसे स्वभाव से सनकी भी मानते थे। उसके पास खुद की महिला अंगरक्षकों का एक कैडर भी था। ये खुद को अफ्रीका का राजा मानता था। विदेश दौरे के समय गद्दाफी हमेशा अजीब प्रकार के कपड़े पहने रहता था। 

इसकी सरकार पर कई विदेशी सरकारों ने प्रतिबंध भी लगाया। जिससे लीबिया की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई। इसका प्रमुख कारण कुछ आतंकी हमलों में लीबिया का नाम शामिल होना था। कहा जाता है कि चरमपंथी संगठन आयरिश रिपब्लिकन आर्मी का कथित रूप से गद्दाफी से संबंध था। आयरिश आतंकवाद के समय यूनाइटेड किंगडम ने एक दशक से अधिक समय तक लीबिया के साथ अपने राजनयिक संबंधों को खत्म कर दिया।

1986 में वेस्ट बर्लिन डांस क्लब की बमबारी के पीछे लीबिया के आतंकवादियों का हाथ माना गया। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे। बदले की कार्रवाई करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के आदेश पर अमेरिकी सेना ने लीबिया में विशिष्ट लक्ष्यों पर बमबारी की, जिसमें त्रिपोली में गद्दाफी का निवास भी शामिल था।
 

पतन की शुरुआत

Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai
गद्दाफी
चार दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने वाले गद्दाफी के पतन में एक साल से भी कम का समय लगा था। जनवरी 2011 में शुरू हुए अरब स्प्रिंग में ट्यूनीशियाई क्रांति ने अरब के कई देशों में सत्ता का परिवर्तन किया था। इसमें जहां ट्यूनीशिया के तानाशाह जीन अल-अबिदीन बेन अली को सत्ता छोड़ना पड़ा वहीं अगले महीने ही मिस्र के शासक होस्नी मुबारक को भी त्यागपत्र देकर जेल चले गए।

इस आंदोलन ने लीबिया के बेनगाजी शहर में गद्दाफी की सत्ता के खिलाफ लोगों को खड़ा किया। पूरा देश विरोध प्रदर्शनों के आग में घिर गया। जब गद्दाफी ने सेना के दम पर इसे कुचलने की कोशिश की तो यह आंदोलन और उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के लिए पुलिस और विदेशी सैनिकों को भाड़े पर लाया गया। 

प्रदर्शनकारियों पर हवाई हमले किए गए। इस दौरान गद्दाफी ने देश के नाम संबोधन में कहा कि प्रदर्शनकारी देशद्रोही, नशा करने वाले और अलकायदा जैसे चरमपंथी संगठन के लोग हैं। जिसके बाद सरकारी सशस्त्र बलों ने प्रदर्शनकारियों पर भारी हथियारों से हमला भी किया।

फरवरी 2011 के अंत तक विद्रोहियों ने लीबिया के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया और एक राष्ट्रीय निकाय का गठन किया जिसे राष्ट्रीय परिवर्तन परिषद कहा गया। इसके बाद विद्रोहियों ने राजधानी त्रिपोली को घेर लिया जहां गद्दाफी के कुछ समर्थक अब भी रह रहे थे।

तानाशाह गद्दाफी की मौत

Muammar Al Gathafi Dictator of Libya gathafi wrist watch auctioned in Dubai
गद्दाफी
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने विद्रोहियों के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया और गद्दाफी को हटाने का आह्वान किया। मार्च के अंत में नाटो गठबंधन ने हवाई हमले शुरू कर दिए और पूरे लीबिया को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित कर दिया। अगले छह महीनों में नाटो का सैन्य हस्तक्षेप निर्णायक साबित हुआ। अप्रैल में नाटो के एक हमले में गद्दाफी का एक बेटा मारा गया। अगस्त महीने में राजधानी त्रिपोली पर विद्रोहियों ने कब्जा जमा लिया लेकिन उन्हें गद्दाफी नहीं मिला।

जून 2011 में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने मानवता के खिलाफ अत्याचार करने के लिए गद्दाफी, उसके बेटे सैफ अल इस्लाम और उसके बहनोई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। जुलाई में 30 से अधिक देशों ने लीबिया में विद्रोहियों की सरकार को मान्यता दे दी। लेकिन गद्दाफी अब भी उनकी पकड़ से बाहर था।

20 अक्टूबर 2011 को लीबिया के अधिकारियों ने बताया कि मुअम्मर गद्दाफी की मौत उसके गृहनगर सिर्ते में हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी हत्या गोलियों से की गई है। जबकि बाद में अन्य लोगों ने दावा किया कि उसकी मौत नाटो के एक हवाई हमले में हुई है। एक वीडियो भी जारी की गई थी जिसमें गद्दाफी को कुछ लड़ाके घेर कर खड़े थे और वह खून व धूल से सना हुआ था। हालांकि इस वीडियो के सत्यता की पुष्टि नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed