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पाकिस्तान: कराची के जिन्ना मार्ग में 76 साल से मनाया जा रहा है गणेश उत्सव
Fri, 28 Aug 2020 09:21 AM IST
देव कश्यप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 28 Aug 2020 09:21 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
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देश में आजकल गणेश चतुर्थी की धूम है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, साथ ही देश के कई हिस्सों में बप्पा को घर-घर स्थापित किया जाता है। दस दिनों तक उनकी पूजा-आराधना की जाती है, बप्पा को तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं और पूरे गणेश उत्सव के बाद धूमधाम के साथ गणेश जी को अनंत चतुर्दशी के दिन जल में विसर्जित कर दिया जाता है। इस बार बप्पा को विसर्जित करने का दिन अनंत चतुर्दशी एक सितंबर को है।
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गणेश उत्सव का पाकिस्तान के कराची में भी दिखा। मंदिर में बड़ा पंडाल, शंखनाद करते भक्त, महाराष्ट्र की परंपरागत पोशाक में लाल चूड़ी पहनकर आरती गान करतीं महिलाएं और भजन-कीर्तन करते भक्त। यहां 'मोरया रे बप्पा मोरया रे...' भजन पर भक्त झूमते नजर आए। कराची के जिन्ना मार्ग में रहने वाले 800 से ज्यादा महाराष्ट्रीयन परिवार सालों से गणपति उत्सव मनाते आ रहे हैं। यह उत्सव रत्नेशवर महादेव मंदिर, गणेश मठ मंदिर और स्वामी नारायण मंदिर में मनाया जाता है।
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76 साल पहले हुई थी गणेशोत्सव की शुरुआत
गणेश उत्सव की शुरुआत कृष्णा नाईक ने 76 साल पहले की थी। वे बंटवारे के बाद कराची जाकर बस गए थे। कृष्णा के बाद उनके बेटे राजेश नाईक और अब उनकी नई पीढ़ी इस परंपरा को आगे निभा रही है। कृष्णा नाईक के बेटे राजेश नाईक और उत्सव में शामिल लोगों का कहना है कि श्रद्धा और भक्तिभाव का यह संगम हमें सालभर ऊर्जा देता है।
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कराची के सोशल एक्टिविस्ट और कराची मराठी कम्युनिटी के सदस्य विशाल राजपूत कहते हैं कि उत्सव में शामिल होने मात्र से हमें इस बात का विश्वास हो जाता है कि बप्पा हमें हर तरह से सुरक्षित रखेंगे। यही वजह है कि पूरे पाकिस्तान में सबसे ज्यादा भक्तों की संख्या कराची में ही जुटती है।
राजेश नाईक खुद बनाते हैं मूर्ति
गणेशोत्सव की परंपरा शुरू करने वाले कृष्ण नाईक के बेटे राजेश खुद ऑर्डर लेकर प्रतिमाएं बनाकर देते हैं। अब श्रद्धालु भी मूर्ति घर पर बना लेते हैं। दुबई से भी बड़े पैमाने पर मूर्तियां मंगवाई जाती हैं, लेकिन इस बार कोरोना के कारण नहीं मंगवाई गई।
मुस्लिम परिवार भी होते हैं शामिल
विशाल राजपूत ने बताया कि कराची में भारी तादाद में हिंदू रहते हैं। हर साल एमए जिन्ना मार्ग से गणपति का जुलूस निकलता है, लेकिन अब तक कभी भी दो समुदायों के लोगों के बीच टकराव नहीं हुआ। भारत-पाकिस्तान में जब भी तनाव का माहौल होता है, इसका कोई असर यहां नहीं होता। यहां मुस्लिम परिवार भी इस उत्सव में शामिल होते हैं।