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यूनीसेफ: करीब 17 करोड़ बच्चे एक साल तक स्कूली शिक्षा से रह गए वंचित

Thu, 04 Mar 2021 01:11 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 04 Mar 2021 01:11 AM IST
सार

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी का विकराल रूप शुरू हुए जैसे-जैसे एक वर्ष पूरा हो रहा है, हमें, स्वतः यह ध्यान आ रहा है कि दुनिया भर में तालाबंदियों और पाबंदियों ने कितना बड़ा और गंभीर शिक्षा संकट उत्पन्न कर दिया है।

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more than 17 crore schoolchildren deprived from education for one year due to COVID 19 lockdowns
करीब 17 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा से रह गए वंचित - फोटो : news.un.org

विस्तार

यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हैनरिएटा फोर ने बुधवार को ये बात कही है। यूनीसेफ प्रमुख ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हर दिन बीतने के साथ, बच्चों से स्कूलों में निजी अनुभवों के साथ शिक्षा हासिल करने के अवसर और भी अधिक दूर होते और पीछे छूटते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा वंचित हालात में रहने वाले व हाशिए पर धकेल दिए गए बच्चों को सबसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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यूनीसेफ के अनुसार, मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक जिन 14 देशों में स्कूल बंद रहे उनमें से 9 देश लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में हैं जहां लगभग 10 करोड़ स्कूली बच्चे प्रभावित हुए हैं। इन देशों में से पनामा में स्कूल लगभग पूरे समय ही बंद रहे। उसके बाद अल सल्वाडोर, बांग्लादेश और बोलिविया का स्थान रहा।
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संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इसके अतिरिक्त लगभग 21 करोड़ 40 लाख बच्चों ने निजी अनुभव के साथ शिक्षा हासिल करने के तीन-चौथाई से भी अधिक अवसर गंवा दिए। ये संख्या, हर सात स्कूली बच्चों में से एक बच्चे के बराबर है।
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लगभग 88 करोड़ 80 लाख बच्चों को उनके स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद होने के कारण अपनी स्कूली शिक्षा में व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल खुलने को प्राथमिकता मिले
यूनीसेफ का कहना है कि स्कूल बंद होने से बच्चों की शिक्षा और उनके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य व बेहतरी पर गंभीर असर पड़ा है। वंचित हालात में रहने वाले बच्चे और जिन्हें दूरस्थ साधनों व उपकरणों के माध्यम से शिक्षा हासिल करने के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, उनका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। क्योंकि यही बच्चे दोबारा कभी स्कूली शिक्षा में वापस नहीं लौट पाने के हालात का सबसे अधिक सामना कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन बच्चों को बाल विवाह या बाल श्रम में धकेल दिए जाने का भी बहुत जोखिम है।

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