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भारत की अंतरिक्ष में छलांग लेकिन पाकिस्तान का क्या है हाल?

Thu, 28 Mar 2019 12:17 PM IST
Priyesh Mishra बीबीसी हिंदी, इस्लामाबाद
बीबीसी हिंदी, इस्लामाबाद Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 28 Mar 2019 12:17 PM IST
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Mission Shakti and Pakistani missile research and development program
बैलिस्टिक मिसाइल (प्रतीकात्मक) - फोटो : Social Media
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को घोषणा की कि भारत अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल लॉन्च करने वाले देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एलान किया कि भारत ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक सैटेलाइट को मिसाइल से मार गिराया है।
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इस घोषणा के बाद पाकिस्तान में ऐसा माना जा रहा है कि भारत, पाकिस्तान समेत कई पड़ोसी देशों के सैटेलाइट के लिए खतरा बन गया है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने कल की घोषणा में कहा था कि यह परीक्षण किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़े बिना किया गया है।
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वहीं, पाकिस्तान का आज तक कहना रहा है कि उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस परीक्षण से भारत ने यह संदेश दे दिया है कि उनके पास अंतरिक्ष युद्ध के लिए एक हथियार आ चुका है और युद्ध अब अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है।
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इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में भी इन हथियारों को लेकर चिंता देखी जा सकती है। पाकिस्तान का कहना है कि वह अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ के सख्त खिलाफ है लेकिन पाकिस्तान इस दौड़ में शामिल होने की स्थिति में है या नहीं यह मुश्किल सवाल है।
 

1961 में पाकिस्तान की अंतरिक्ष में छलांग

Mission Shakti and Pakistani missile research and development program
एंटी सैटेलाइट मिसाइल - फोटो : सोशल मीडिया
भारत के मुक़ाबले में पाकिस्तान का अंतरिक्ष कार्यक्रम बहुत सीमित पैमाने पर है लेकिन भारत के एलान के बाद उसे इस बारे में सोचना पड़ेगा। पहले से खराब अर्थव्यवस्था का शिकार पाकिस्तान इस नए हथियारों की दौड़ के लिए क्या कुछ रकम जुटा पाएगा?

पाकिस्तान के एक विश्लेषक का कहना था कि अंतरिक्ष मनुष्यों की साझी विरासत है और हर किसी की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी कोशिशों से बचें जिससे अंतरिक्ष में फौजी सरगर्मियां बढ़ें।

उनका कहना है, "हम समझते हैं कि अंतरिक्ष से संबंधित संयुक्त राष्ट्र में उन कमजोरियों को दूर किया जाए जिनसे इस बात को पुष्ट किया जाए कि कोई भी वहां पर शांति की सरगर्मियों और अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल को खतरे में न डाला जा सके।"

पांच सैटेलाइट पहुंचाने की योजना

यही संगठन चीन की मदद से अब तक कई सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है। सूपरको के मुताबिक, पाकिस्तान की 2011 और 2040 के बीच पांच जिओ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने की योजना है। इस योजना को तत्कालीन प्रधानमंत्री सैयद यूसुफ रजा गिलानी ने मंजूरी दी थी।
 

भारत से पहले शुरू हुआ पाकिस्तान का अंतरिक्ष कार्यक्रम

Mission Shakti and Pakistani missile research and development program
अग्नि 4 मिसाइल
पाकिस्तान ने अपना अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम 1961 में शुरू किया था. इस कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान स्पेस एंड अपर एटमॉस्फ़ेयर रिसर्च कमिशन (सूपरको) की शुरुआत की गई जिसका आज भी नारा 'शांतिपूर्ण' मकसद के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इन सैटेलाइटों का उद्देश्य भू-विज्ञान, पर्यावरण, संचार और कृषि क्षेत्र में खोज करना है। विश्लेषकों का मानना है कि इन सैटेलाइटों को जानकारी इकट्ठा करने के अलावा फौजी उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक अंतरिक्ष में न तो कोई हथियार भेजे हैं और न ही अंतरिक्ष में मार करने वाली कोई मिसाइल बनाई।

इसीलिए भारत के इस परीक्षण के बाद जब पाकिस्तान ने अपना विरोध जताया तो साहित्यिक हवाला देते हुए कहा कि 1605 में लिखे गए एक उपन्यास डॉन कोसोट में एक व्यक्ति काल्पनिक दुश्मनों के खिलाफ लड़ता रहता है।

भारत के खिलाफ मोर्चा बनाने की तैयारी

Mission Shakti and Pakistani missile research and development program
missile
पाकिस्तान के बयान में भारत का जिक्र नहीं किया गया है लेकिन निशाना वही था लेकिन ये स्थिति कब तक ऐसी रह सकती है यह कहना मुश्किल है। पाकिस्तानी प्रवक्ता का कहना था कि उन्हें उम्मीद है कि वह देश जिन्होंने पहले इन सबको लेकर चिंताएं जारी की थीं वह अब अंतरिक्ष में फौजी खतरों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र में एक मुहिम तैयार करने के लिए एकसाथ आएंगे।

अंतरिक्ष में जंगी तैयारी जमीन पर सेना के लिए अहम किरदार अदा कर सकती है और विश्लेषकों के मुताबिक सैन्य संतुलन को खराब कर सकती है।

ऐसे में पाकिस्तान को ज्यादा पीछे रहना शायद कबूल न हो। पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों का मानना है कि भारत की अंतरिक्ष में जंग की तैयारी का लक्ष्य पाकिस्तान से ज्यादा चीन है लेकिन पाकिस्तान एक 'दुश्मन पड़ोसी' की इस क्षमता को यकीनन नजरअंदाज नहीं कर सकता है।
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