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नेपाल में चीन के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन, जिनपिंग के पुतले जलाए

Wed, 13 Nov 2019 05:06 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 13 Nov 2019 05:06 AM IST
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Massive protest against China in Nepal, burning effigies of Jinping
नेपाल में चीन के खिलाफ प्रदर्शन - फोटो : ANI

चीन की विस्तारवादी नीतियों से नेपाल जैसे उसके मित्र देश भी काफी परेशान हैं। वह नेपाल में अवैध रूप से जमीन कब्जा करने में लगा हुआ है। नेपाल में बढ़ते चीनी दखल और उसकी विस्तारवादी नीति का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है। सोमवार को कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पुतले जलाए। प्रदर्शनकारियों ने ‘चीन वापस जाओ’ के नारे लगाए और नेपाल की हड़पी 36 हेक्टेयर जमीन वापस करने की मांग की।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के सपतारी, बरदिया और कपिलवस्तु जिलों में सोमवार को चीन विरोधी प्रदर्शन हुए। इस दौरान लोगों के हाथ में चीन विरोधी पोस्टर और बैनर थे। वे चीन के खिलाफ नारे लगा रहे थे। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के पुतले भी जलाए।
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नेपाल की जमीन कब्जा करने को लेकर चीन के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा है। दरअसल, सर्वे डिपार्टमेंट की हालिया रिपोर्ट के बाद नेपाल में चीन विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने सीमावर्ती इलाकों में नेपाल की 36 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नेपाल अपनी सैकड़ों हेक्टेयर भूमि चीन के हाथों खो देगा।
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इन जगहों पर बीजिंग ने हड़पी जमीनें

सर्वे डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, हामला जिले में भगदारे नदी के पास करीब 6 हेक्टेयर जमीन पर अब चीन का कब्जा है। करनाली जिले में भी बीजिंग ने चार हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया हुआ है, जिसे चीन अब तिब्बत का हिस्सा बता रहा है। इसी तरह संजेन नदी और जाम्भू खोला में 6 हेक्टेयर नेपाली जमीन को भी दक्षिण तिब्बत में दिखाया गया है। संखूवसाबा में नौ हेक्टेयर नेपाली भूमि को अपने कब्जे में लेकर चीन ने सड़कों का निर्माण कराया है।

 
पिछले महीने आए थे चीनी राष्ट्रपति

चीन पिछले कुछ समय से कई देशों में भारी निवेश कर रहा है। नेपाल में भी अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लिए चीन ने यहां बड़ा भारी निवेश किया है, जिससे भारत की चिंता बढ़ी है। पिछले महीने 12 अक्तूबर को चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग नेपाल की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। पिछले दो दशक में चीन के किसी राष्ट्रपति की नेपाल में यह पहली यात्रा थी। इस दौरान दोनों पक्ष में कई करार भी हुए। 

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