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March For Australia: आज राष्ट्रव्यापी प्रवासी विरोधी रैली 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया', भारतीय समुदाय की चिंता बढ़ी

Sun, 31 Aug 2025 02:58 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न/ कैनबरा।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न/ कैनबरा। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 31 Aug 2025 02:58 AM IST
सार

ऑस्ट्रेलिया में आज राष्ट्रव्यापी प्रवासी विरोधी रैली का आयोजन किया जाना है। 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' के बैनर तले आहूत इस रैली के कारण भारतीय समुदाय में चिंता बढ़ने की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय प्रवासियों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से उनके अलग-थलग पड़ने का डर गहराने लगा है। जानिए क्या है पूरा मामला

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March For Australia Nationwide anti-immigrant rally Hindi Updates  Protest concerning Indian communities
मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया रैली के दौरान प्रवासियों का विरोध होगा (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी विरोधी प्रदर्शनों का स्वर तेज होने लगा है। आज यानी रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ नाम से राष्ट्रव्यापी रैली आहूत की गई है। इस रैली के आयोजकों का कहना है कि वे असीमित प्रवासन और कमजोर नेतृत्व के खिलाफ एकजुट हुए हैं। रैली के कारण भारतीय समेत अन्य प्रवासी समुदायों में गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल होने की खबरें सामने आई हैं। ऑस्ट्रेलिया को लंबे समय से एक बहुसांस्कृतिक देश माना जाता रहा है, जहां 136 देशों से आए लोग रहते और काम करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में प्रवासियों के खिलाफ आयोजित हो रहे छोटे-छोटे प्रदर्शनों ने सामाजिक सौहार्द पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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केवल ऑस्ट्रेलियाई झंडे का इस्तेमाल, विदेशी झंडों पर रोक
मेलबर्न, सिडनी, कैनबरा, ब्रिसबेन, पर्थ, एडिलेड, डार्विन और होबार्ट जैसे शहरों में विरोध-प्रदर्शन पहले ही हो चुके हैं। आयोजकों ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान केवल ऑस्ट्रेलियाई झंडा ही लहराया जाएगा और विदेशी झंडों पर रोक रहेगी। यह घोषणा भारतीय समुदाय समेत कई प्रवासी समूहों के लिए चिंता का कारण बनी है। उनका मानना है कि इससे उनके ‘अलग-थलग’ पड़ने का डर और गहरा हो गया है।
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भारतीय समुदाय असुरक्षा की छाया में जी रहा
मेलबर्न स्थित वरिष्ठ पत्रकार थिरुवल्लम भासी ने कहा, भारतीय समुदाय असुरक्षा की छाया में जी रहा है। आयोजकों की यह शर्त कि विदेशी झंडे नहीं होंगे, प्रवासियों को लेकर नकारात्मक संदेश देती है। उन्होंने आगे कहा कि सिख समुदाय के नेताओं ने अपने सदस्यों से अपील की है कि वे प्रदर्शन के दिन घरों से बाहर न निकलें। इस सलाह ने भी समुदाय के भीतर भय और बेचैनी को और बढ़ा दिया है।
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सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाया, तो प्रवासियों का भरोसा टूट सकता है
प्रवासी समुदाय की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस देश को उन्होंने अपना घर बनाया, वहां वे सुरक्षित क्यों महसूस नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो प्रवासियों का भरोसा टूट सकता है। ऑस्ट्रेलिया की छवि हमेशा एक बहुसांस्कृतिक और समावेशी राष्ट्र की रही है। ऐसे में प्रवासियों का असुरक्षित महसूस करना न केवल सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है, बल्कि इससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हो सकती है।

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