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नेपाल के निजी स्कूलों में मंडारिन भाषा पढ़ाना अनिवार्य, चीन देगा टीचरों को सैलरी

Sun, 16 Jun 2019 05:31 AM IST
Avdhesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 16 Jun 2019 05:31 AM IST
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Mandirin language mandatory in private schools in Nepal
नेपाल-चीन रिश्ते
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में चीन लगातार अपनी दखल बढ़ा रहा है। बड़े पैमाने पर निवेश के बाद अब चीन अपनी मंडारिन भाषा को बढ़ावा देने के लिए नेपाल के प्राइवेट स्कूलों को लालच दे रहा है। इसके बाद नेपाल के कई प्राइवेट स्कूलों ने अपने यहां छात्रों को मंडारिन भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया है। चीन बदले में मंडारिन पढ़ाने वाले शिक्षकों को सैलरी देगा। हालांकि, इस मामले पर नेपाल सरकार का कहना है कि स्कूलों के पास किसी विषय को अनिवार्य करने का अधिकार नहीं है। 
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला चीन सरकार के उस प्रस्ताव के बाद लिया गया, जिसमें मंडारिन के शिक्षकों का वेतन काठमांडू स्थित चीनी दूतावास द्वारा दिए जाने की बात कही गई थी। नेपाल के कई बड़े प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपल और स्टाफ ने मीडिया को बताया कि चीनी भाषा (मंडारिन) पहले ही स्कूलों में पढ़ाई जाती है। मंडारिन के शिक्षकों की सैलरी काठमांडू में चीनी दूतावास से दी जाती है। एलआरआई स्कूल के संस्थापक शिवराज पंत ने कहा, ‘पोखरा, धुलीखेल और देश के कुछ हिस्सों में मौजूद निजी स्कूलों में भी मंडारिन को छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।’ 
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वहीं, यूनाइटेड स्कूल के प्रिंसिपल कुलदीप एन ने बताया कि हमने दो साल पहले ही मंडारिन को अनिवार्य विषय के तौर पर लागू कर दिया था। चीनी दूतावास ने हमें इसके लिए मुफ्त में शिक्षक मुहैया कराए जाने की बात कही थी। शुवातारा स्कूल के प्रिंसिपल के. तिमसिना ने कहा, ‘हम मानते हैं कि बच्चों को भी अपनी पसंद बताने की अनुमति मिलनी चाहिए। यदि कोई जापानी या जर्मन पढ़ाना चाहे तो हम उनका भी स्वागत ही करेंगे।’
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सरकार तय करती है किस विषय को करना है अनिवार्य

नेपाल में स्कूलों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा सरकार के पाठ्यक्रम विकास केंद्र (सीडीसी) के पास है। जो प्राइवेट स्कूल मंडारिन पढ़ा रहे हैं, सीडीसी को इसकी जानकारी भी है। स्कूलों ने मंडारिन को अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल किया, क्योंकि इसके टीचर मुफ्त में मिल जाते हैं। सरकारी पाठ्यक्रम विभाग के सूचना अधिकारी गणेश प्रसाद भट्टारी ने कहा, ‘स्कूलों को विदेशी भाषा पढ़ाने की अनुमति है। मगर वे किसी भी विषय को छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं कर सकते हैं। यदि कोई विषय अनिवार्य करना भी है तो इसका निर्णय सरकार करती है। यह स्कूलों का अधिकार नहीं है।’
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