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Belarus: राष्ट्रपति चुनाव में लुकाशेंको लगातार सातवीं बार जीत की ओर; विपक्ष ने लगाया धांधली और दिखावे का आरोप

Sun, 26 Jan 2025 12:59 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: बशु जैन Updated Sun, 26 Jan 2025 12:59 PM IST
सार

बेलारूस में मंगलवार से राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में लगातार सातवीं बार राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की जीत नजर आ रही है। लुकाशेंको 1994 से इस पद पर हैं।  जबकि विपक्ष 2020 की तरह मतदान में धांधली की आशंका जता रहा है।

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Lukashenko victory in the presidential election for the seventh time; Opposition accused of rigging
बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको - फोटो : सोशल मीडिया/President of the Republic of Belarus

विस्तार

बेलारूस में हुए राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको लगातार सातवीं चुनाव जीतने को तैयार हैं। पोस्टरों में नजर आ रही उनकी मुस्कुराती तस्वीर और नीचे लिखा जरूरत है वाक्य, लुकाशेंको के आत्मविश्वास को बढ़ा रहा है। वहीं विपक्ष ने इसे 2020 के चुनाव की तरह दिखावा करार दिया है। साथ ही मतदान में धांधली की आशंका जताई है। 

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बेलारूस में मंगलवार से राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में लगातार सातवीं बार राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की जीत नजर आ रही है। लुकाशेंको 1994 से इस पद पर हैं।  जबकि विपक्ष 2020 की तरह मतदान में धांधली की आशंका जता रहा है। दरअसल 2020 में जब देश में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे तो लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान में धांधली की आशंका को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे। इस दौरान 65,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, हजारों लोगों को पीटा गया। इसके बाद पश्चिमी देशों ने बेलारूस की निंदा की और प्रतिबंध लगाए। 
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इसलिए बदला चुनाव का समय
बेलारूस के राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि लुकाशेंको को आर्थिक संकटों और यूक्रेन में लड़ाई के बीच एक बार फिर विरोध प्रदर्शन को लेकर डर था। इसलिए उन्होंने अगस्त के बजाय जनवरी में मतदान की तारीख तय की। क्योंकि इस वक्त बहुत कम लोग सड़कों पर होंगे और उन्हें केवल सांकेतिक विरोध का सामना करना पड़ेगा। 
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बेलारूसी राजनीतिक विश्लेषक वालेरी कार्बालेविच का कहना है कि 2020 के विरोध प्रदर्शनों का आघात इतना गहरा था कि लुकाशेंको ने इस बार जोखिम न लेने का फैसला किया और सबसे विश्वसनीय विकल्प चुना। मतदान अब चुनाव की तुलना में सत्ता बनाए रखने के लिए एक विशेष ऑपरेशन की तरह लग रहा है।

विपक्ष कर रहा विरोध 
चुनाव में राष्ट्रपति लुकाशेंको की संभावित जीत को लेकर विपक्ष हमलावर है। बेलारूस से निर्वासित की गईं विपक्षी नेता स्वियातलाना त्सिखानौस्काया का कहना है कि चुनाव के नाम पर सिर्फ तमाशा हो रहा है। मतदाताओं को मतपत्र पर सभी के नाम काट देने चाहिए वैश्विक नेताओं को ऐसे देश के परिणाम को मान्यता नहीं देनी चाहिए जहां सभी स्वतंत्र मीडिया और विपक्षी दल नष्ट कर दिए गए हैं और जेलें राजनीतिक कैदियों से भर गई हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बिना विकल्प के मतदान का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे दमन और भी क्रूर होता जा रहा है। लेकिन लुकाशेंको ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे लाखों लोग अभी भी उनके महल के बाहर खड़े हैं। यूरोपीय संसद ने बुधवार को यूरोपीय संघ से चुनाव के परिणाम को अस्वीकार करने का आग्रह किया।

तीन दिन में 27 फीसदी मतदाताओं ने डाले वोट, धांधली की आशंका
केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक बेलारूस में 6.8 मिलियन मतदाता हैं। इसमें से करीब पांच लाख लोग बेलारूस छोड़ चुके हैं। विपक्ष का कहना है कि मंगलवार से शुरू हुए मतदान में अब तक 27 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले हैं। मगर मतदान में धांधली होगी, क्योंकि मतपेटियों की सुरक्षा में अनियमितता बरती जाएगी। हालांकि चुनाव आयोग और पुलिस मतदान में धांधली रोकने की बात कह रहे हैं। 

प्रतिद्वंदी भी दे रहे साथ
बेलारूस में लुकाशेंको का साथ उनके प्रतिद्वंदी भी दे रहे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार सर्गेई सिरानकोव का कहना है कि मैं लुकाशेंको के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा हूं और मैं उनके अगुआ के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हूं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ लेबर एंड जस्टिस के प्रमुख उम्मीदवार अलेक्जेंडर खिजन्याक ने भी चुनाव में अशांति की पुनरावृत्ति को रोकने की कसम खाई है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख ओलेग गेदुकेविच ने 2020 में लुकाशेंको का समर्थन किया था। अब भी राष्ट्रपति के समर्थन में हैं। चौथी चुनौती देने वाली हना कनापत्स्काया का कहना है कि वह लुकाशेंको का एकमात्र लोकतांत्रिक विकल्प हैं। उन्होंने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए पैरवी करने का वादा किया लेकिन समर्थकों को अत्यधिक प्रदर्शन के खिलाफ चेतावनी दी। 


रूस का मिल रहा साथ
बेलारूस में लुकाशेंको इसलिए भी सत्ता पर काबिज हैं क्योंकि उन पर रूस का हाथ है। उन्होंने 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण करने के लिए मॉस्को को अपने क्षेत्र का उपयोग करने दिया। रूस के कुछ सामरिक परमाणु हथियारों को भी अपने यहां रखा। हालांकि वे रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति और सुरक्षा की बात करते रहे। उन्होंने यूक्रेन को घेरते हुए यह भी कहा कि यूक्रेन जैसे लोकतंत्र की तुलना में बेलारूस जैसी तानाशाही बेहतर है।  इसके अलावा जब पिछले चुनाव में लुकाशेंको के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए तो पुतिन के समर्थन से उनको काफी मदद मिली।
 

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