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UK: लंदन के स्कूल में आठ साल के छात्र के माथे पर तिलक को लेकर विवाद, माता-पिता ने लगाया धार्मिक भेदभाव का आरोप
Wed, 21 Jan 2026 04:11 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 21 Jan 2026 04:11 AM IST
सार
UK: लंदन के एक स्कूल में आठ साल के बच्चे के माथे पर तिलक को लेकर उठे विवाद ने धार्मिक भेदभाव पर बहस छेड़ दी है। एक संगठन ने इसे हिंदू आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए स्कूल पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया, जबकि स्कूल ने अपनी नीति का हवाला देकर भेदभाव से इनकार किया। पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
लंदन के एक स्कूल में एक आठ साल के बच्चे के माथे पर टिलक को लेकर विवाद हो गया। प्रवासियों के अधिकारों की पैरवी करने वाले एक संगठन इनसाइट यूके ने कहा कि बच्चे और उसके परिवार को इससे बहुत दुख और परेशानी हुई। संगठन ने बताया कि इस घटना के बाद कई हिंदू माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल से निकालना पड़ा। उन्होंने स्कूल पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया।
स्कूल ने इन आरोपों पर क्या कहा?
हालांकि, विकर्स ग्रीन पब्लिक स्कूल ने इन आरोपों को खारिज किया। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि उनका स्कूल विविध और समावेशी है यहां यहां पचास से ज्यादा भाषाओं के बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें कई हिंदू छात्र भी हैं।
ये भी पढ़ें: US: फिनलैंड से अमेरिका खरीद रहा सबसे आधुनिक आइसब्रेकर, ट्रंप की आर्कटिक में पहुंच बढ़ाने की रणनीति
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संगठन ने क्या कहा?
इनसाइट यूके के प्रवक्ता ने कहा, तिलक-चंदन कोई सजावटी या सांस्कृतिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह कई हिंदुओं के लिए धार्मिक अनुष्ठान का अभिन्न हिस्सा है। किसी बच्चे को अपनी आस्था निभाने से रोकना या इसे करने पर उन्हें शर्मिंदा या भयभीत महसूस कराना आधुनिक, बहु सांस्कृतिक ब्रिटेन में पूरी तरह अस्वीकार्य है।
संगठन ने आगे कहा, दुनियाभर में एक अरब से अधिक हिंदुओं के लिए तिलक-चंदन, बिंदी, टिक्का, त्रिपुंड आदि धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति के अभिन्न अंग हैं। शिक्षण संस्थान में इन प्रथाओं को छोटा दिखाना या गलत तरीके से पेश करना धर्म के बारे में ज्ञान की कमी को दर्शाता है। समूह की ओर से संकलित रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल के प्रिंसिपल प्रधानाध्यापक और गवर्नर बातचीत के दौरान 'सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता का अभाव दिखाते रहे। समूह ने स्कूल से नीतियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की समीक्षा करने का अनुरोध भी किया, ताकि बराबरी और सुरक्षा के कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
ये भी पढ़ें: वेनेजुएला पर नरमी, ग्रीनलैंड-नाटो पर सख्ती; ट्रंप सरकार 2.0 के एक साल पूरा होने पर नए संकेत, बताया अद्भुत
मामले पर स्कूल के प्रवक्ता ने क्या कहा?
स्कूल के प्रवक्ता ने कहा कि स्कूल में पहले से नियम है कि बच्चे शरीर पर कोई भी स्पष्ट दिखने वाला निशान स्कूल में न पहनें, चाहे वह धर्म से जुड़ा हो। इसी नियम के तहत जब एक बच्चा माथे पर तिलक लगाकर आया, तो स्कूल ने उसके माता-पिता को बुलाकर उनसे शांति से बात की और वजह समझने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि स्कूल ने परिवार की धार्मिक भावना का सम्मान करते हुए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की और सुझाव दिया कि बच्चा तिलक शरीर के किसी ऐसे हिस्से पर लगाए, जो ज्यादा दिखाई न दे। लेकिन बच्चे के माता-पिता ने इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया।
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स्कूल ने इन आरोपों पर क्या कहा?
हालांकि, विकर्स ग्रीन पब्लिक स्कूल ने इन आरोपों को खारिज किया। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि उनका स्कूल विविध और समावेशी है यहां यहां पचास से ज्यादा भाषाओं के बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें कई हिंदू छात्र भी हैं।
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संगठन ने क्या कहा?
इनसाइट यूके के प्रवक्ता ने कहा, तिलक-चंदन कोई सजावटी या सांस्कृतिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह कई हिंदुओं के लिए धार्मिक अनुष्ठान का अभिन्न हिस्सा है। किसी बच्चे को अपनी आस्था निभाने से रोकना या इसे करने पर उन्हें शर्मिंदा या भयभीत महसूस कराना आधुनिक, बहु सांस्कृतिक ब्रिटेन में पूरी तरह अस्वीकार्य है।
संगठन ने आगे कहा, दुनियाभर में एक अरब से अधिक हिंदुओं के लिए तिलक-चंदन, बिंदी, टिक्का, त्रिपुंड आदि धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति के अभिन्न अंग हैं। शिक्षण संस्थान में इन प्रथाओं को छोटा दिखाना या गलत तरीके से पेश करना धर्म के बारे में ज्ञान की कमी को दर्शाता है। समूह की ओर से संकलित रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल के प्रिंसिपल प्रधानाध्यापक और गवर्नर बातचीत के दौरान 'सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता का अभाव दिखाते रहे। समूह ने स्कूल से नीतियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की समीक्षा करने का अनुरोध भी किया, ताकि बराबरी और सुरक्षा के कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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मामले पर स्कूल के प्रवक्ता ने क्या कहा?
स्कूल के प्रवक्ता ने कहा कि स्कूल में पहले से नियम है कि बच्चे शरीर पर कोई भी स्पष्ट दिखने वाला निशान स्कूल में न पहनें, चाहे वह धर्म से जुड़ा हो। इसी नियम के तहत जब एक बच्चा माथे पर तिलक लगाकर आया, तो स्कूल ने उसके माता-पिता को बुलाकर उनसे शांति से बात की और वजह समझने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि स्कूल ने परिवार की धार्मिक भावना का सम्मान करते हुए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की और सुझाव दिया कि बच्चा तिलक शरीर के किसी ऐसे हिस्से पर लगाए, जो ज्यादा दिखाई न दे। लेकिन बच्चे के माता-पिता ने इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया।
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