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स्वास्थ्य : अमेरिका में खाने से एलर्जी पर बदला कानून, प्रतिबंधित सूची में तिल शामिल
Wed, 28 Apr 2021 06:20 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम, न्यूयॉर्क
अमर उजाला रिसर्च टीम, न्यूयॉर्क
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 28 Apr 2021 06:20 AM IST
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सार
- सरकार का दावा- खाद्य पदार्थों से होने वाली 90 फीसदी एलर्जी इन्हीं नौ उत्पादों तिल, दूध, अंडे, मछली, शेलफिश, मूंगफली, गेहूं, सोयाबीन और ट्री-नट से है
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विस्तार
अमेरिका में अब तिल को एलर्जी करने वाले खाद्य पदार्थों की सूची में शामिल कर लिया गया है। कंपनियों को उत्पाद में तिल होने और इससे एलर्जी की चेतावनी देनी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से इससे जुड़े फास्टर एक्ट पर दस्तखत कर दिए हैं।
तिल को मिलाकर अमेरिका में अब तक नौ खाद्य पदार्थों को एलर्जी का कारण मानते हुए सूचीबद्ध किया जा चुका है। अगर इन्हें किसी उत्पाद में मिलाया जाता है, तो इनके खतरे के बारे में कंपनी को जानकारी देनी होगी।
बाकी आठ खाद्य पदार्थों में दूध, अंडे, मछली, शेलफिश, मूंगफली, गेहूं, सोयाबीन और ट्री-नट शामिल है। अमेरिकी सरकार के अनुसार यही नौ खाद्य पदार्थ देश में खाद्य वस्तुओं से होने वाली 90 फीसदी एलर्जी के जिम्मेदार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून बदलने के बाद तिल की एलर्जी के शिकार लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब तक यह सूची में शामिल नहीं था, इससे एलर्जी के शिकार लोग अनजान में तिल के बने उत्पाद का लेते थे और अस्पाताल जाना पड़ता था।
2023 से लेबल पर लिखना होगा
फास्टर एक्ट के तहत उत्पादकों को 20 महीने का समय दिया है। उन्हें एक जनवरी 2023 से उत्पाद में तिल होने और इससे एलर्जी की चेतावनी लिखनी होगी। हालांकि कुछ कंपनियों ने अभी से यह जानकारी देना शुरू कर दिया। दरअसल खाद्य पदार्थों की एलर्जी से संबंधित यह कानून 2004 में अस्तित्व में आया था। अब सामने आया कि तिल से भी एलर्जी हो रही है।
भारतीय विशेषज्ञ कहते हैं...इसके खास कारण नहीं
हर्बल विशेषज्ञ और वैज्ञानिक डॉ. दीपक आचार्य कहते हैं कि तिल से एलर्जी के खास कारण नहीं होते हैं। कई लोगों को अलग-अलग चीजों से एलर्जी होती है, किसी को किसी कंपाउंड से एलर्जी हो सकती है। तिल अमेरिका के ग्रास स्टेटस में शामिल है। इसमें लिगनन, ओमेगा थ्री और विटामिन भरपूर होते हैं।
अमेरिका में 11 लाख लोगों को एलर्जी
2019 में हुए अध्ययन के अनुसार अमेरिका में लगभग 11 लाख लोग खाद्य पदार्थों से एलर्जी के शिकार हैं। इनमें करीब 25 फीसदी तिल की एलर्जी के शिकार हैं। इनमें पांच साल से छोटे बच्चे भी हैं।