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एचसीक्यू ः डब्ल्यूएचओ ने बंद किया था ट्रायल, लैंसेट ने शोध वापस लिया, संपादक ने मांगी माफी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Rohit Ojha Updated Sat, 06 Jun 2020 04:24 PM IST
Hydroxychloroquine Tablet
Hydroxychloroquine Tablet - फोटो : Social Media
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कोरोना वायरस इलाज में कारगर मानी जा रही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) दवा पर सवाल उठाने और उसे जानलेवा बताने वाली शोध को लैंसेट पत्रिका ने वापस ले लिया है। पत्रिका की रिपोर्ट के बाद ही डब्ल्यूएचओ ने दुनिया भर में एचसीक्यू के ट्रायल पर प्रतिबंध लगा दिया था। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन ने भी शोध वापस लिया था।

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लैंसेट में 22 मई को प्रकाशित शोध में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉक्टर संदीप मेहरा ने छह महाद्वीपों के 1,000 मरीजों पर अध्ययन का दावा करते हुए कहा था कि एचसीक्यू बेअसर है। फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद लैंसेट ने कहा है शोधकर्ताओं को कच्चे आंकड़े का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। क्योंकि आंकड़ा उपलब्ध कराने वाली कंपनी सर्जीस्फेयर के साथ इस तरह का कोई समझौता नहीं है। यह तीसरी पार्टी को मुहैया भी नहीं कराया जा सकता है।


इस आधार पर वैज्ञानिकों ने पत्रिका से शोध को हटाने की मांग की है। साथ ही पत्रिका के संपादक रिचर्ड हार्टन ने पाठकों से माफी भी मांगी है। 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित शोध पर सवाल उठाए थे। पत्रिका के संपादक रिचर्ड होटर्न को पत्र लिखकर आपत्ति जताई। पत्र में वैज्ञानिकों ने कहा था कि 14 अप्रैल तक भर्ती हजारों मरीजों पर अध्ययन की बात कही गई थी। यानी शोधकर्ताओं ने पांच सप्ताह के भीतर शोध प्रकाशित होने के लिए भेज दिया जो नामुमकिन है। इससे यह साबित होता है कि दवा के खिलाफ षड्यंत्र किया गया है। 

अस्पताल व डाटा की जानकारी नहीं

शोध पर सवाल उठाने वाले वैज्ञानिकों का आरोप था कि शोधकर्ता ने किसी भी अस्पताल का जिक्र नहीं किया, जहां से मरीजों का डाटा मिला है। यहां तक कि उस देश का नाम तक नहीं है, जहां से यह आंकड़े जुटाए गए। ड्यूक क्लीनिक रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रमुख डॉ. एड्रियन हेरानडेज ने कहा था कि शोध में बहुत घालमेल है। कहा गया कि 671 अस्पतालों से डाटा जुटाया गया, लेकिन किसी को यह नहीं पता है कि वह अस्पताल हैं भी या नहीं। 

हम दवा का ट्रायल जारी रखेंगे

सीएसआईआर इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स के ट्रांसलेशनल रिसर्च इन लंग डिजीज के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा कि लाइसेंस ने शोध को वापस लिया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि दवा के प्रयोग से मौत की बात गलत है। 


हम दवा का ट्रायल तब तक जारी रखेंगे जब तक हमें पूरी जानकारी नहीं मिल जाती है। डॉक्टर अग्रवाल ने कहा कि सबसे बड़ी गलती यह है कि शोधकर्ताओं ने वह शोध पत्र प्रकाशित होने के लिए कह दिया जिसका आंकड़ा वह देख नहीं सकते। पत्रिका और शोधकर्ताओं को तब तक ऐसे शोध पर विश्वास नहीं करना होगा जब तक आंकड़ा सामने नहीं आ जाता। 

ऑक्सफोर्ड ने एचसीक्यू का ट्रायल रोका

लंदन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के लिए मलेरियारोधी दवा एचसीक्यू का परीक्षण शुक्रवार को रोक दिया। अध्ययन के सह प्रमुख ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्टिन लांद्रे ने बताया कि एचसीक्यू कोरोना के इलाज में काम नहीं करती और यह उपयोगी नहीं पाई गई है।

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