फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Know all about yellow vest protest of France

फ्रांस में 'यलो वेस्ट मूवमेंट', सरकार के विरोध में हजारों लोग, जानें क्या है पूरा मामला

Sun, 09 Dec 2018 04:31 PM IST
Shilpa Thakur वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sun, 09 Dec 2018 04:31 PM IST
विज्ञापन
Know all about yellow vest protest of France
यलो वेस्ट मूवमेंट

फ्रांस में इस वक्त हालात कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। दुनिया में सिटी ऑफ लव के नाम से मशहूर राजधानी पेरिस में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। दंगे होने की आशंका के मद्देनजर पेरिस को बंद कर दिया गया है। अभी तक कई लोगों की मौत की भी खबर है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। घायलों में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। 


loader

फ्रांस में इस वक्त हालात कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। दुनिया में सिटी ऑफ लव के नाम से मशहूर राजधानी पेरिस में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। दंगे होने की आशंका के मद्देनजर पेरिस को बंद कर दिया गया है। अभी तक कई लोगों की मौत की भी खबर है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। घायलों में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। 

माना जा रहा है कि ऐसे दंगे फ्रांस में बीते 50 सालों में नहीं हुए हैं। आखरी बार साल 1968 में ऐसे दंगे हुए थे। ये प्रदर्शन 17 नवंबर से शुरू हुए थे और अभी भी चल रहे हैं। प्रदर्शन में न केवल आम नागरिक बल्कि फार राइट ग्रुप के लोग भी शामिल हैं। यहां चल रहे इस प्रदर्शन को "यलो वेस्ट मूवमेंट" कहा जा रहा है, चलिए आपको विस्तार से बताते हैं कि ये अभियान क्या है और इसके पीछे के सभी कारण क्या हैं।

31 हजार लोग जुड़े प्रदर्शन से

फ्रांस के आंकड़ों के मुताबिक इस आंदोलन से करीब 31 हजार लोग जुड़ चुके हैं। सरकार के खिलाफ नारे लगाने वाले इन लोगों ने न केवल रैलियां निकाली बल्कि कई वाहनों में भी आग लगाई है। लोगों ने सरकारी इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया है। अभी तक 1700 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। अभियान शुरू पैरिस से हुआ था और अब पूरे देश में फैल चुका है। कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों में करीब 8 हजार लोग तो पैरिस से ही हैं। इस प्रदर्शन का कोई नेता नहीं है। ये एक तरह का लीडरलेस यानी बिना नेता वाला आंदोलन है।

शहर में बंद, प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति मैक्रों का अतापता नहीं

यलो वेस्ट मूवमेंट
यलो वेस्ट मूवमेंट
शहर में दुकानें, म्यूजियम, एफिल टावर और मेट्रो स्टेशन भी बंद रहेंगे। वहीं, शीर्ष टीमों के फुटबॉल मैच और म्यूजिक शो रद्द कर दिए गए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए 8000 की संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है।

फ्रांस की राजधानी में पिछले सप्ताहांत दशकों के सबसे विकट दंगे हुए थे जिससे देश हिल गया था। राष्ट्रपति मैक्रों सरकार गहरे संकट में घिर गई है। पेरिस बंद जैसी घटनाओं के बीच राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों का कुछ अतापता नहीं है। मैक्रों उद्वेलित राष्ट्र को शांत कराने का जिम्मा एक प्रकार से सरकार पर छोड़कर पूरे सप्ताह लोगों की नजरों से गायब रहे। 

क्या है यलो वेस्ट

इस अभियान को यलो वेस्ट अभियान इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सभी प्रदर्शनकारियों ने पीले रंग की जैकेट पहनी हुई है। बता दें साल 2008 के बाद से यहां की सरकार ने वाहन चालकों को पीले रंग की जैकेट पहनना अनिवार्य किया है। ताकि रात के वक्त वह दूर से दिखाई दें और सड़क दुर्घटना न हों।  

भारत जैसे देशों में भी बढ़े दाम पर फ्रांस में प्रदर्शन क्यों

केवल फ्रांस ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है। लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि प्रदर्शन केवल फ्रांस में ही क्यों हो रहा है, दुनिया के बाकी देशों में क्यों नहीं? ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कीमतें बाकी देशों में भी बढ़ी हैं लेकिन बेहद कम गति के साथ। वहीं फ्रांस में ये दाम कई फीसदी तक बढ़ाए गए हैं। साथ ही सरकार ने जनवरी में दोबारा दाम बढ़ाने की घोषणा की है। 

लोग बता रहे सरकार की गलती

यलो वेस्ट मूवमेंट
यलो वेस्ट मूवमेंट
फ्रांस की सरकार का कहना है कि वह पर्यावरण के प्रति सजग है और पैरिस डील के तौर पर लोगों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहती है। सरकार ने लोगों से कहा है कि वह इलेक्ट्रिक गाड़ियां लें ताकि पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम हो सके। केवल इतना ही नहीं सराकार ने जनवरी 2019 में भी कीमतें बढ़ाने के लिए कहा है।

वहीं दूसरी तरफ यहां के लोगों का कहना है कि साल 2006-2008 में सरकार ने डीजल की गाड़ियां लेने को कहा था। सरकार ने कहा था कि देश में अब एंटी  प्लयूशन वाला डीजल उपलब्ध है। जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा। लोगों का कहना है कि अब सरकार कह रही है कि इलेट्रिक गाड़ियां लो और डीजल का प्रयोग न करो। जो कि गलत है। 
 

जीवनयापन में लोगों को हो रही परेशानी


फ्रांस में अफ्रीका और अन्य देशों के लोग आकर रह रहे हैं। जिसके कारण यहां की कंपनियों को सस्ता लेबर मिल रहा है और देश के लोगों को काम नहीं मिल रहा है। लोगों के बीच बेरोजगारी बढ़ रही है। गरीब और मध्यम वर्ग का देश में जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है। देश के अमीर और अमीर होते जा रहे हैं जबकि गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। इसी वजह से यहां जन्म दर में भी कमी आ रही है। यहां रहना लोगों के लिए काफी महंगा है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से मंहगाई भी बढ़ी


फ्रांस में लोग पहले ही बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं वहीं उन्हें अब महंगाई का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे की वजह है यहां एक बड़ी ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का होना। ये लोग सब्जियां और फलों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करते हैं। इन लोगों में भी कीमतें बढ़ने से काफी गुस्सा है। वहीं इससे मंहगाई भी बढ़ रही है। सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए इन ट्रकों और अन्य वाहनों का ही इस्तेमाल होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से इनकी भी लागत अब बढ़ गई है। जिससे बाकी सामान भी महंगा होता जा रहा है। लोगों को कठिन परिस्थितियों में महंगाई से लड़ना पड़ रहा है।

लोगों का सरकार पर आरोप

यलो वेस्ट मूवमेंट
यलो वेस्ट मूवमेंट
फ्रांस की जनता का मानना है कि यहां की सरकार अपने देश को लोगों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि मैक्रों की सरकार केवल अमीरों की सरकार है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आंदोलन में आम नागरिकों के अलावा फार राइट ग्रुप के लोग भी शामिल हैं। इन लोगों का मानना है कि बाहरी लोग फ्रांस में आकर वहां की संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्हें यहां आराम से रहने दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार करना चाहिए।

इसके अलावा यहां के फार राइट ग्रुप का मानना है कि सरकार को इन लोगों के आने पर पाबंदी लगानी चाहिए। उनका कहना है कि इन लोगों की जनसंख्या देश में बढ़ती जा रही है। इनके 4-5 बच्चे होते हैं। जबकि फ्रांस में जन्मदर गिर रही है। यहां के लोग ही यहां की पहचान है और ये पहचान अब खोती जा रही है।   

सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था प्रदर्शन

देश में लोगों ने प्रदर्शन करना 17 नवंबर, 2018 से शुरू किया था। लेकिन सोशल मीडिया पर आंदोलन की शुरुआत मई, 2018 में ही हो गई थी। फ्रांस के सीन-ए-मार्ने विभाग की एक महिला ने change.org नामक वेबसाइट पर ऑनलाइन पिटीशन की शुरुआत की थी। मध्य अक्तूबर तक इस ऑनलाइन पिटीशन पर 3 लाख लोगों के साइन हो चुके थे।

इसी विभाग के दो पुरुषों ने भी 17 नवंबर को एक फेसबुक इवेंट लांच किया। उन्होंने कहा कि सभी सड़कों को बंद किया जाएगा और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। विभाग के इन लोगों का कहना है कि तेल के दाम बढ़ने से ही कर में भी वृद्धि हो रही है। इसी समूह के कई वायरल वीडियो में से एक में यलो जैकेट यानी पीली जर्सी के इस्तेमाल का आइडिया दिया गया था। 

छोटे बच्चों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया

सरकार के खिलाफ छोटे बच्चों ने भी प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को फ्रांस में नई शिक्षा नीति के विरोध में 283 स्कूलों के छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान हिंसा भी हुई। पुलिस ने छात्रों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मोंटे-ला-जोली में लाइसी सेंट-एक्सपेरी के हाईस्कूल के 53 छात्रों समेत पूरे देश में 400 छात्रों को गिरफ्तार किया है। इसमें 12 साल तक के बच्चे शामिल हैं। छात्रों पर कार्रवाई करने की वजह से सरकार की काफी आलोचना हो रही है। 

राष्ट्रपति मैक्रों के इस्तीफे की मांग

इमैनुएल मैक्रों
इमैनुएल मैक्रों
सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 'यलो वेस्ट' प्रदर्शनकारियों का मुख्य नारा है, 'मैक्रों इस्तीफा दो'। लोगों का गुस्सा अपने उस नेता के लिए है जिसे वे सिर्फ 'अमीरों का नेता' मानते हैं। उनका मानना है कि मैक्रों आम जनता से दूर हैं। दरअसल, मैक्रों ने व्यापार सुधार के लिए कदम उठाए हैं और उनका मानना है कि इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को अधिक वैश्विक बनाना है। वहीं, फ्रांस के कर्मचारियों की राय इसके ठीक उलट है। वे इसे 'बर्बर' और 'अधिकारों को कमजोर करने वाला' मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा है कि वह शनिवार से पहले बातचीत नहीं करेंगे।

देश के प्रमुख पर्यटक स्थल भी बंद

दूसरी तरफ महंगाई के खिलाफ यलो वेस्ट की ओर से फिर से हिंसक प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। फ्रांस सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से एफिल टॉवर, लौवर म्यूजियम समेत देश के प्रमुख पर्यटक स्थलों को बंद कर दिया गया है। 

ब्रसेल्स में 70 लोग गिरफ्तार

फ्रांस की राजधानी पेरिस से शुरू हुआ 'यलो वेस्ट' प्रदर्शन बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स तक पहुंच गया है, जहां एहतियाती कदम उठाते हुए पुलिस ने करीब 70 लोगों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। 

इलाके में यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संसद के कार्यालय सहित कई यूरोपीय संस्थानों के भवन हैं। एहतियाती कदम उठाते हुए उन्हें सील कर दिया गया है। पुलिस ने वहां अवरोधक लगाए हैं और लोगों तथा वाहनों को जाने की इजाजत नहीं दी जा रही।

ब्रसेल्स की पुलिस प्रवक्ता इलसे वैन डे कीरे ने बताया कि एहतियाती उपायों के तहत की गई जांच के बाद करीब 70 गिरफ्तारियां की गई हैं। बेल्जा समाचार एजेंसी के मुताबिक युवा प्रदर्शनकारियों ने ब्रसेल्स को फ्लैंडर्स स्थित रेक्केम शहर से जोड़ने वाले राजमार्ग को बाधित कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed