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North Korea: किम जोंग उन का दावा- परमाणु ताकत से लैस होगी उत्तर कोरिया की नौसेना; नए युद्धपोत का किया निरीक्षण
Thu, 05 Mar 2026 08:13 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 05 Mar 2026 08:13 AM IST
सार
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने नए युद्धपोत का निरीक्षण किया और मिसाइल परीक्षण देखे। उन्होंने अपनी नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने का संकल्प लिया है। किम ने हर साल दो नए युद्धपोत बनाने का लक्ष्य रखा है।
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उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग
- फोटो : PTI
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विस्तार
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने लगातार दो दिनों तक नए युद्धपोत (डिस्ट्रॉयर) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने युद्धपोत से दागी गई क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी देखा। किम ने अपनी नौसेना को परमाणु हथियारों से और अधिक मजबूत करने का वादा किया है। सरकारी मीडिया ने गुरुवार को इस दौरे की जानकारी दी।
किम जोंग उन ने मंगलवार और बुधवार को नम्पो के पश्चिमी शिपयार्ड का दौरा किया। वहां उन्होंने 5,000 टन के युद्धपोत 'चो ह्योन' जैसी श्रेणी के तीसरे जहाज के निर्माण कार्य का जायजा लिया। किम ने कहा कि 'चो ह्योन' का विकास उनकी सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी प्रगति है। यह जहाज परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को दागने के लिए बनाया गया है। दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों का मानना है कि इस जहाज को बनाने में रूस ने मदद की है। हालांकि, कुछ लोग इसकी कार्यक्षमता पर संदेह भी जता रहे हैं।
ये भी पढ़ें: US: ट्रंप बोले- तेजी से नष्ट की जा रही ईरानी मिसाइलें-लॉन्चर, ओबामा के परमाणु समझौते को क्यों बताया बुरा सौदा?
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पिछले साल मई में इसी श्रेणी का दूसरा जहाज लॉन्चिंग के दौरान खराब हो गया था। इस नाकामी पर किम जोंग उन ने बहुत गुस्सा जाहिर किया था। उन्होंने इसे एक अपराध बताया था। उस जहाज का नाम 'कांग कोन' था, जिसे मरम्मत के बाद जून में फिर से लॉन्च किया गया। किम ने अब लक्ष्य रखा है कि अगले पांच वर्षों तक हर साल दो बड़े युद्धपोत बनाए जाएंगे। उनका पूरा ध्यान अब नौसेना की क्षमता बढ़ाने पर है। इसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाना भी शामिल है। नम्पो शिपयार्ड में बन रहा तीसरा युद्धपोत अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
किम जोंग उन ने दावा किया कि नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की कोशिशों में अच्छी प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव समुद्री सीमाओं की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा। जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया एक नई समुद्री सीमा घोषित करने की तैयारी में है। किम ने साफ कर दिया है कि वे पुरानी समुद्री सीमा (एनएलएल) को मान्यता नहीं देते हैं। इस वजह से आने वाले समय में समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।
किम ने अपनी सेना को मजबूत करने के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ते भी खुले रखे हैं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत की संभावना जताई है। हालांकि, उन्होंने शर्त रखी है कि अमेरिका को परमाणु निरस्त्रीकरण की अपनी जिद छोड़नी होगी। किम ने स्पष्ट किया कि वे अपने हथियारों का जखीरा बढ़ाना जारी रखेंगे ताकि किसी भी खतरे का सामना किया जा सके। उन्होंने दक्षिण कोरिया के प्रति भी अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। उत्तर कोरिया की इन गतिविधियों ने पूरे एशिया क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।
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किम जोंग उन ने मंगलवार और बुधवार को नम्पो के पश्चिमी शिपयार्ड का दौरा किया। वहां उन्होंने 5,000 टन के युद्धपोत 'चो ह्योन' जैसी श्रेणी के तीसरे जहाज के निर्माण कार्य का जायजा लिया। किम ने कहा कि 'चो ह्योन' का विकास उनकी सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी प्रगति है। यह जहाज परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को दागने के लिए बनाया गया है। दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों का मानना है कि इस जहाज को बनाने में रूस ने मदद की है। हालांकि, कुछ लोग इसकी कार्यक्षमता पर संदेह भी जता रहे हैं।
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पिछले साल मई में इसी श्रेणी का दूसरा जहाज लॉन्चिंग के दौरान खराब हो गया था। इस नाकामी पर किम जोंग उन ने बहुत गुस्सा जाहिर किया था। उन्होंने इसे एक अपराध बताया था। उस जहाज का नाम 'कांग कोन' था, जिसे मरम्मत के बाद जून में फिर से लॉन्च किया गया। किम ने अब लक्ष्य रखा है कि अगले पांच वर्षों तक हर साल दो बड़े युद्धपोत बनाए जाएंगे। उनका पूरा ध्यान अब नौसेना की क्षमता बढ़ाने पर है। इसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाना भी शामिल है। नम्पो शिपयार्ड में बन रहा तीसरा युद्धपोत अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
किम जोंग उन ने दावा किया कि नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की कोशिशों में अच्छी प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव समुद्री सीमाओं की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा। जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया एक नई समुद्री सीमा घोषित करने की तैयारी में है। किम ने साफ कर दिया है कि वे पुरानी समुद्री सीमा (एनएलएल) को मान्यता नहीं देते हैं। इस वजह से आने वाले समय में समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।
किम ने अपनी सेना को मजबूत करने के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ते भी खुले रखे हैं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत की संभावना जताई है। हालांकि, उन्होंने शर्त रखी है कि अमेरिका को परमाणु निरस्त्रीकरण की अपनी जिद छोड़नी होगी। किम ने स्पष्ट किया कि वे अपने हथियारों का जखीरा बढ़ाना जारी रखेंगे ताकि किसी भी खतरे का सामना किया जा सके। उन्होंने दक्षिण कोरिया के प्रति भी अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। उत्तर कोरिया की इन गतिविधियों ने पूरे एशिया क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।
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