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बांग्लादेश: 'राजनीति में आवामी लीग की वापसी को नकारने का कोई कारण नहीं'; खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी का बयान
Fri, 21 Mar 2025 09:49 PM IST
शिव शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 21 Mar 2025 09:49 PM IST
सार
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रवक्ता रूहुल कबीर रिजवी ने शुक्रवार को अवामी लीग को लेकर सुझाव देते हुए कहा कि अवामी लीग की राजनीति में वापसी पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए, बशर्ते वह ऐसे नेता को चुने जो किसी अपराध का दोषी न हो, जिसने छात्रों की हत्या न की हो, या जिसपर मनी लांड्रिंग के आरोप न हों।
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शेख हसीना
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
बांग्लादेश की राजनीति में अवामी लीग की वापसी को लेकर खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी ने बड़ा बयान दिया है। बीएनपी ने कहा है कि उसे शेख हसीना की अवामी लीग की राजनीति में वापसी पर कोई आपत्ति नहीं है। बीएनपी का यह बयान तब आया है जबकि एक दिन पहले ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा था कि उसकी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की कोई योजना नहीं है।
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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रवक्ता रूहुल कबीर रिजवी ने शुक्रवार को अवामी लीग को लेकर यह बयान दिया। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि अवामी लीग की राजनीति में वापसी पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए, बशर्ते वह ऐसे नेता को चुने जो किसी अपराध का दोषी न हो, जिसने छात्रों की हत्या न की हो, या जिसपर मनी लांड्रिंग के आरोप न हों।
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इससे पहले ढाका विश्वविद्यालय के दो छात्र संगठनों ने अवामी लीग के खिलाफ अलग-अलग विरोध प्रदर्शन करके मांग की थी कि अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। वहीं, छात्र नेतृत्व वाली नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा, हम नहीं चाहते कि हसीना की पार्टी का कोई भी नामलेवा आगामी चुनावों में सक्रिय हिस्सा ले। इस्लाम ने कहा कि अवामी लीग के जो लोग गलत कामों के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर सबसे पहले मुकदमा चलाया जाए। इस्लाम ने कहा, हमारा लक्ष्य एक संविधान सभा के जरिये द्वितीय गणराज्य की स्थापना करना है।
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पांच अगस्त से भारत में हैं शेख हसीना
गौरतलब है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं। वे अपनी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर छात्र नेतृत्व वाले विद्रोह के बीच पांच अगस्त को भारत चली गई थीं। इस दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में कई लोग घायल हुए। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 753 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। इस मामले में हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ अपराध और नरसंहार की 60 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के खिलाफ 225 मामले दर्ज हैं, इनमें हत्या के 194, मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार के 16 मामले, अपहरण के तीन मामले, हत्या के प्रयास के 11 मामले और ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ की रैली पर हमले के संबंध में एक मामला शामिल है।
बांग्लादेश में क्यों भड़की थी हिंसा?
बांग्लादेश को साल 1971 में आजादी मिली थी। आजादी के बाद से ही बांग्लादेश में आरक्षण व्यवस्था लागू है। इसके तहत स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को 30 प्रतिशत, देश के पिछड़े जिलों के युवाओं को 10 प्रतिशत, महिलाओं को 10 प्रतिशत, अल्पसंख्यकों के लिए 5 प्रतिशत और दिव्यांगों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। इस तरह बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में 56 प्रतिशत आरक्षण था। साल 2018 में बांग्लादेश के युवाओं ने इस आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई महीने तक चले प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश सरकार ने आरक्षण खत्म करने का एलान किया।
5 जून को बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने देश में फिर से आरक्षण की पुरानी व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया। शेख हसीना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील भी की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को बरकरार रखा। इससे छात्र नाराज हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन बाद में बढ़ते-बढ़ते हिंसा में तब्दील हो गया था।