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Khaleda Zia: बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट से पूर्व पीएम खालिदा जिया को बड़ी राहत, भ्रष्टाचार मामले में बरी
Mon, 03 Mar 2025 03:57 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 03 Mar 2025 03:57 PM IST
सार
बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया था। भ्रष्टाचार का यह मामला 14 साल पुराना है। पुलिस ने 2011 में मामला दर्ज किया था।
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट से पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को बड़ी राहत मिली है। देश की शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में उन्हें बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा है। जिस मामले में जिया को राहत मिली है, वह साल 2011 का है। सुप्रीम कोर्ट से पहले हाईकोर्ट ने भी खालिदा जिया को बरी करने का फैसला सुनाया था। निचली अदालत ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले खालिदा जिया को सात साल जेल की सजा सुनाई थी। बीएनपी अध्यक्ष खालिदा जिया स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। बीते दिनों उन्हें इलाज के लिए लंदन ले जाया गया।
खालिदा जिया और अन्य लोगों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार
देश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति मोहम्मद अशफाकुल इस्लाम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय अपीलीय खंडपीठ ने आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने राज्य और भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आयोग ने खालिदा जिया और अन्य लोगों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
सात साल पहले हुई थी सजा, 14 साल पुराना है मुकदमा
79 साल की जिया को 2018 में दोषी ठहराया गया था। ढाका की एक अदालत ने उन्हें जिया चैरिटेबल ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में सात साल की कैद और एक मिलियन टका जुर्माने की सजा सुनाई थी। नवंबर, 2024 में जिया और दो अन्य दोषियों- जियाउल इस्लाम और मोनिरुल इस्लाम खान ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने तीनों को आरोपों से बरी कर दिया था। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सोमवार को इस पर अदालत ने फैसला सुनाया, जिसमें तीन न्यायाधीशों की पीठ ने खालिदा जिया को बरी किए जाने का निर्णय बरकरार रखा।
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पूर्व पीएम जिया को किस मामले में सजा हुई थी
बता दें कि साल 2011 में तेजगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने खालिदा जिया और तीन अन्य लोगों पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। इन लोगों पर अज्ञात स्रोतों से जिया अनाथालय ट्रस्ट और जिया चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए धन जुटाने के आरोप लगे थे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रमुख खालिदा जिया को अनाथालय ट्रस्ट मामले में सजा के बाद फरवरी, 2018 में ढाका की सेंट्रल जेल में रखा गया था।
खालिदा जिया को 776 दिनों तक जेल में रहना पड़ा
देश की एक अन्य महिला प्रधानमंत्री- शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में खालिदा जिया को 776 दिनों की कैद के बाद एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रिहा किया गया था। जिया 1991 से 1996 तक प्रधानमंत्री रही थीं। इसके बाद उन्हें 2001 से 2006 की अवधि में भी पीएम रहने का मौका मिला था। अगस्त, 2024 में शेख हसीना के देश छोड़कर भागने के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शबहाबुद्दीन के आदेश पर जिया को रिहा किया गया।
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खालिदा जिया और अन्य लोगों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार
देश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति मोहम्मद अशफाकुल इस्लाम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय अपीलीय खंडपीठ ने आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने राज्य और भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आयोग ने खालिदा जिया और अन्य लोगों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
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सात साल पहले हुई थी सजा, 14 साल पुराना है मुकदमा
79 साल की जिया को 2018 में दोषी ठहराया गया था। ढाका की एक अदालत ने उन्हें जिया चैरिटेबल ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में सात साल की कैद और एक मिलियन टका जुर्माने की सजा सुनाई थी। नवंबर, 2024 में जिया और दो अन्य दोषियों- जियाउल इस्लाम और मोनिरुल इस्लाम खान ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने तीनों को आरोपों से बरी कर दिया था। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सोमवार को इस पर अदालत ने फैसला सुनाया, जिसमें तीन न्यायाधीशों की पीठ ने खालिदा जिया को बरी किए जाने का निर्णय बरकरार रखा।
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पूर्व पीएम जिया को किस मामले में सजा हुई थी
बता दें कि साल 2011 में तेजगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने खालिदा जिया और तीन अन्य लोगों पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। इन लोगों पर अज्ञात स्रोतों से जिया अनाथालय ट्रस्ट और जिया चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए धन जुटाने के आरोप लगे थे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रमुख खालिदा जिया को अनाथालय ट्रस्ट मामले में सजा के बाद फरवरी, 2018 में ढाका की सेंट्रल जेल में रखा गया था।
खालिदा जिया को 776 दिनों तक जेल में रहना पड़ा
देश की एक अन्य महिला प्रधानमंत्री- शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में खालिदा जिया को 776 दिनों की कैद के बाद एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रिहा किया गया था। जिया 1991 से 1996 तक प्रधानमंत्री रही थीं। इसके बाद उन्हें 2001 से 2006 की अवधि में भी पीएम रहने का मौका मिला था। अगस्त, 2024 में शेख हसीना के देश छोड़कर भागने के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शबहाबुद्दीन के आदेश पर जिया को रिहा किया गया।
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