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Khabaron Ke Khiladi: कितने दिन चलेगा पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, तनाव लंबा चला तो किसे होगा कितना नुकसान?
Sat, 14 Mar 2026 05:06 PM IST
Kirtivardhan Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Sat, 14 Mar 2026 05:06 PM IST
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- फोटो : Amar Ujala
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबा खिंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति हर दिन इस युद्ध के जल्द खत्म होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हर दिन ईरान की तरफ से नए हमले हो रहे हैं। ईरान के साथ चल रहा इस्राइल ओर अमेरिका का यह युद्ध कितना लंबा खिंच सकता है। इस युद्ध के लंबा खिंचने पर भारत जैसे दूसरे देशों पर क्या असर होगा? कुछ ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, अवधेश कुमार, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
रामकृपाल सिंह: ईरान की सत्ता धार्मिक सत्ता भी है और सैनिक सत्ता भी है। जिस तरह से इस वक्त पश्चिम एशिया को इस वक्त एक तरह से बंधन बनाया गया है। वो सोचने वाला है। युद्ध के बारे में कहा गया है कि युद्ध दो बूढ़ों का जो अपनी जिदंगी जी चुके हैं। जो एक दूसरे को मारना चाहते हैं, एक दूसरे को जानते हैं। वो कुछ ऐसे नवजवानों को इकट्ठा करते हैं जो एक दूसरे को जानते भी नहीं, एक दूसरे से नफरत भी नहीं करते वो एक दूसरे को मारते हैं।
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रामकृपाल सिंह: ईरान की सत्ता धार्मिक सत्ता भी है और सैनिक सत्ता भी है। जिस तरह से इस वक्त पश्चिम एशिया को इस वक्त एक तरह से बंधन बनाया गया है। वो सोचने वाला है। युद्ध के बारे में कहा गया है कि युद्ध दो बूढ़ों का जो अपनी जिदंगी जी चुके हैं। जो एक दूसरे को मारना चाहते हैं, एक दूसरे को जानते हैं। वो कुछ ऐसे नवजवानों को इकट्ठा करते हैं जो एक दूसरे को जानते भी नहीं, एक दूसरे से नफरत भी नहीं करते वो एक दूसरे को मारते हैं।
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राकेश शुक्ल: सरकार गैस संकट से निपटने के लिए उत्पादन बढ़ा रही है। इस संकट से सबसे बड़ी समस्या उद्योगों को आ रही है।
अवधेश कुमार: अमेरिका के रणनीतिकार ये जानते हैं कि अंतिम परिणाम के लिए हमें दो साल से ज्यादा वक्त लगेगा। दो लाख लोग वहां उतारने पड़ेंगे। 15 हजार से ज्यादा की मौत हो सकती है। ईरान ने पहली बार यह दिखाया है कि उसने कहां मिसाइलें रखी हैं। मोजताबा अली खामनेई ने दावा किया है कि हमारे पास न्यूक्लियर बम है। ये सब आदमी फ्रस्ट्रेशन में कहता है। सत्ता की समस्या वहां हल नहीं हुई है। वहां तीन फोर्सेस सत्ता के लिए लड़ रही हैं। इस युद्ध का अंत बहुआयामी होगा। इसके बाद ईरान में क्या होगा यह देखना होगा।
अवधेश कुमार: अमेरिका के रणनीतिकार ये जानते हैं कि अंतिम परिणाम के लिए हमें दो साल से ज्यादा वक्त लगेगा। दो लाख लोग वहां उतारने पड़ेंगे। 15 हजार से ज्यादा की मौत हो सकती है। ईरान ने पहली बार यह दिखाया है कि उसने कहां मिसाइलें रखी हैं। मोजताबा अली खामनेई ने दावा किया है कि हमारे पास न्यूक्लियर बम है। ये सब आदमी फ्रस्ट्रेशन में कहता है। सत्ता की समस्या वहां हल नहीं हुई है। वहां तीन फोर्सेस सत्ता के लिए लड़ रही हैं। इस युद्ध का अंत बहुआयामी होगा। इसके बाद ईरान में क्या होगा यह देखना होगा।
अनुराग वर्मा: पिछले कई वर्षों से मैं देख रहा हूं कि युद्ध अब खत्म हो रहे हैं। अब तो ऐसा लगने लगा है कि जैसे सरकारों के बाकी विभाग और मंत्रालय होते हैं। उसी तरह युद्ध का भी एक विभाग बन चुका है। अब तो लोग ये भी भूल चुके हैं कि रूस यूक्रेन क्यों लड़ रहे हैं। इस्राइल हमास का युद्ध कब से शुरू हुआ क्या उसका अंत हुआ। ऐसे में ईरान का युद्ध इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा ये कैसे सोचा जा सकता है।
विनोद अग्निहोत्री: ईरान को हमने दुनिया का खलनायाक मान लिया है। लेकिन क्या ईरान ने कभी किसी राष्ट्रध्यक्ष को उसकी पत्नी समेत उठाया है। हमें चीजों के एक तरफा नहीं देखना चाहिए। शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को कोई मानने के लिए तैयार नहीं है। दुनिया का हथियार उद्योग कैसे चलेगा। इस तरह के लोगों के लिए व्यक्तियों की जरूरत नहीं है। ईरान इतना सस्टेन कर पाएगा इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। खामेनेई की बात हर कोई कर रहा है लेकिन नेतेन्याहू कहां है ये कोई नहीं पूछ रहा है। संयुक्त राष्ट्र क्या कर रहा है इस पर भी सवाल है। मुझे लगता है कि अली खामेनेई की हत्या का दांव अमेरिका को उल्टा पड़ गया है। शायद उन्हें इसका अंदाजा नहीं था। लड़ाई कब तक चलेगी ये कोई नहीं बता सकता है।
विनोद अग्निहोत्री: ईरान को हमने दुनिया का खलनायाक मान लिया है। लेकिन क्या ईरान ने कभी किसी राष्ट्रध्यक्ष को उसकी पत्नी समेत उठाया है। हमें चीजों के एक तरफा नहीं देखना चाहिए। शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को कोई मानने के लिए तैयार नहीं है। दुनिया का हथियार उद्योग कैसे चलेगा। इस तरह के लोगों के लिए व्यक्तियों की जरूरत नहीं है। ईरान इतना सस्टेन कर पाएगा इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। खामेनेई की बात हर कोई कर रहा है लेकिन नेतेन्याहू कहां है ये कोई नहीं पूछ रहा है। संयुक्त राष्ट्र क्या कर रहा है इस पर भी सवाल है। मुझे लगता है कि अली खामेनेई की हत्या का दांव अमेरिका को उल्टा पड़ गया है। शायद उन्हें इसका अंदाजा नहीं था। लड़ाई कब तक चलेगी ये कोई नहीं बता सकता है।