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US चुनाव 2016 विवाद: रूसी दखलअंदाजी मामले में नई जांच, पूर्व CIA-FBI अफसरों को नोटिस; ट्रंप बने थे राष्ट्रपति

Sat, 08 Nov 2025 09:13 AM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 08 Nov 2025 09:13 AM IST
सार

ट्रंप प्रशासन की तरफ से एक बार फिर साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव की फाइलों को फिर से खोला गया है। इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने कई लोगों को समन जारी किए है। ट्रंप प्रशासन का नया कदम यह दिखाता है कि अब भी 2016 की रूस जांच से जुड़े लोगों और फैसलों की जवाबदेही तय करने की कोशिश में है।

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Justice Department issues flurry of subpoenas in fresh inquiry into Trump-Russia probe
न्याय विभाग - सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI / Reuters

विस्तार

अमेरिकी न्याय विभाग ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी रूस जांच को लेकर एक नई जांच शुरू की है। इस जांच के तहत विभाग ने बड़ी संख्या में समन जारी किए हैं। ये समन उस सरकारी जांच से संबंधित हैं जो 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस की दखलअंदाजी को लेकर की गई थी।
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क्या है मामला?
2016 के चुनाव में रूस पर आरोप था कि उसने अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी, ताकि डोनाल्ड ट्रंप को जीत मिल सके और हिलेरी क्लिंटन को नुकसान पहुंचे। इस आरोप की जांच ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने की थी और जनवरी 2017 में एक रिपोर्ट जारी की थी। अब ट्रंप प्रशासन उसी रिपोर्ट की दोबारा पड़ताल करवा रहा है। इस बार समन फ्लोरिडा के सदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से जारी हुए हैं। इनका मकसद यह पता लगाना है कि 2017 की उस रिपोर्ट की तैयारी में किन बातों को आधार बनाया गया था और क्या उसमें किसी तरह की राजनीतिक पक्षपात की भूमिका रही थी।
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किन लोगों को भेजे गए समन?
हालांकि सभी नाम अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जिन लोगों को समन मिले हैं उनमें जॉन ब्रेनन, पूर्व सीआईए निदेशक; पीटर स्ट्रजक, एफबीआई के पूर्व काउंटर इंटेलिजेंस अधिकारी; लिसा पेज, एफबीआई की पूर्व वकील शामिल हैं। पीटर स्ट्रजक और लिसा पेज, दोनों रूस जांच में शामिल थे और बाद में ट्रंप के खिलाफ निजी संदेशों के कारण विवादों में आए थे। स्ट्रजक को बर्खास्त किया गया था जबकि पेज ने इस्तीफा दे दिया था। बताया जा रहा है कि करीब 30 समन जारी किए जाने की योजना है।


आरोपों का साफ नकार चुके हैं ट्रंप
ट्रंप पहले भी बार-बार इस जांच को राजनीतिक साजिश करार दे चुके हैं। वे मानते हैं कि यह जांच उनके खिलाफ बनाई गई साजिश थी। म्यूलर रिपोर्ट और अन्य कई सरकारी जांचों में यह पाया गया कि रूस ने अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप या उनके सहयोगियों का रूस के साथ सीधा साजिशी संबंध साबित नहीं हुआ।

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अब, व्हाइट हाउस में दोबारा लौटने के बाद ट्रंप प्रशासन इस पुराने मामले को फिर से खंगाल रहा है। वर्तमान एफबीआई निदेशक काश पटेल, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड इस जांच से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के पक्ष में हैं। जुलाई में जारी सीआईए रिपोर्ट में कहा गया था कि 2017 की मूल रिपोर्ट में कुछ तकनीकी खामियां थीं, और स्टील डॉसियर को शामिल करने से विश्लेषण की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी।
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