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राफेल सौदा: कथित भ्रष्टाचार की जांच पर फ्रांस तैयार, जज की हुई नियुक्ति, रिपोर्ट में दावा

Sat, 03 Jul 2021 09:54 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 03 Jul 2021 09:54 AM IST
सार

राफेल सौदे को लेकर हुए कथित भ्रष्टाचार की फ्रांस में न्यायिक जांच होगी। राफैल सौदे को लेकर जांच के लिए एक फ्रांसीसी जज को नियु्क्त किया गया है। 

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judicial inquiry to be held in france on rafale deal corruption the deal was done on 2016
राफेल विमान - फोटो : Twitter

विस्तार

फ्रांस के साथ हुए भारत के राफेल सौदे को लेकर फ्रांस की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत के साथ करीब 59 हजार करोड़ रुपये के राफेल सौदे में कथित भ्रष्टाचार की अब फ्रांस में न्यायिक जांच होगी। इस जांच के लिए एक फ्रांसीसी जज को नियुक्त किया गया है।

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फ्रांसीसी मीडिया जर्नल मेडियापार्ट की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2016 में दोनों देशों के बीच हुई इस डील की अत्यधिक संवेदनशील जांच औपचारिक तौर पर 14 जून से शुरू हो गई थी। बता दें कि फ्रांसीसी वेबसाइट ने अप्रैल 2021 में राफेल सौदे के कथित अनियमितताओं को लेकर कई रिपोर्ट प्रकाशित की थीं।
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मेडियापार्ट ने दावा किया कि फ्रांस की सार्वजनिक अभियोजन सेवाओं की वित्तीय अपराध शाखा के पूर्व प्रमुख, इलियाने हाउलेट ने सहयोगियों की आपत्ति के बावजूद राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के सबूतों की जांच को रोक दिया था। रिपोर्ट में कहा गया कि हाउलेट ने फ्रांस के हितों, संस्थानों के कामकाज को संरक्षित करने के नाम पर जांच को रोकने के अपने फैसले को सही ठहराया था। 
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इसके अलावा मेडियापार्ट की नई रिपोर्ट में कहा गया कि अब पीएनएफ के नए प्रमुख जीन-फ्रेंकोइस बोहर्ट ने जांच के समर्थन का फैसला किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि आपराधिक जांच तीन लोगों के आसपास के सवालों की जांच करेगा। इसमें पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद (सौदे पर हस्ताक्षर किया था), वर्तमान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन (तत्कालीन वित्त मंत्री) और विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन, जो उस समय रक्षा विभाग संभाल रहे थे। 


बता दें कि साल 2016 में भारत सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल विमानों का सौदा किया था, जिसके तहत एक दर्जन राफेल विमान भारत को मिल भी गए हैं। जिस समय ये डील हुई थी, उस समय भारत में काफी विवाद हुआ था। लोकसभा चुनाव से पहले राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा था।

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