फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Joint session of Pakistan Parliament passes bill to curb powers of chief justice

Pakistan: संसद के संयुक्त सत्र में CJP की शक्तियों पर अंकुश लगाने वाला बिल पास; शहबाज के दांव से इमरान चित

Mon, 10 Apr 2023 10:47 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 10 Apr 2023 10:47 PM IST
सार

इससे पहले, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने विधेयक को संसद को वापस पुनर्विचार के लिए लौटा दिया था। इस विधेयक में देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) की शक्तियों को कम करने की बात कही गई है। अल्वी ने कहा कि प्रस्तावित कानून विधायी निकाय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे एक 'रंगीन' कानून के रूप में पेश किया जा सकता है।  
 

विज्ञापन
Joint session of Pakistan Parliament passes bill to curb powers of chief justice
शहबाज शरीफ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान में जारी राजनैतिक और आर्थिक संकट के बीच, शहबाज सरकार ने बड़ा दांव खेला है। सोमवार को पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों पर अंकुश लगाने और पीठों के गठन के संबंध में एक विधेयक पारित किया। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने एक ट्वीट के जरिए इसका एलान किया। ट्वीट में नेशनल असेंबली ने लिखा कि 'संसद ने अपने संयुक्त सत्र में 'द सुप्रीम कोर्ट (प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर) बिल, 2023' पारित किया।' शहबाज सरकार के इस दांव को देश के पूर्व पीएम इमरान खान के लिए करारा झटका माना जा रहा है। 

विज्ञापन


गौरतलब है कि पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र में इस बिल को तब पारित किया गया है जब दो दिन पहले राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने 'द सुप्रीम कोर्ट (प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर) बिल, 2023'को पुनर्विचार के लिए संसद के पास वापस भेज दिया था। राष्ट्रपति अल्वी ने  प्रस्तावित कानून विधायी निकाय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसे एक 'रंगीन' कानून के रूप में पेश किया जा सकता है। 
विज्ञापन


 कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने सदन के संयुक्त सत्र में पेश किया बिल
राष्ट्रपति द्वारा बिल को वापस करने के दो दिन बाद कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ की अध्यक्षता में आयोजित सदन की संयुक्त बैठक में में 'द सुप्रीम कोर्ट (प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर) बिल, 2023' विधेयक पेश किया। सदन के संयुक्त सत्र के दौरान विधेयक में एक संशोधन के साथ मंजूरी दे दी गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सांसद ने किया था। संयुक्त सत्र में कानून मंत्री तरार ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश की स्वप्रेरणा (उनकी पहल पर) शक्तियों के खिलाफ शीर्ष अदालत के भीतर से आवाज उठ रही थी। इससे पहले, 27 मार्च को शीर्ष अदालत के दो न्यायाधीशों ने CJP की शक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि SC एक व्यक्ति, मुख्य न्यायाधीश के एकान्त निर्णय पर निर्भर नहीं रह सकता है। 

क्या है नियम? 
पाकिस्तान के संविधान के तहत, यदि राष्ट्रपति द्वारा लौटाया गया विधेयक संसद द्वारा पारित हो जाता है। तो इसे राष्ट्रपति के पास दोबारा भेजा जाना चाहिए। इसके बाद 10 दिनों के बाद यह स्वत: कानून बन जाएगा। भले ही राष्ट्रपति इसका समर्थन करने से इनकार कर दें।

पीटीआई कर रही विरोध
पाकिस्तान में मुख्य विपक्षी पार्टी पीटीआई इसका विरोध कर रही है। पीटीआई के वरिष्ठ नेता फवाद चौधरी ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी इस कानून को खारिज करती है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि यह बिल कूड़ेदान में जाएगा। हम इस कानून को खारिज करते हैं। 

सीजेपी बंदियाल की स्वत: संज्ञान लेने की शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहती है सरकार
सीजेपी उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा चुनाव की नई तारीख 14 मई तय की थी और चुनाव की तारीख 10 अप्रैल से बढ़ाकर 8 अक्तूबर करने के चुनाव आयोग के फैसले को रद्द कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना की थी, जिसने शीर्ष अदालत के इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। सरकार पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) बंदियाल की स्वत: संज्ञान लेने की शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहती है। 


बीते माह राष्ट्रपति के पास भेजा गया था
सर्वोच्च न्यायालय (अभ्यास और प्रक्रिया) विधेयक, 2023 को पिछले महीने संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित (अप्रूव्ड) किया गया था और मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 मार्च को मंजूरी दी थी। नेशनल असेंबली (संसद) ने कानून और न्याय पर स्थायी समिति द्वारा सुझाए गए कुछ संशोधनों के बाद इसे पारित किया। 30 मार्च को इसे सीनेट ने पारित कर दिया था।


विधेयक में कहा गया है कि शीर्ष अदालत के समक्ष हर कारण, मामले या अपील को मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों की एक समिति द्वारा गठित पीठ द्वारा सुना और निपटाया जाएगा। इसमें कहा गया है कि समिति के फैसले बहुमत से लिए जाएंगे। शीर्ष अदालत के मूल अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने पर विधेयक में कहा गया है कि अनुच्छेद 184 (3) के इस्तेमाल से संबंधित किसी भी मामले को पहले समिति के समक्ष रखा जाएगा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed