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अब अमेरिकी मध्य वर्ग उठाएगा बाइडन के 2.3 ट्रिलियन डॉलर वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का बोझ!

Sat, 15 May 2021 03:25 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 15 May 2021 03:25 PM IST
सार

जो बाइडन का इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज 2.3 ट्रिलियन डॉलर का है। प्रशासन के सामने चुनौती इस खर्च को जुटाने की है। रिपब्लिकन पार्टी ने कहा है कि बनने वाली सड़कों पर टोल टैक्स लगाया जाए और इलेक्ट्रिक कारों के खरीदारों से प्रति किलोमीटर कार चलाने के हिसाब से टैक्स वसूला जाए...

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Joe Biden softened on infrastructure package, ready to reconsider his plan to raise taxes on corporate houses
जो बाइडन - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

मिल रहे संकेतों के मुताबिक जो बाइडन प्रशासन ने अपने बहुचर्चित इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर समझौते का रुख अपना लिया है। रिपब्लिकन पार्टी के कड़े विरोध और डेमोक्रेटिक पार्टी में मतभेद के कारण राष्ट्रपति जो बाइडन कॉरपोरेट घरानों और अति धनी तबकों पर टैक्स बढ़ाने की अपनी योजना पर पुनर्विचार के लिए तैयार होते दिख रहे हैं। रिपब्लिकन नेताओं से बातचीत के बाद ऐसे संकेत मिलने शुरू हुए। रिपब्लिकन नेताओं ने ये साफ कर दिया कि वे धनी लोगों पर उतना टैक्स बढ़ाने का कतई समर्थन नहीं करेंगे, जिसका प्रस्ताव बाइडन प्रशासन ने अपने पैकेज में रखा है।

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डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के पहले अमेरिका में उच्चतम प्रत्यक्ष कर दर 34 फीसदी थी। ट्रंप ने इसे एक झटके में घटा कर 21 फीसदी कर दिया। जो बाइडन ने बीच का रास्ता अपनाते हुए इस दर को 28 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन खबरों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी और कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने साफ कह दिया है कि उच्चतम टैक्स दर को 25 फीसदी से ज्यादा करने का वे कतई समर्थन नहीं करेंगे। बताया जाता है कि ये सभी नेता धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाने के बजाय बनने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने वाले लोगों से टैक्स वसूलने के रिपब्लिकन प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।
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जो बाइडन का इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज 2.3 ट्रिलियन डॉलर का है। प्रशासन के सामने चुनौती इस खर्च को जुटाने की है। रिपब्लिकन पार्टी ने कहा है कि बनने वाली सड़कों पर टोल टैक्स लगाया जाए और इलेक्ट्रिक कारों के खरीदारों से प्रति किलोमीटर कार चलाने के हिसाब से टैक्स वसूला जाए। ये प्रस्ताव माना गया तो इसका मतलब मध्य वर्ग और कम आय वाले समूहों पर बोझ बढ़ाना होगा। लेकिन ऐसा लगता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी का एक बड़ा धड़ा इसके लिए तैयार हो गया है। लेकिन आशंका है कि इससे पार्टी के भीतर मतभेद गहरा सकते हैं।
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डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वॉर्नर ने कहा है कि यूजर फीस इस पैकेज का हिस्सा होना चाहिए। बताया जाता है कि इस हफ्ते जो बाइडन के साथ मुलाकात में डेमोक्रेटिक सांसदों किर्स्टन सिनेमा और टॉम कार्पर ने यूजर फीस लगाने के सुझाव पर उनसे बातचीत की। सांसद शेली मूर कपिटो ने वेबसाइट ब्लूमबर्ग को बताया कि राष्ट्रपति एक तार्किक समझौते तक पहुंचने के लिए तैयार हैं, हालांकि उन्होंने कहा है कि पैकेज के हर पहलू पर समझौता नहीं किया जा सकता।

सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैकॉनेल और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में पार्टी के नेता केविन मैकार्थी ने बाइडन से मुलाकात के बाद कहा था कि उन्होंने साफ कर दिया है कि वे टैक्स बढ़ाने का कतई समर्थन नहीं करेंगे। इसके बाद खबर आई कि रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति को सुझाव दिया है कि वे अपने पैकेज का आकार घटाकर इसे 800 अरब डॉलर का कर दें। इसी के साथ उन्होंने धन जुटाने के लिए यूजर फीस लगाने का सुझाव दिया है।


लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर एक धड़ा यूजर फीस का विरोध कर रहा है। उसकी दलील है कि मध्य वर्ग के लोग पहले से ही ज्यादा टैक्स दे रहे हैं, जबकि उनकी आमदनी भी घटी है। उधर कॉरपोरेट और धनी लोगों की संपत्ति बढ़ती गई है, जबकि उन पर टैक्स का बोझ घटा है। इसलिए टैक्स धनी तबकों पर ही बढ़ाया जाना चाहिए। डेमोक्रेटिक सीनेटर शेरॉड ब्राउन ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- यूजर फीस लगाने का मतलब होगा कि सालाना चार लाख डॉलर से कम कमाने वाले अमेरिकियों पर टैक्स बढ़ाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपब्लिकन पार्टी इस मामले में गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा- अब यह डेमोक्रेटिक पार्टी पर है कि वह इस पैकेज को मंजूरी दिलाने के लिए रचनात्मक तरीका ढूंढे।

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