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युवा नेता पीट बुटिजीज को चीन में अमेरिका का राजदूत बना कर दो-टूक संदेश देंगे बाइडन?
Thu, 10 Dec 2020 07:39 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 10 Dec 2020 07:39 PM IST
सार
डेमोक्रेटिक पार्टी के जानकारों का कहना है कि बुटिजीज की महत्वाकांक्षा राष्ट्रपति बनने की है। इसलिए वे भी अपना प्रोफाइल बढ़ाने को अहमियत दे रहे हैं। अगर उन्हें बीजिंग भेजा गया, तो विदेश नीति के मामले में उनका कद बढ़ेगा...
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Pete Buttigieg with Joe Biden
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
खबर ब्रेक करने के लिए मशहूर वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने अब कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन पीट बुटिजीज को चीन में अपने प्रशासन का राजदूत नियुक्त कर सकते हैं। वेबसाइट ने बाइडन टीम से जुड़े अपने सूत्रों के हवाले से ये खबर छापी है। 38 वर्षीय पीट बुटिजीज अमेरिका के उभरते हुए मशहूर नेताओं में एक हैं। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए जोरदार मुहिम चलाई थी। लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस लेकर जो बाइडन का समर्थन किया। माना जा रहा है कि पीट बुटिजीज का समर्थन बाइडन के लिए अहम साबित हुआ। इससे उनके पक्ष में मौहाल झुका।
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वेबसाइट एक्सियोस का कहना है कि अब बाइडन बुटिजीज के समर्थन के लिए अपना आभार जताना चाहते हैं। इस वक्त दुनिया भर की नजर इस सवाल पर है कि जो बाइडन के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद अमेरिका और चीन के संबंधों में क्या मोड़ आता है। ज्यादातर जानकारों की राय है कि दोनों देशों में तनाव बना रहेगा। लेकिन बाइडन चीन के साथ बातचीत भी जारी रखना चाहेंगे। इस लिहाज से बीजिंग में अमेरिकी राजदूत की हाई प्रोफाइल भूमिका होगी।
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डेमोक्रेटिक पार्टी के जानकारों का कहना है कि बुटिजीज की महत्वाकांक्षा राष्ट्रपति बनने की है। इसलिए वे भी अपना प्रोफाइल बढ़ाने को अहमियत दे रहे हैं। अगर उन्हें बीजिंग भेजा गया, तो विदेश नीति के मामले में उनका कद बढ़ेगा। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए पिछले अभियान के दौरान बुटिजीज ने बड़े पैमाने पर चंदा जुटाकर लोगों का ध्यान खींचा था।
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सबसे पहले आयोवा राज्य में जब प्राइमरी (उम्मीदवार चुनने) के लिए मतदान हुआ, तो उसमें पीट बुटिजीज और सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स के बीच कड़ी टक्कर हुई। दोनों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए। इस मामले में हालांकि कोई साफ तस्वीर नहीं उभरी, लेकिन मीडिया के एक बड़े हिस्से ने पीट बुटिजीज को विजेता घोषित किया था।
ऐसी चर्चा रही है कि बाइडन पीट बुटिजीज को मंत्री बनाएंगे। लेकिन चूंकि निर्वाचित राष्ट्रपति ने अपनी सरकार में महिला और अश्वेत नेताओं को ज्यादा जगह देने की नीति अपनाई है, इसलिए बुटिजीज के लिए जगह नहीं बन पाई है। हालांकि अभी भी अमेरिकी मीडिया में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि बुटिजीज को बाइडेन प्रशासन में कोई अहम घरेलू ओहदा भी मिल सकता है।
अतीत में बीजिंग में आमतौर पर राजदूत किसी वरिष्ठ और अनुभवी नेता को बनाया जाता रहा है। इसके पीछे यह मकसद भी रहा है कि चीन की भावनाएं संतुष्ट हों। उसे लगे कि वहां नियुक्ति को अमेरिकी प्रशासन ने खास अहमियत दी है। हालांकि बुटिजीज अपेक्षाकृत युवा नेता हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि उन्होंने अपनी हैसियत काफी बढ़ा ली है।
इस सिलसिले में अमेरिकी मीडिया में ये जिक्र भी किया गया है कि 1974 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड ने जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश को संपर्क अधिकारी बनाकर बीजिंग भेजा था। उस समय चीन की हैसियत आज जितनी नहीं थी। बुश तब 50 साल के थे। बाद में बुश देश के राष्ट्रपति बने। चर्चा है कि बाइडन भविष्य के लिए ऐसा ही संदेश बुटिजीज के मामले में देना चाहते हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी में जब अपना नाम वापस लेकर बुटिजीज ने बाइडेन का समर्थन किया, तब बाइडन ने कहा था कि बुटिजीज उन्हें उनके बेटे की याद दिलाते हैं। बाइडन ने कहा था कि उनकी इस टिप्पणी का क्या महत्व है, ये शायद बहुत से लोग नहीं समझ पाएंगे। लेकिन अपने बेटे से तुलना करना उनकी नजर में सबसे गहरा स्नेह है, जो वे किसी के लिए जता सकते हैँ। चर्चा है कि बुटिजीज के लिए बाइडन अपनी इस भावना को अब एक ठोस नियुक्ति के जरिए जताने की तैयारी में है।