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रूस से संबंध सुधारने की जापानी प्रधानमंत्री की पहल पर कई कयास

Tue, 19 Jan 2021 03:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 19 Jan 2021 03:21 PM IST
सार

रूस का दावा है कि 1945 के याल्टा समझौते के तहत इन द्वीपों को तत्कालीन सोवियत संघ को सौंपा गया था। ये हस्तांतरण दूसरे विश्व युद्ध में साम्राज्यवादी जापान की हार की पृष्ठभूमि में हुआ था...

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Japan PM yoshihide suga initiative to improve relations with Russia
Suga and Putin - फोटो : File Photo

विस्तार

रूस में जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के इस बयान को काफी उत्साह से लिया गया है कि रूस के साथ लंबे समय से चल रहे इलाकाई विवाद का हल जल्द निकल सकता है। इसे रूसी अधिकारियों ने उनके देश के साथ निकट संबंध बनाने की जापान की इच्छा के रूप में देखा है। रूस के लिए जापान का रुख इसलिए ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि जापान को अमेरिकी खेमे का देश माना जाता है।

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हाल में जापान अमेरिका की पहल पर बने चौगुट यानी क्वैड में भी शामिल हुआ, जिसे चीन का प्रभाव सीमित करने का प्रयास माना जाता है। इस गुट में शामिल बाकी दो देश भारत और ऑस्ट्रेलिया हैं। इस समय रूस से अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण हैं। अमेरिका में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद ये तनाव और बढ़ने का अंदेशा है।
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सुगा ने सोमवार को संसदीय सत्र की शुरुआत के मौके पर अपने संबोधन में कहा कि आधी सदी से कुरील द्वीपों को लेकर चल रहे राजनयिक तनाव को अगली पीढ़ी को नहीं सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा- ‘अब इस विवाद का अंतिम समाधान निकलना चाहिए। हम दोनों देशों के बीच पिछले समझौते के आधार पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।’
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ये बयान आने के बाद अपनी सालाना प्रेस कांफ्रेंस में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ‘हम अपने जापानी दोस्तों के साथ वार्ता का स्वागत करते हैं।’ साथ ही उन्होंने दोनों देशों के संबंधों की ताकत पर जोर दिया।

जापान प्रशांत महासागर में मौजूद इन द्वीपों पर अपनी संप्रभुता जताता रहा है। ये द्वीप रूस के तट से सुदूर पूर्व में स्थित हैं। एतिहासिक रूप से इन द्वीपों पर आइनु समुदाय के लोग रहते आए हैं। रूस का दावा है कि 1945 के याल्टा समझौते के तहत इन द्वीपों को तत्कालीन सोवियत संघ को सौंपा गया था। ये हस्तांतरण दूसरे विश्व युद्ध में साम्राज्यवादी जापान की हार की पृष्ठभूमि में हुआ था। तब से उन द्वीपों पर सोवियत संघ/रूस का शासन रहा है।

लेकिन जापान का दावा रहा है कि याल्टा समझौते में इन द्वीपों को शामिल नहीं किया गया था। इन द्वीपों को वह अपना ‘उत्तरी क्षेत्र’ बताता है। इस विवाद के कारण रूस और जापान दूसरे विश्व युद्ध के बाद शांति समझौते पर दस्तखत नहीं कर पाए। इसका अर्थ है कि तकनीकी रूप से अभी भी दोनों देशों में युद्ध चल रहा है।

पिछले दिसंबर में जापानी मीडिया में ये खबर छपी कि अमेरिका इन द्वीपों में जन्मे रूसियों को ग्रीन कार्ड देते वक्त उन्हें जापानी नागरिक की श्रेणी में रखता है। इनमें कई ऐसे लोग हैं, जो जातीय रूप से रूसी हैं। ये खबर आने के बाद रूस ने अमेरिका के इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी। तब रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा था- 1945 में कुरील द्वीपों को सोवियत संघ को हस्तांतरित किया गया था। लेकिन आज अमेरिका दूसरे विश्व युद्ध के समझौते को दोबारा खोल रहा है और इलाकों पर कब्जा करने की नीति को बढ़ावा दे रहा है।

लेकिन जब से सुगा प्रधानमंत्री बने हैं, वे रूस के साथ सद्भाव की नीति अपना रहे हैं। सितंबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कुरील द्वीपों को द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे पर लाने की पहल की थी। पूर्व प्रधानमंत्री शिन्जो आबे अमेरिका के बेहद करीबी समझे जाते थे। उस दौर में ऐसी पहल के कोई संकेत नहीं मिले।


लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि सुगा संभवतया रूस के साथ बेहतर रिश्ते बनाना चाहते हैं। ये बात अमेरिका को नागवार गुजर सकती है। इसके बावजूद उन्होंने जोखिम उठाया है। सोमवार को सुगा ने संदेश दिया कि पुतिन से बातचीत में उन्होंने जो कहा था, उस एजेंडे को आगे बढ़ाने का उनका इरादा पक्का है।

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