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ओलंपिक खेल: मेजबानी के दो अनुभवों के बीच डूब-उतरा रहा है जापान, पिछले 57 सालों में आए कई बदलाव

Mon, 19 Jul 2021 04:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 19 Jul 2021 04:51 PM IST
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सार
जापान का पहला हाईवे 1963 में बना और पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन ओलंपिक खेलों की शुरुआत से कुछ ही दिन पहले हुआ था। तब ओलंपिक खेल अक्तूबर महीने में हुए थे। दरअसल, ओलंपिक की मेजबानी के कारण जापान में इन्फ्रास्ट्रक्चर के कई प्रोजेक्ट तैयार किए गए थे...
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Japan first hosted the Olympics in 1964, that event laid the foundation for the country development
तोक्यो ओलंपिक - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ओलंपिक खेल शुरू होने में अब सिर्फ चार दिन बाकी हैं। इस बीच जापान में लगभग पूरी सार्वजनिक चर्चा ओलंपिक्स पर केंद्रित हो गई है। जिन मुश्किलों और आशंका भरे माहौल में इन खेलों का आयोजन हो रहा है, उसे लेकर देश में साफ तौर पर बेचैनी देखी जा रही है। इस मौके पर जापानी मीडिया में इस बात को बड़े गर्व से याद किया जा रहा है कि जापान ने जब पहली बार 1964 में ओलंपिक की मेजबानी की थी, तब उस आयोजन से देश के विकास की नींव पड़ी थी।



अतीत मोह के साथ 1964 के ओलंपिक्स को याद करते हुए टीकाकारों ने ध्यान दिलाया है कि गुजरे 57 साल में जापान नाटकीय ढंग से बदल गया है। यह याद किया गया है कि 1964 में बीटल्स ने अपना म्यूजिक अल्बम 'ए हार्ड डेज नाइट' रिलीज किया था और उसी वर्ष कैसियस क्ले (जिनका बाद में नाम मोहम्मद अली हो गया) मुक्केबाजी में हैवीवेट चैंपियन बने थे। तब दूसरे विश्व युद्ध को सिर्फ 19 वर्ष ही गुजरे थे, जिसमें जापान बुरी तरह पराजित हुआ था। उस युद्ध के दौरान हुए विनाश के असर से अभी देश उबरने की प्रक्रिया में ही था।

वेबसाइट निक्कई एशिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अब 57 साल बाद विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक जापान की प्रति व्यक्ति सालाना आय 40,113 डॉलर तक पहुंच चुकी है। यह धनी देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के सदस्य देशों के औसत 39,412 डॉलर से भी ज्यादा है। 1964 में जापान की प्रति व्यक्ति सालाना आय सिर्फ 843 डॉलर थी, जबकि ओईसीडी देशों की औसत सालाना आमदनी 1,647 डॉलर थी। यानी 1964 में जापान अभी विकसित देश होने के मुहाने पर ही पहुंचा था।

टीकाकारों ने ध्यान दिलाया है कि जापान का पहला हाईवे 1963 में बना और पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन ओलंपिक खेलों की शुरुआत से कुछ ही दिन पहले हुआ था। तब ओलंपिक खेल अक्तूबर महीने में हुए थे। दरअसल, ओलंपिक की मेजबानी के कारण जापान में इन्फ्रास्ट्रक्चर के कई प्रोजेक्ट तैयार किए गए थे।

जापान की आर्थिक विकास दर 1990 के बाद धीमी हो गई। इसके बावजूद 1964 की तुलना में जापान का जीडीपी आज 18 गुना ज्यादा है। ऐसा देश में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, निर्यात और घरेलू उपभोग बढ़ने के कारण हुआ है। आज यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस दौरान देश में आम जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 1964 में जापान की आबादी 9.71 करोड़ थी। आज उसकी आबादी 12.62 करोड़ है।

बीते 57 साल में खेल की दुनिया में जापान ने काफी प्रगति की है। एक समय वह एशिया की सबसे बड़ी खेल शक्ति बन गया था। बाद में चीन ने उसे पछाड़ दिया, लेकिन अभी भी वह दूसरी बड़ी ताकत है। इसके अलावा टेनिस में नाओमी ओसाका और बास्केटबॉल में युता वातानबे जैसे बड़े नाम आज जापान की शान हैं।

इसके बावजूद जापान में चल रही चर्चा में इस बात का बार-बार उल्लेख हो रहा है कि 57 साल पहले ओलंपिक खेलों ने देश में उत्साह भर दिया था। जापान के लोगों ने उस मेजबानी को राष्ट्रीय गौरव का मौका माना था। जबकि आज एक मजबूत जापान में इस मेजबानी को लेकर व्यापक रूप से नाराजगी दिखी है। टीकाकारों ने कहा है कि कोरोना महामारी ने राष्ट्रीय गौरव के दूसरी बार आए मौके पर ग्रहण लगा दिया है।

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